हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को एक और दिया झटका,शिक्षा निदेशक द्वारा भेजा गया स्कूलों को पत्र


फरीदाबाद (Abtaknews.com)10अक्टूबर,2020:पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से निजी स्कूलों को इस ओर झटका लगा है। पंजाब के निजी स्कूलों ने गत सप्ताह डिवीजन बेंच द्वारा दिए गए उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें निजी स्कूलों को अपने स्टाफ को पूरा वेतन देने व केवल ऑनलाइन क्लास की सुविधा देने वाले स्कूलों को ही बच्चों से ट्यूशन फीस लेने का आदेश दिया गया था। इस आदेश के खिलाफ शुक्रवार को पंजाब के निजी स्कूलों ने हाई कोर्ट में अर्जी दायर कर आदेश वापस लेने की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने मांग को अस्वीकार करते हुए उनकी अर्जी को खारिज कर दिया है। इसके तुरंत बाद शिक्षा निदेशक हरियाणा पंचकूला ने सभी जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से प्राइवेट स्कूल संचालकों को हाईकोर्ट के आदेशों को मानने के लिए पत्र जारी कर दिया है। हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने इसे अभिभावकों की एक और जीत बताते हुए सभी स्कूल संचालकों से कहा है कि वे अपनी मनमानी पर रोक लगाएं और हाईकोर्ट के आदेश के मद्देनजर अभिभावकों से गत वर्ष की ही ट्यूशन फीस ही मासिक आधार पर वसूल करें इसके अलावा अन्य कोई फंड अभिभावकों से ना लें। जिन स्कूल संचालकों ने अभिभावकों से बढ़ी हुई ट्यूशन फीस, ट्रांसपोर्ट फीस, एनुअल चार्ज, कंप्यूटर फीस आदि वसूल ली है उस वसूली गई फालतू फीस को वापस करें या आगे की फीस में एडजस्ट करें।मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा व जिला सचिव डॉ मनोज शर्मा ने मंच की ओर से चेयरमैन एफएफआरसी कम मंडल कमिश्नर संजय जून को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे हाईकोर्ट के दिए गए फैसले का पूरी तरह से स्कूलों से अमल कराने और पेरेंट्स से वसूली गई गैरकानूनी फीस व फंड्स को वापस करने या आगे की फीस में एडजेस्ट करने के लिए निर्देश जारी करें ।

बता दें, 1 अक्टूबर को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों द्वारा बच्चों से मासिक फीस, वार्षिक शुल्क और ट्रांसपोर्ट फीस के मामले पर बड़ा फैसला दिया था। इन फीसों को वसूलने देने के एकल बेंच के फैसले के खिलाफ हरियाणा सरकार व अन्‍य की अपील पर हाईकोर्ट ने साफ़ कर दिया था कि जिन स्कूलों ने लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन क्लास की सुविधा दी है सिर्फ वही स्कूल छात्रों से टयूशन फीस वसूल सकते हैं। इसके साथ ही पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को पिछले सात महीनों की बैलेंस शीट भी चार्टेड अकाउंटेंट से वेरिफाई करवा दो सप्ताह में सौंपे जाने के आदेश दे दिए थे। जस्टिस राजीव शर्मा एवं जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू पर आधारित खंडपीठ ने यह आदेश सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ सरकार सहित अभिभावकों द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिए थे। हाई कोर्ट ने सिंगल बेंच के 30 जून के फैसले में संशोधन करते हुए यह आदेश जारी किए थे। इन आदेशों का निजी स्कूल विरोध कर रहे थे।

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