अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस, वृद्ध जन समाज की धरोहर, करें सम्मान : रविन्द्र कुमार मनचन्दा

फरीदाबाद (Abtaknews.com) 01अक्टूबर, 2020: राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद की सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड, जूनियर रेडक्रॉस और गाइडस ने मिलकर प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा की अध्यक्षता में अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। ब्रिगेड अधिकारी, जूनियर रेडक्रॉस काउन्सलर और प्राचार्य रविन्द्र कुमार ने कहा कि वरिष्‍ठ नागरिकों का सम्मान करना एवं उनके सम्बन्ध में चिंतन करना बहुत ही आवश्यक है। आज का वृद्ध समाज अत्यधिक कुंठा ग्रस्त है और सामान्यत: इस बात से सर्बाधिक दु:खी है कि जीवन का वृहत अनुभव होने के बाद भी कोई उनकी राय न तो लेना चाहता है और न ही उनकी राय को महत्व ही देता है। वृद्ध जन दिवस मनाने का उद्देश्य अपने वृद्ध नागरिकों का सम्मान करना, उनके सम्बन्ध में चिंतन करना तथा उनकी मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखना हैं। अपने को समाज में एक तरह से  निष्प्रयोज्य समझे जाने के कारण हमारा वृद्ध समाज सर्बाधिक दु:खी रहता है। वृद्ध समाज को इस दुःख और संत्रास से छुटकारा दिलाना आज की सबसे बड़ी जरुरत है। इस दिशा में ठोस प्रयास किये जाने की बहुत आवश्यकता है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि वृद्धों के कल्याण के लिए इस प्रकार के कार्यक्रमों को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए, जो उनमें जीवन के प्रति उत्साह उत्पन्न करे। भारत में 2007 में माता-पिता एवं वरिष्‍ठ नागरिक भरण-पोषण विधेयक संसद में पारित किया गया। इसमें माता-पिता के भरण-पोषण, चिकित्‍सा सुविधा की व्‍यवस्‍था और वरिष्‍ठ नागरिकों के जीवन और सं‍पत्ति की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि प्रश्न है कि दुनिया में वृद्ध दिवस मनाने की आवश्यकता क्यों हुई? क्यों वृद्धों की उपेक्षा एवं प्रताड़ना की स्थितियां बनी हुई हैं? चिन्तन का महत्वपूर्ण पक्ष है कि वृद्धों की उपेक्षा के इस गलत प्रवाह को कैसे रोकें क्योंकि सोच के गलत प्रवाह ने न केवल वृद्धों का जीवन दुश्वार कर दिया है बल्कि व्यक्ति व्यक्ति के बीच के भावात्मक फासलों को भी बढ़ा दिया है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने बताया कि विचारणीय है कि अगर आज हम वृद्धों को अपमान करते हैं, तो कल हमें भी अपमान सहना होगा। समाज का एक सच यह है कि जो आज जवान है उसे कल बूढ़ा भी होना होगा और इस सच से कोई नहीं बच सकता। लेकिन इस सच को जानने के बाद भी जब हम बुजुर्ग लोगों पर अत्याचार करते हैं तो हमें अपने मनुष्य कहलाने पर शर्म महसूस होती है। मनुष्यता को शर्मसार करने की स्थिति है। हमें समझना चाहिए कि वरिष्ठ नागरिक समाज की अमूल्य विरासत होते हैं। आज रविन्द्र कुमार मनचन्दा, प्राध्यापिका जसनीत कौर ने बालिकाओं निशा, सिमरन, प्रियांशी, वैशाली तथा कोमल सहित अन्य छात्राओं द्वारा वृद्धजनों पर बनाई गई पेंटिंग्स की प्रशंसा की।

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