अपनी लंबित मांगों के समर्थन में आशा वर्करों का धरना जारी 


फरीदाबाद(Abtaknews.com)14 अक्टूबर,2020: स्थानीय बादशाह खान अस्पताल के बाहर अपनी लंबित मांगों के समर्थन में आशा वर्करों का धरना आज बुधवार को 51 वे दिन भी जारी रहा।आज के धरने की अध्यक्षता जिलाउप प्रधान अनीता भारद्वाज ने की जबकि संचालन कॉमरेड ओमप्रकाश ने किया। इस मौके पर सीटू के जिला प्रधान निरंतर पराशर, उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डंगवाल एवं बैंक कर्मचारी यूनियन के नेता कॉमरेड ओम प्रकाश विशेष रूप से उपस्थित थे। राज्य सरकार की टालमटोल की नीति से खफा हुई बैठी आशा वर्करों ने जमकर सरकार विरोधी नारे लगाए और जिला सिविल सर्जन के कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। आज के धरने में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर ताग्गा, पन्हेरा की आशा वर्करों ने भाग लिया। उन्होंने प्रोत्साहन राशियों का भुगतान करो, जोखिम भक्ता चार हजार रुपए लागू करो के नारे लगाए। आशाओं को जिला उपाध्यक्ष विरेंद्र सिंह डंगवाल ने संबोधित किया।अपने संबोधन में उन्होंने कहां की हरियाणा सरकार सरकार इस आंदोलन की अनदेखी कर रही है। जबकि 26 अगस्त को माननीय मुख्यमंत्री जी के ओएसडी श्री कृष्ण कुमार बेदी ने यूनियन के शिष्टमंडल को 10 दिन के अंदर आशाओं की मांगों का माननीय मुख्यमंत्री जी के साथ वार्तालाप करने के बाद समाधान करने का वादा किया था। लेकिन इस बात को कहे हुए 50 दिन व्यतीत हो गए। फिर भी आशाओं की समस्याओं ज्यों की त्यों बनी हुई है। सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में 22 सितंबर को हजारों आशा वर्कर सीएम सिटी करनाल में एकत्रित हुई।वहां पर सीएम आवास का घेराव किया गया। इसके बाद आशाओं को 20 अक्टूबर का समय फिर से दिया गया है। जबकि एक तरफ सरकार आशाओं को कारोना योद्धा की बता रही है। दूसरी तरफ इनके मसलों को हल नहीं करना चाहती है। जबकि वास्तविकता यह है कि जब कोरोना पूरे चरम पर था।इन आशाओं ने ही इस महामारी के दौरान सबसे अधिक काम किया। कंटेनमेंट जोन मैं जाकर सर्वे करके लाना और बीमार व्यक्ति को दवाई दिलाना ।यह सारे काम आशा वर्करों ने ही पूरे किए हैं। इन महत्वपूर्ण कार्यों को करने की एवज में इन्हें किसी भी प्रकार की प्रोत्साहन राशि नहीं दी गई है।इतना ही नहीं केंद्र सरकार द्वारा दी गई प्रोत्साहन राशियों का भी हरियाणा की सरकार ने भुगतान नहीं किया। जबकि जोखिम भत्ता सहित विभिन्न मांगों को लेकर आशा वर्कर 7 अगस्त से 26 अगस्त तक हड़ताल कर चुकी हैं।लेकिन सरकार ने इनकी मांगो के समाधान के लिए कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके बजाय 26 अगस्त को विधानसभा सत्र के दौरान पंचकूला में विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्रित हुई आशा वर्करों के खिलाफ पंचकूला पुलिस ने 28 अगस्त को झूठे मुकदमें दायर कर दिए। डगवाल ने कहा कि यूनियन के नेता झूठे मुकदमों से नहीं डरते हैं। फिर भी सरकार को इस तरह के ओछे हथकंडे नहीं अपनाने चाहिए। उन्होंने सरकार से झूठे केसों को रद्द करने की मांग की। आज के धरने को कामरेड ओम प्रकाश ने भी संबोधित किया। यूनियन की मुख्य मांगों में आशाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दो, एक्टिविटी की काटी गई 50% राशि वापस देने, ईएसआई, पी एफ का लाभ देने, जोखिम भत्ता ₹4000 लागू करने इत्यादि हैं।

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