फरीदाबाद में कांग्रेसी नेताओं ने भारत छोड़ो आंदोलन एवं अगस्त क्रांति की वर्षगांठ मनाई

  

फरीदाबाद(Abtaknews.com)09अगस्त, 2020: कांग्रेस की देश को आज़ाद कराने में बड़ी भूमिका है। कांग्रेस पार्टी ने अलगाव नहीं लगाव की राजनीति की है। सभी के सहयोग से सबको साथ लेकर चलने वाले सबसे पुराने राजनैतिक दल कांग्रेस का इतिहास बहुत गौरवशाली है। अपनी इसी परम्परा और सोच को पार्टी वर्तमान समय में भी बखूबी निभा रही है। जिसके चलते भारत में एक सच्चे और अच्छे लोकतंत्र की स्थापना संभव हो पाई। देश की आज़ादी में अपने प्राण आहूत करने वाले क्रांतिकारी और सभी देशभक्तों को याद करने और उन्हे श्रद्धांजलि देने का आज ऐतिहासिक दिन है। उपरोक्त विचार हरियाणा कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव राजन ओझा ने ओल्ड फरीदाबाद राजीव गांधी चौक स्थित कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में वयक्त किए। अगस्त क्रान्ति के पुरोधाओं को नमन करने के उपरांत उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रदेश सचिव राजन ओझा ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन जिसे अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता है। 8 अगस्त 1942 की शाम को मुम्बई में हुई अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में यह घोषित किया गया था कि अब भारत में ब्रिटिश शासन की तत्काल समाप्ति भारत में स्वतंत्रता तथा लोकतंत्र की स्थापना के लिए अत्यंत जरुरी हो गयी है, जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र के देश फासीवादी जर्मनी, इटली और जापान से लड़ रहे हैं। यह प्रस्ताव भारत से ब्रिटिश शासन की समाप्ति के लिए लाया गया था। गांधीजी के आह्वान पर इस प्रभावशाली आंदोलन का 9 अगस्त, 1942 से समूचे देश में एक साथ आरम्भ हुआ। यह भारत को तुरन्त आजाद करने के लिये अंग्रेजी शासन के विरुद्ध एक सविनय अवज्ञा आन्दोलन था। इसमें कहा गया कि एक बार स्वतंत्र होने के बाद भारत अपने सभी संसाधनों के साथ फासीवादी और साम्राज्यवादी ताकतों के विरुद्ध लड़ रहे देशों की ओर से युद्ध में शामिल हो जायेगा। इस प्रस्ताव में देश की स्वतंत्रता के लिए अहिंसा पर आधारित जन आन्दोलन की शुरुआत को अनुमोदन प्रदान किया गया। प्रस्ताव के पारित होने के बाद गाँधी जी द्वारा दिया गया एक छोटा सा मंत्र-“करो या मरो” भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान प्रत्येक भारतीय लोगों के लिए एक सूत्रीय संकल्प और मुख्य नारा बन गया। यही वो आंदोलन था जो साल दर साल तेज होता गया जिसके चलते अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। अगस्त क्रान्ति ही आगे चलकर 15 अगस्त, 1947 की आजादी का आधार बनी। कांग्रेस प्रदेश सचिव राजन ओझा ने बताया कि गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद देशभर में आक्रोश बढने से आंदोलन तेज होता गया। जय प्रकाश नारायण, अरुणा आसफ अली, एस एम जोशी, राम मनोहर लोहिया सहित सैकड़ों नेताओं ने इस आंदोलन के दौरान क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया। इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं प्रगतिशील किसान मंच के अध्यक्ष सत्यवीर डागर, जिला कांग्रेस के प्रभारी मोहम्मद बिलाल उटावड़, रामजी लाल, राजेन्द्र सिंह चौहान, राजेश आर्य, सरदार हरजीत सिंह, के सी माहौर, नीरज गुप्ता, अशोक रावल, रमेश ओझा उर्फ़ टिंकू, नरेश, राहुल नागर, संजय सोलंकी, सुरेश राज, मुकेश श्रीधर, बाल किशन वशिष्ट चेयरमैन, हरीश ऋषि, अजय शर्मा, नगेश सहगल, देवेन्द्र शर्मा,  देवीसिंह, बाबूलाल मुख्यरूप से उपस्थित रहे।

No comments

Powered by Blogger.