हरियाणा में कृषि क्षेत्र में सुधार लाने के लिए लाए गये तीन अध्यादेशों पर वेबिनार में हुई चर्चा: जे पी दलाल 

चंडीगढ़(abtaknews.com)12 सितंबर,2020: हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  जे पी दलाल ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान औद्योगिक एवं अन्य वाणिज्यिक गतिविधियां बंद होने से  जब देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई थी, तो कृषि ही ऐसा क्षेत्र था, जिसने अर्थव्यवस्था को जिंदा रखा। श्री दलाल आज आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत घोषित कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड का उपयोग तथा केन्द्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में सुधार लाने के लिए लाए गये तीन अध्यादेशों पर आयोजित एक वैबिनार में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि उन्हें फक्र है कि देश के अन्नदाता ने आपदा की इस घड़ी में अर्थव्यवस्था को बचाने में अपना योगदान दिया। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अत्याधुनिक तकनीक से खेती करें। आत्मनिर्भर भारत भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक विजन है, जिसके तहत कृषि एवं किसान दोनों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बागवानी विभाग के  अधिकारियों से अपील की कि वे फल, सब्जी व फूलों के बीज की हरियाणा के नाम से ब्रांडिंग कर एक नया उत्पाद बनाएं ताकि किसानों को सस्ते व गुणवत्तापरक बीज उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि भले ही यह ब्रांड पीपीपी मोड पर लाया जाए। इसी प्रकार उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन में भी हरियाणा का नाम देश में है और इसके लिए कोई प्रोसैसिंग प्लांट हरियाणा ब्रांडिंग के नाम से लगाया जाना चाहिए।

श्री दलाल ने कहा कि दूध उत्पादन में भी हरियाणा को आगे लाना है। वीटा को भी अपने ब्रांड को बढ़ावा देना चाहिए और गुजरात के आणन्द अमूल दूध प्लांट का अध्ययन दौरे हरियाणा के दूध उत्पादक किसानों को करवाए जाने चाहिए।

 दलाल ने कहा कि सरकार किसान हित में हर निर्णय ले रही है और  भविष्य में लेती रहेगी। सरकार की  मंशा है कि किसान आत्मनिर्भर हो और इस के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में केन्द्र सरकार के तीन नए अध्यादेशों कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता अध्यादेश, 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 किसानों की बेहतरी के लिए ही हैं और इसमें एक भी ऐसी लाइन नहीं है, जिससे किसान का अहित हो। उन्होंने विपक्षी पार्टियों से भी अपील की कि वे इन अध्यादेशों पर राजनीति करने से पहले अच्छी तरह से पढ़ लें। लोकतंत्र में जन समर्थन सर्वोपरि है। किसानों से बातचीत के दरवाजे सदैव खुले हैं और किसान हित में यदि कोई सुझाव देगा तो सरकार उसका स्वागत करेगी

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चंडीगढ़, 12 सितंबर- आत्मर्निभर अभियान के तहत कृषि ढांचागत विकास के लिए निर्धारित एक लाख करोड़ रुपये में से हरियाणा ने अपने हिस्से के 3900 करोड़ रुपये की योजनाएं अनुमोदन के लिए केन्द्र सरकार को भेज दी हैं। ऐसा करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बन गया है। गौर करने लायक यह है कि मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री जेपी दलाल का प्रयास है कि लगभग 6000 करोड़ रुपये तक की योजनाएं हरियाणा को प्राप्त हों। 

यह जानकारी हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री संजीव कौशल ने आज उपरोक्त विषय पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों, प्रगतिशील किसानों, आढतियों, किसान उत्पादक समूहों, राइस मिलर्स, कॉटन मिलर्स व अन्य पणधारकों के साथ कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री जे पी  दलाल की उपस्थिति में आयोजित एक वैबिनार में दी।

श्री कौशल ने वैबिनार के पहले सत्र में कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड का उपयोग तथा कटाई उपरांत प्रबन्धन की सुविधाएं बढाने तथा आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर चर्चा की।  वैबिनार में कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य विभागों, बोर्डों, निगमों तथा बैंकों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी-अपनी योजनाओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी से न केवल देश की बल्कि विश्व की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है। देश की जीडीपी में भारी गिरावट आई है और अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने के लिए केन्द्र सरकार व राज्य सरकार ने नई योजनाएं बनाई हैं और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में एक लाख करोड़ रुपये कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए निर्धारित किए हैं। श्री कौशल ने कहा कि उन्हें खुशी हैं कि आज के इस वैबिनार में स्वयं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री जेपी दलाल ने 25 प्रगतिशील किसानों, 10 किसान उत्पादक समूह के प्रतिनिधियों, 5-5 आढती या व्यापारी, राइस मिल्लर, कॉटन मिल्स के प्रतिनिधियों व अन्य हितधारकों के साथ भाग लिया है और अमूल्य सुझाव भी दिए हैं। श्री कौशल ने बताया कि योजना के तहत कृषि उद्यमियों तथा स्टार्टअप को आगे लाना है। 

