डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ई-सचिवालय’ से मंत्रियों व अधिकारियों से मिलेगी ऑनलाइन अपॉइंटमेंट

चंडीगढ़(Abtaknews.com)10जुलाई,2020:हरियाणा में आम जन को समयबद्ध तरीके से नागरिक केंद्रित सेवाएं प्रदान करने के लिए ई-गवर्नेंस की दिशा में एक और कदम उठाते हुए प्रदेश सरकार द्वारा जल्द ही एक डिजिटल प्लेटफॉर्म ई-सचिवालय’ लॉन्च किया जाएगा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के लॉन्च होने से आम जन को मंत्रियों और विभिन्न अधिकारियों से मिलने के लिए सरलता से ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की सुविधा मिलेगी।
ई-सचिवालय का उद्देश्य नागरिक सेवाओं के वितरण में बेहतर कामकाजसमन्वय और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिएविशेषकर कोविड-19 महामारी के समय मेंसरकार और अधिकारियों को एक प्लेटफॉर्म पर लाना है।     
यह जानकारी आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरियाण की मुख्य सचिव श्रीमती केशनी आनन्द अरोड़ा की अध्यक्षता में सभी प्रशासनिक सचिवों के साथ हुई ई-सचिवालय के कार्यान्वयन और मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) और लिटिगेशन प्रबंधन प्रणाली (एलएमएस) पर डाटा अपडेशन की समीक्षा बैठक के दौरान दी गई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को इन परियोजनाओं से संबंधित कार्यों के समय पर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए अपनी तैयारियों में तेजी लाने के निर्देश दिए। 
बैठक के दौरानमुख्य सचिव ने बताया कि ई-सचिवालय प्रणाली में अधिकारी वीडियो लिंक के माध्यम से जनता के साथ वर्चुअल बैठक आयोजित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि ई-सचिवालय के संचालन के लिए जल्द ही संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा और आवश्यक बुनियादी ढांचे और कर्मियों की भी व्यापक व्यवस्था की जाएगी।
एचआरएमएस एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो सरकारी विभागोंबोर्डोंनिगमोंसोसाइटी और विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की सेवा और आचरण से संबंधित सभी डाटा का संग्रह करता है। श्रीमती अरोड़ा ने कहा कि प्रत्येक नोडल अधिकारी एचआरएमएस पर परिचालन को सुचारू बनाना सुनिश्चित करें। एलएमएस एक अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म हैजो मुकदमेबाजी और मध्यस्थता के मामलों के लिए सरकारी विभागों के लिए वन-स्टॉप एक्सेस प्रदान करता है। मुख्य सचिव द्वारा एचआरएमएस और एलएमएस पोर्टल पर डाटा को अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। 
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर और प्रशासनिक सचिव उपस्थित थे और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया।
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चंडीगढ़, 10 जुलाई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने भू-जल संरक्षण के लिए क्रियान्वित की जा रही ‘‘मेरा पानी-मेरी विरासत’’ योजना के बाद प्रदेश में पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई मिशन प्राधिकरण गठित करने तथा भू-जल नियंत्रण के लिए राज्य भू-जल व जिला भू-जल योजना तैयार करने की स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने कोरोना काल को अवसर में बदलते हुए केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के साथ निरंतर वैबिनार से तथा बाद में दिल्ली में मुलाकात कर हरियाणा के लिए 1000 करोड़ रुपये की राशि मंजूर करवाई है।
         एक सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के दिशा निर्देशानुसार हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबन्धन प्राधिकरण ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों के पानी को तीन पोन्ड व पांच पोन्ड प्रणाली से उपचारित कर इसको सिंचाई व अन्य कार्यों के उपयोग के लिए हो इसके लिए योजनाओं पर तेजी से कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि जल शाक्ति मंत्रालय से प्राप्त फण्ड का उपयोग प्रदेश के लगभग 14,000 तालाबों के पानी को उपचारित करने को की जाएगी। सभी तालाबों की जीआईएस मैपिंग कर पोन्ड एटलस तैयार की गई है। इसके पहले चरण में 20 तालाबों को मॉडल तालाब के रूप में विकसित किया जा रहा है।
         प्रवक्ता ने बताया कि प्रदूषित तालाबों के पानी को उपचारित करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो-वाइसचांसलर एवं पर्यावरण वैज्ञानिक प्रोफेसर सी.आर. बाबू की नीला हौज़ जैव-विविधिकरण पार्कनई दिल्ली पर केस स्टडी के लिए अपनाई गई कन्सट्रक्टिड वेटलैंड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा हैजिसमें कचरे को रोकने के लिए तीन व चार स्थानों पर मोटे-मोटे पत्थर डालकर उसके बाद जंगली घास लगाई जाती है और बाद में पानी उपचारित होता है। प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री की सोच है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि हर तालाब को वर्ष में कम से कम एक बार खाली करके इसे पुन: नहरी पानीबरसात व अन्य स्रोतों से भरा जाए ताकि पानी का संचार होता रहे।
         उन्होंने बताया कि इस तकनीक के आधार पर कैथल जिले के क्योडक़ गांव के तालाब का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि हर तालाब की पानी की निकासी के लिए लगाए जाने वाले पम्पोंजहां तक संभव हो सोलर पम्प प्रणाली लगाई जा सके ताकि बिजली की भी बचत हो सके।
         प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबन्धन प्राधिकरण की आगामी बैठक 25 जुलाई2020 को होगी जिसमें मुख्यमंत्री सभी तालाबों के इस प्रौजेक्ट की समीक्षा करेंगे।
क्रमांक-2020
सत्यव्रत



