एआईसीटीई ने शिक्षकों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के लिए जे.सी. बोस विश्वविद्यालय से किया समझौता


फरीदाबाद(Abtaknews.com) 18सितंबर, 2020 :  अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (एआईसीटीई) ने तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता मानदंडों को लेकर शिक्षकों के क्षमता निर्माण के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने तथा उन्हें सर्टिफिकेशन देने के लिए जे.सी. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी बोस विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के साथ समझौता किया है। 

कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने एआईसीटीई चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे के साथ एआईसीटीई मुख्यालय, नई दिल्ली में भेंट की तथा परस्पर सहयोग के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। दोनों ने अपने संस्थानों की ओर से समझौता पर हस्ताक्षर भी किए। इस अवसर पर एआईसीटीई के वाइस चेयरमैन प्रो. एम. पी. पूनिया तथा सदस्य सचिव प्रो. राजीव कुमार और जे.सी. बोस विश्वविद्यालय प्लेसमेंट, एलुमनी और कॉरपोरेट मामलों के डीन डॉ. विक्रम सिंह भी उपस्थित थे।
कुलपति ने कहा कि यह साझेदारी तकनीकी शिक्षा में उच्च मानक प्राप्त करने और तकनीकी संस्थानों की क्षमता में सुधार लाने के लिए एआईसीटीई की गुणवत्ता पहलों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय नैक और एनबीए मान्यता प्राप्त करने के लिए अपने संबद्ध कॉलेजों को मेंटरशिप सेवाएं प्रदान करने के लिए भी काम कर रहा है।
एआईसीटीई के चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे ने विश्वविद्यालय के साथ समझौते पर प्रसन्नता व्यक्त की और विश्वविद्यालय को एआईसीटीई गुणवत्ता पहलों के कार्यान्वयन के लिए हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
एआईसीटीई के साथ समझौते के तहत जे.सी. बोस विश्वविद्यालय परीक्षा सुधार, एनबीए प्रत्यायन और प्रक्रिया, एआईसीटीई द्वारा निर्धारित मॉडल पाठ्यक्रम, नवाचार के प्रारंभिक चरण में बौद्धिक संपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसके अलावा, एआईसीटीई की ओर से विश्वविद्यालय को प्रशिक्षण कार्यक्रम के मूल्यांकन के आधार पर शिक्षकों को सर्टिफिकेशन भी प्रदान करने के लिए अधिकृत होगा। दोनों संस्थानों के बीच पांच वर्ष की अवधि के लिए हुए इस समझौते के अंतर्गत विश्वविद्यालय प्रत्येक वर्ष 10 ऐसे कार्यक्रम आयोजित करेगा। कार्यक्रम की अवधि पांच दिनों की रहेगी। एआईसीटीई द्वारा ऐसे प्रत्येक कार्यक्रम के आयोजन के लिए विश्वविद्यालय को 1.5 लाख रुपये तक की सहयोग राशि प्रदान की जायेगी। 

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