 हैफेड के प्रबन्ध निदेशक श्री डी के  बेहरा ने अवगत कराया कि कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड के तहत लगभग 3950 करोड़ रुपये की योजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपार्ट तैयार कर केन्द्र सरकार को भेजी गई हैं, जिनमें हैफेड द्वारा 352 करोड़ रुपये की, हरियाणा भण्डागार निगम द्वारा 315 करोड़ रुपये की, शुगरफैड द्वारा 72 करोड़ रुपये की, बागवानी विभाग द्वारा 1607 करोड़ रुपये की, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा 112 करोड़ रुपये की, हरियाणा डेरी विकास प्रसंघ द्वारा 87 करोड़ रुपये की तथा हरको बैंक द्वारा 1400 करोड़ रुपये की योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत वेयरहाउस, साइलो, कोल्ड चेन, तथा अन्य आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के लिए केवल प्रारम्भिक प्रसंस्करण के लिए दो करोड़ रुपये तक के ऋण पर सब्सिडी का प्रावधान है तथा यह योजना 2021 से 2030 तक रहेगी। 

हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की मुख्य प्रशासक श्रीमती सुमेधा कटारिया ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए अध्यादेशों कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता अध्यादेश, 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 के बारे विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को यह सुविधा दी गई है कि सरकारी मंडियों के बाहर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक मूल्य पर कोई प्राइवेट एजेंसी फसल की खरीद करना चाहती है तो किसान अपनी फसल अधिक दाम पर बेच सकता है।वैबिनार में सोनीपत के प्रगतिशील किसान कंवल सिंह चौहान, रादौर से मान सिंह आर्य, सिरसा से हरदीप सिंह सरकारिया, यमुनानगर से पवन कुमार, इंद्री से साहिब सिंह तथा हरदीप सिंह ने भी अपने विचार सांझे किए।

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चंडीगढ़, 12 सितंबर- हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी द्वारा अगले वर्ष वार्षिक परीक्षा मार्च-2021 में आयोजित करवाई जाने वाली मिडल, सैकेण्डरी एवं सीनियर सैकेण्डरी (शैक्षिक/स्वयंपाठी) परीक्षार्थियों के आधार कार्ड में नवीनतम फोटो अपडेट करवाए जाएंगे।

इस बारे में जानकारी देते हुए बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. जगबीर सिंह ने बताया कि मिडल, सैकेण्डरी एवं सीनियर सैकेण्डरी (शैक्षिक/स्वयंपाठी) वार्षिक परीक्षा मार्च-2021 में प्रविष्ठ होने वाले परीक्षार्थियों के आधार कार्ड में नवीनतम फोटो अपडेट करवाया जाना है।विद्यालयों के मुखियाओं को निर्देश दिए कि वे विद्यालयी परीक्षार्थी एवं स्वयंपाठी परीक्षार्थी आवेदन फार्म भरने से पूर्व अपने आधार कार्ड में नवीनतम फोटो अपडेट करवाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारी समय रहते अपने अधीनस्थ विद्यालयों को इस बाबत निर्देशित कर दें। 

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चंडीगढ़, 12 सितम्बर- हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री श्री अनिल विज ने कहा कि सरकार ने आयुष्मान भारत योजना में करीब 1.44 लाख लोगों के उपचार पर 169.4 करोड़ रुपए की राशि खर्च की है। इससे राज्य के लोगों को उत्कृष्ट अस्पतालों में 5 लाख रुपए तक की नि:शुल्क उपचार सुविधा प्राप्त करवाई जाती है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत राज्य के 1,17,335 मरीजों का उपचार प्राइवेट अस्पतालों में करवाया जा चुका है, जिन पर विभाग ने करीब 138.02 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसके अलावा, 26,402 मरीजों का उपचार पब्लिक अस्पतालों में करवाया गया है, जिनके उपचार पर 31.36 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई है। इसके साथ ही, राज्य के 22.49 लाख से अधिक लोगों के आयुष्मान भारत के गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं, जिनको आधार से लिंक किया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के अन्तर्गत लाभार्थियों का उपचार करने वाले अस्पतालों का भुगतान निर्धारित समयावधि में किया जा रहा है। इसके लिए केन्द्र सरकार ने हरियाणा को देश में सबसे पहले बिलों की अदायगी करने वाले प्रदेश के तौर पर पुरस्कृत भी किया है।

आयुष्मान भारत योजना के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. रवि विमल ने बताया कि लोगों की सुविधा के लिए राज्य के सभी सरकारी एवं पैनल के निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के कार्ड नि:शुल्क बनाए जाते हैं। इसके लिए कॉमन सर्विस सेंटर पर भी मामूली शुल्क पर ऐसे कार्ड सृजन की सुविधा प्रदान है। उन्होंने बताया कि सरकार ने कोविड-19 मरीजों को भी आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया है।

डॉ. विमल ने बताया कि प्रदेश के अस्पतालों में स्थानीय सिविल सर्जन की अध्यक्षता में जिला कार्यान्वयन इकाई कार्य कर रही है, जिनके लिए एक-एक नोडल अधिकारी भी कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में अभी 530 सरकारी एवं निजी अस्पताल हरियाणा सरकार के पैनल पर हैं और अन्य अस्पताल भी पैनल पर आने की प्रक्रिया में हैं।

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