चंडीगढ़, 10 जुलाई- चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर के.पी. सिंह ने कहा कि पौधों में आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति न होने के कारण उनसे उत्पादन कम मिल पाता है। इसलिए यदि मिट्टी में किसी तत्व की कमी हो तो उसकी पूर्ति खाद व उर्वरकों द्वारा की जानी चाहिए। उर्वरकों की मात्रा का निर्धारण करते समय मिट्टी की उपजाऊ शक्ति तथा फसल द्वारा अवशोषित किये गये पोषक तत्वों की मात्रा को ध्यान में रखना आवश्यक है।
         प्रोफेसर के.पी. सिंह ने कहा कि किसान फलदार पौधों के बाग तो लगा लेते हैंलेकिन जानकारी के अभाव के चलते बाग से उचित उत्पादन नहीं ले पाते। इसलिए बाग लगाने से पहले मिट्टी की जांच बहुत जरूरी है ताकि जांच से पता चल सके कि मिट्टी बाग लगाने के लिए सही है या नहीं। परीक्षण से मृदा की समस्याएं जैसे अम्लीयताक्षारीयता तथा लवणता इत्यादि का भी पता लगता है तथा यदि कोई समस्या है तो उसमें सुधार के लिए सुझाव दिये जा सकते हैं।       
         उन्होंने किसानों को सलाह देते हुए कहा कि यदि खेत की मिट्टी में अंतर हो तो मिट्टी का नमूना अलग-अलग खेत से लेना चाहिए। मृदा नमूना खेत के उस स्थान से न लें जहां पर गोबर खाद अभी डाली हो या जहां गोबर खाद का पहले ढेर लगाया गया हो। उन्होंने कहा कि किसान हाल ही में भूमि सुधारक रसायन या उर्वरक प्रयोग किए गए खेत से भी नमूना नहीं लेना चाहिए। इसके अलावानमूनों को खादराख या गोबर के संपर्क में न आने दें और नमूनों को उर्वरक वाले बोरों पर न रखें। उन्होंने कहा कि नमूनों को हवा व छाया में ही सुखाना चाहिये। कई किसान नमूनों को गर्म करके या धूप में सूखा देते हैंजो गलत है।
         मृदा विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि मिट्टी की जांच के लिए मिट्टी के नमूने खेत से सही ढंग से लिए जाने चाहिए। बाग के लिए मिट्टी का नमूना लेने का तरीका फसलों के नमूने लेने के तरीके से अलग होता है। मिट्टी के नमूने बरमे या मृदा ओगर से आसानी से लिये जा सकते हंै। उन्होंने बताया कि सबसे पहले 2 मीटर गहरा गड्ढा खोदना चाहिए। उसके बाद सतह से 15, 30, 60, 90, 120, 150 तथा 180 सेंटीमीटर की गहराइयों पर खुरपी से निशान लगाने चाहिए ताकि नमूने लेने में आसानी हो। उन्होंने बताया कि पहला नमूना ज़मीन की सतह से 15 सें.मी.दूसरा 15 से 30 सें.मी.तीसरा 30 से 60 सें.मी.,चौथा 60 से 90 सें.मी.पांचवां 90 से 120 सें.मी.छठा 120 से 150 सें.मी. और सातवां 150 से 180 सें.मी. तक की गहराई से लेकर अलग-अलग रख लेना चाहिए। प्रत्येक नमूना आधा किलोग्राम के लगभग होना चाहिए   
         उन्होंने बताया कि यदि कोई कठोर या रोड़ी वाली परत जमीन में आ जाए तो उसका नमूना अलग से लेकर परत की गहराई और मोटाई नोट करनी चाहिए। सभी नमूनों को साफ  कपड़े या पॉलिथीन की थैलियों में डालें और हर नमूने पर ध्यान से लेबल लगाएं। लेबल पर नमूने की गहराई लिखें व एक लेबल थैली के अंदर रखें एवं एक बाहर बांध दें। डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि मृदा के नमूने के साथ भेजे जाने वाले सूचना पत्र पर किसान का नामखेत का खसरा नंबर या नामनमूना लेने की तिथिसिंचाई का साधनखेत की कोई भी समस्यायदि कोई हैपत्र व्यवहार का पूरा पताभूमि की ढलान एवं किस प्रकार के पौधे खेत में हैं या लगाना चाहते हैं।

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