सरकार ठेका सिस्टम खत्म कर ठेका कर्मचारियों को सीधा विभागों के पे-रोल पर रखे:सुभाष लाम्बा 

फरीदाबाद (abtaknews.com) 10अक्टूबर, 2020 :सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ठेका प्रथा समाप्त कर ठेका कर्मचारियों को बिचौलिए सिस्टम से निजात दिलाने की मांग की है। संघ ने पत्र में कहा है कि अगर सरकार ठेका सिस्टम खत्म कर ठेका कर्मचारियों को सीधा विभागों के पे-रोल पर रखने का फैसला करें तो आर्थिक संकट में सरकार को करोड़ों रुपए मासिक की बचत भी होगी। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने आरोप लगाया है कि प्रधान नियोक्ताओं की मिलीभगत से राज्य में ठेका कर्मचारियों का भारी आर्थिक शोषण हो रहा है । सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा व वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री ने बताया कि प्रदेश में करीब पचास हजार कर्मचारी आउटसोर्सिंग नीति पार्ट 1 के तहत विभिन्न विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों,नगर निगमों, परिषदों व पालिकाओं में लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि बिजली निगमों में तो आउटसोर्सिंग नीति 2015 की धज्जियां उड़ा कर करीब 15 हजार कर्मचारी पार्ट 2 की बजाय पार्ट 1 में  स्वीकृत रिक्त पदों के विरुद्ध ठेकेदारों के माध्यम से लगाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि इनको तो आसानी से ठेकेदारों को बीच से हटाकर पार्ट 2 में किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि हरियाणा वेयर हाउस, आईटीआई, नगर निगमों, परिषदों व पालिकाओं आदि अनेक विभागों से लगातार शिकायतें मिल रही है कि ठेकेदार प्रधान नियोक्ता की मिली भगत से विभाग से तो सरकार द्वारा निर्धारित वेतन प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन ठेका कर्मचारियों को पूरा वेतन नही दे रहे हैं। विभागों से प्राप्त की गई ईपीएफ व ईएसआई  की राशि की भी डकार रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो ठेका कर्मचारी पुरा वेतन व ईपीएफ की स्टेटमेंट व ईएसआई का कार्ड देने की मांग करता है तो उसको तूरंत नौकरी से निकाल दिया जाता है। ठेका खत्म होने और नया ठेका छूटने के बाद पुराने ठेका कर्मचारियों से नौकरी पर रखने के नाम पर 20 से 50 हजार तक रिश्र्वत लेने की शिकायते लगातार आ रही है। ऐसी शिकायत कोई और नही हरियाणा वेयर हाउस के चेयरमैन को भाजपा के विधायकों ने ही की है। ऐसी ही शिकायत आईटीआई के ठेका कर्मचारियों ने भी विभाग के मंत्री पं. मूलचंद शर्मा से की है।


प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया की जितने कर्मचारियों को लगाने का ठेका होता है,उतने कर्मचारी ठेकेदार कभी नही रखता है। लेकिन विभाग से वेतन ठेके में दर्ज कर्मचारियों की संख्या की दर से वसूल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ठेकेदारों के माध्यम से पार्ट 1 में लगे कर्मचारियों को नियमों के अनुसार डीसी रेट दिया जाता है। जिसमें से 12 प्रतिशत जीपीएफ और 0.75 प्रतिशत ईएसआई की कटौती की जाती है। प्रधान नियोक्ता (सरकारी विभाग) ठेकेदार को 12 प्रतिशत जीपीएफ,3.25 प्रतिशत ईएसआई और 18 प्रतिशत जीएसटी तथा 3 से 6 प्रतिशत तक सर्विस चार्जिज देता है। यानि अगर किसी ठेका कर्मचारी को 20 हजार वेतन मिलता है तो ठेकेदार को बिना कारण करीब 5 हजार रुपए दिए जाते हैं। उन्होंने ठेका प्रथा खत्म कर ठेका कर्मचारियों को सीधा विभागों के पे रोल पर लेने की मांग की।

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