वर्ल्ड हार्ट डे: दिल करता रहेगा काम, करें रक्तदान, विद्यार्थियों ने किया जागरूक

 

 
फरीदाबाद (abtaknews.com) 29 सितंबर, 2020 :राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद की सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड, जूनियर रेडक्रॉस और गाइडस के संयुक्त तत्वावधान में विश्व हृदय दिवस के अवसर पर प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा की अध्यक्षता में आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में हृदय का ध्यान रखने बारे जागरूक किया गया। सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड और जूनियर रेडक्रॉस प्रभारी एवम् प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि हृदय रोग के खतरे को हराने करने के लिए वर्ष में एक बार रक्तदान अवश्य करें। 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अनुसार हृदय रोग विश्व में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। इसलिए, विभिन्न हृदय रोग और कारकों को समझने और जानने के लिए  जरूरत है कि हम अपनी जीवन शैली को स्वस्थ रखें ताकि हृदय उचित प्रकार से धड़कता रहे। इस वर्ष वर्ल्ड हार्ट डे 2020 की थीम 'यूज हार्ट टू बीट कार्डियोवस्कुलर डिजीज' अर्थात हृदय का कार्य सभी अंगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए पूरे शरीर में रक्त पंप करना है।कोरोना फेफड़े के साथ ही दिल को भी नुकसान पहुंचा रहा है। ये दिल के आघात को बढ़ा देता है। पहले से दिल की बीमारी से जूझने वालों की स्थिति और भी गंभीर कर देता है। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जब वायरस से लड़ती है तो नसों में सूजन आ जाती है। शरीर में जगह-जगह थक्का सा जमने लगता है। हृदय में बनने वाला यह थक्का हृदयघात का कारण बन रहा है और जब हृदय इस तरह से काम करने में विफल रहता है, तो इसे हृदय की विफलता या हार्ट फेलियर के रूप में जाना जाता है यह सामान्यतः तब होता है जब हृदय फेफड़े से ऑक्सीजन इकट्ठा करने या शरीर के चारों ओर ऑक्सीजन युक्त रक्त को पंप करने के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं होता है। आपके हृदय से जो रक्त बाहर निकाला जाना चाहिए, वह आपके फेफड़ों और आपके शरीर के अन्य भागों में इकट्ठा हो जाता है। यही कारण है कि आप अपने हाथों, पैरों और पैरों में सांस की तकलीफ और सूजन का अनुभव कर सकते हैं। हार्ट फैल्योर वाले कुछ लोगों में दिल बढ़े हुए होते हैं, जो छाती के एक्स-रे पर देखे जा सकते हैं। एक कमजोर दिल अपने सारे रक्त को बाहर निकालने के लिए संघर्ष करता है, हृदय की मांसपेशियों के तंतु खिंच जाते हैं। समय के साथ, यह अतिरिक्त खिंचाव दिल को बड़े, कमजोर कक्षों के साथ छोड़ देता है और यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है और तत्काल चिकित्सा की जरूरत होती है। प्रारंभिक निदान और दवा उपचार के बिना अधिक सक्रिय जीवन जीने में मदद कर सकती है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने बताया कि तनाव हृदयघात के प्रमुख कारणों में से एक है। वर्तमान में सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक, जातिगत आदि भेदभाव के साथ ही गांव से शहर जाने वालों व गांव में रहने वालों, देश के बाहर जाने वालों और देश में रहने वालों, कोरोना पॉजिटिव तथा सामान्य लोगों के बीच भेद बढ़ा है। इससे समाज में तनाव का स्तर भी बढ़ रहा है। यह भारत तक ही सीमित नहीं, अन्य देशों की भी यही स्थिति है। इसे कम करने के लिए डब्ल्यूएचओ ने विश्व हृदय दिवस की थीम 'अपने दिल का उपयोग समाज, चाहने वालों और स्वयं के लिए करें' रखी है। तनाव कम करने का दायित्व समाज, सरकार और हम व आप सभी का है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा, संयोजिका प्राध्यापिका जसनीत कौर और पूनम के मार्गदर्शन में विद्यालय की बालिकाओं ताबिनदा, निशा और खुशी ने पेंटिग और पोस्टर बना कर तनाव से मुक्त रहने,  पोषक और संतुलित आहार, नियमित व्यायाम तथा निश्चित अंतराल पर रक्तदान कर दिल का ख्याल रखने की सीख दी।

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