हरियाणा सरकार द्वारा जिला अम्बाला में बब्याल-चंदपुरा रास्ते को किया जाएगा चौड़ा

चंडीगढ़(Abtaknews.com)22अगस्त,2020:हरियाणा सरकार ने जिला अम्बाला में बब्याल-चंदपुरा रास्ते को चौड़ा करने के मकसद से नगर परिषदअम्बाला सदर के गांव चन्दपुरा की एक कनाल 2 मरला भूमि लोक निर्माण (भवन एवं सडक़ें) विभाग को हस्तांतरित करने की स्वीकृति प्रदान की है। इस रास्ते के चौड़ा होने से इन गांवों के लोगों की मुश्किलें आसान हो जाएंगी।
        मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने इस आशय के एक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। इस भूमि की मल्कियत शामलात देह आरजी खेवट और भूमि की किस्म चाही है। इसका कलैक्टर रेट 44 लाख रुपये चाही प्रति एकड़ है।
        गौरतलब है कि गांव बब्याल को गांव चंदपुरा से जोडऩे वाले पहुंच मार्ग पर टांगरी नदी का एचएल ब्रिज निर्माणाधीन है। इस पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए जमीन की मौजूदा चौड़ाई केवल 5 करम है जबकि यातायात के सुचारू आवागमन के लिए इसकी चौड़ाई एक करम और बढ़ाए जाने की जरूरत है।
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चंडीगढ़, 22 अगस्त- हरियाणा  सरकार ने अपने छोटे से छोटे उद्योग को आधुनिक तकनीक से लबरेज करके उसके उत्पादों को गुणवत्तापरक बनाने का निर्णय लिया है। इससे उद्योगपतियों को उनके उत्पादों की बेहतर कीमत मिलेगी। हरियाणा के उपमुख्यमंत्री श्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि राज्य सरकार अपने प्रदेश के सूक्ष्म,लघु व मध्यम स्तर के उद्योगों को कोविड-19 महामारी के दौरान भी पूरा सहयोग कर रही है। सरकार ने इस दिशा में फोकस करते हुए दो ग्रामीण एमएसएमई कलस्टरों में अत्याधुनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर’(सीएफसी) स्थापित करने की मंजूरी दी है। इससे बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयाँ  आधुनिक तकनीकों से लाभान्वित होंगी।
        डिप्टी सीएमजिनके पास उद्योग एवं वाणिज्य विभाग का प्रभार भी हैने 10 वीं राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक में बताया कि नए सीएफसी से जिला सिरसा में फर्नीचर कलस्टर और जिला पानीपत में हैंडलूम एवं टेक्सटाइल कलस्टर को लाभ होगा। उन्होंने एमएसएमई निदेशालय द्वारा मंजूर की गई इन परियोजनाओं के बारे में राज्य सरकार के दृष्टिकोण को रेखांकित किया और बताया कि एमएसएमई राज्य के आर्थिक परिदृश्य का एक अभिन्न हिस्सा हैं और राज्य सरकार इन एमएसएमई पर फोकस करके इनको पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि इन सीएफसी की मंजूरी से न केवल एमएसएमई इकोसिस्टम मजबूत होगा बल्कि तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं पर सूक्ष्म उद्योगों की निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।
        श्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि राज्य मिनी कलस्टर विकास योजना’ के तहत गठित 10 वीं राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक के दौरान इन सीएफसी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत इन सीएफसी में सामान्य सुविधाएं स्थापित करने के किए राज्य सरकार 90 प्रतिशत अनुदान देगी।
        श्री चौटाला ने कहा कि कुल 4.50 करोड़ रुपये से अधिक के कुल निवेश वाली इन दोनों परियोजनाओं के डिजाइन व फिनिशिंग से सम्बंधित सामान्य सुविधाओं को स्थापित करने के लिए राज्य सरकार 3.50 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि ये सीएफसी अगले छह महीने के भीतर स्थापित कर दिए जाएंगे और इससे सम्बंधित जिलों में रोजगार के कई अवसर पैदा होंगेजबकि साथ ही साथ इनसे हजारों सूक्ष्म इकाइयों को अपनी उत्पादन लागत कम करने और उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार करने में फायदा मिलेगा।
        उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य मिनी कलस्टर विकास योजना के तहतएक कलस्टर जिसमें कम से कम 10 सूक्ष्म और लघु इकाइयां हैंवहां अधिकतम 2 करोड़ रुपये की लागत से सीएफसी स्थापित किया जा सकता है जिसमें 90 प्रतिशत वित्तीय सहायता राज्य सरकार देती है। राज्य सरकार द्वारा साल 2015 में शुरू की गई इस योजना को बड़ी सफलता मिली है।
        हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रधान सचिव श्री अपूर्व कुमार सिंहजो राज्य स्तरीय संचालन समिति के अध्यक्ष हैंने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश में एमएसएमई इकोसिस्टम  को मजबूत करने के लिए एक कलस्टर बनाने का दृष्टिकोण अपनाया है। इसके तहत सूक्ष्म ,लघू व मध्यम स्तर के उद्योगों में तकनीकी स्तर को बढ़ानेबाजार तक पहुंच में सुधारवित्तीय लिंकेज को सक्षम करना और एमएसएमई क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की कई पहल की जा रही हैं। उन्होंने आगे बताया कि राज्य मिनी कलस्टर विकास योजना के तहत 65 करोड़ रुपये की परियोजना लागत के साथ कुल 25 परियोजनाओं को अनुमोदित किया गया है और 12000 से अधिक एमएसएमई को लाभान्वित करने के लिए राज्य में 14 सीएफसी शुरू किए गए हैं।
        इस अवसर पर राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक में एमएसएमई के महानिदेशक श्री विकास गुप्ता के अलावा एमएसएमई डेवलेपमैंट इंस्टीच्यूट,करनाल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी व कलस्टरों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
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चंडीगढ़, 22 अगस्त- हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री जे.पी. दलाल ने कहा कि देश के अन्नदाता किसान की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कृषि में विविधिकरण बेहद जरूरी है। देश का किसान खुशहालआत्मनिर्भर और समृद्घ होगा तभी देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा।
        ये विचार हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री जे.पी. दलाल ने आज चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालयहिसार में कृषि में विविधिकरण व नई तकनीकों को लेकर आयोजित ऑनलाइन वेबिनार में व्यक्त किए। वेबिनार का आयोजन कृषि महाविद्यालय के वानिकी विभाग द्वारा किया गया था जिसमें श्री दलाल ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। वेबिनार का विषय कृषि में विविधता : किसानों की आजीविका में सुधार के लिए अभिनव कार्यक्रम’ था और इसके संयोजक कृषि वानिकी के विभागाध्यक्ष डॉ. आर.एस. ढिल्लो जबकि समन्यवक डॉ. विरेंद्र दलाल थे। कार्यक्रम में 1517 किसानों व कृषि वैज्ञानिकों ने पंजीकरण करवाया। 
        कृषि मंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते संकट की इस घड़ी में प्रदेश के अन्नदाता ने रिकॉर्ड उत्पादन करके देश के अनाज भंडार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। फसल विविधिकरणकृषि व इससे जुड़े व्यवसायउन्नत किस्मों के बीज और विश्वविद्यालय द्वारा विकसित आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। साथ हीजैविक खेतीफसल अवशेष प्रबन्धनसमन्वित कीट एवं उर्वरक प्रबन्धनजल संरक्षणप्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर खेती में खर्च को कम करने के साथ-साथ वे भूमि की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ा सकते हैं। इन चीजों को अपनाकर किसान रोजगार मांगने की बजाय रोजगार देने वाले बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसान मार्केटिंग में निपुणता हासिल करके और किसान उत्पाद समूह गठित कर लाभ उठा सकते हैं।
        उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी अटल रैंकिंग में कृषि विश्वविद्यालयों की श्रेणी में देश में प्रथम स्थान हासिल करने पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर समर सिंहविश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि आप सबकी कठोर मेहनत व टीम भावना की बदौलत विश्वविद्यालय को यह स्थान प्राप्त हुआ है।
        विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर समर सिंह ने कृषि मंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि वे किसानों की हर समस्या के समाधान के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस ऑनलाइन किसान-कृषि वैज्ञानिक संवाद का मुख्य उद्देश्य कृषि विविधिकरण और उन्नत तकनीकों के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाना है।

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