Thursday, June 4, 2020

श्रम कानूनों को खत्म करने,डीए,एलटीसी व नई भर्तियों पर रोक लगाने से गुस्साए कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

फरीदाबाद(Abtaknews.com)4जून,2020:पीटीआई सहित हजारों कर्मियों को नौकरी से निकालने, विभागों को निजी हाथों में सौंपने,श्रम कानूनों को खत्म करने,डीए,एलटीसी व नई भर्तियों पर रोक लगाने से गुस्साए विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया गया। इससे पहले एनआईटी व बल्लभगढ़ खंडों में भी प्रर्दशन किया गया। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर आयोजित इन प्रदर्शनों में सभी विभागों के कर्मचारियों ने भाग लिया और केन्द्र एवं राज्य सरकार की कर्मचारी एवं मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रर्दशन किया। प्रर्दशन के बाद सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा, जिला प्रधान अशोक कुमार ,सचिव बलबीर सिंह बालगुहेर व अध्यापक नेता भीम सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधान मंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपायुक्त यशपाल यादव को सौंपा। प्रदर्शनों में कोरोना योद्वा कहलवाने वाले स्वास्थ्य विभाग के दस हजार से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की निंदा की और 3200 सिक्योरिटी गार्ड, सफाई कर्मचारियों आदि ठेका कर्मचारियों की छंटनी पर रोक लगाने की मांग की। प्रदर्शनों में कमजोर पैरवी के चलते सुप्रीम कोर्ट से केस हार चुके 1923 पीटीआई को सेवा सुरक्षा प्रदान करने का कोई रास्ता निकालने की मांग की।  जिला मुख्यालय पर आयोजित प्रर्दशन का नेतृत्व प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा, कोषाध्यक्ष युद्वबीर सिंह खत्री, करतार सिंह, खुर्शीद अहमद, धर्मवीर वैष्णव, बल्लभगढ़ खंड में हुए प्रर्दशन का नेतृत्व रमेश तेवतिया, अशोक कुमार,राजबेल देसवाल, सुभाष देसवाल, एनआईटी खंड में नरेश कुमार शास्त्री, बलबीर सिंह बालगुहेर आदि नेता कर रहे थे।

प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में निम्नलिखित मांगों प्रमुखता से उठाया गया है-

1.स्वास्थ्य विभाग सहित कोविड 19 में काम कर रहे सभी विभागों के नियमित व अनियमित कर्मचारियों को कोविड-19 संक्रमण से बचाने के लिए प्रर्याप्त सुरक्षा उपकरण दिए जाए और सभी को एक समान 50 लाख एक्सग्रेसिया बीमा योजना में शामिल किया जाए।  

2.स्वास्थ्य विभाग के सिक्योरटी गार्ड समेत अन्य पदों पर कार्यरत ठेका कर्मचारियों की प्रस्तावित छंटनी पर रोक लगाई जाए। कार्यमुक्त किए 1983 पीटीआई शिक्षकों को सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए। लाकडाउन में छंटनी किए गए सभी विभागों के कर्मचारियों को वापिस काम पर लिया जाए। 

3.कर्मचारियों एवं पेंशनर्ज के महंगाई भत्ता पर जुलाई ,2021 तक बढ़ोतरी करने और एलटीसी पर एक साल तक लगाई गई रोक को हटाया जाए। 

4.एनपीएस रद्द कर जनवरी, 2006 से सेवा में आए कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नीति में शामिल किया जाए। 

5.ठेकेदारी प्रथा खत्म की जाए। ठेका कर्मियों को विभाग के पे-रोल पर लिया जाए। नियमित किए जाने तक समान काम समान वेतन लागू किया जाए। सभी विभागों के नियमित एवं ठेका कर्मचारियों को हर मास समय पर वेतन व बकाया का जल्द भुगतान किया जाए। 

6.पूंजीपतियों के हकों में श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी किए गए बदलावों को रद्द किया जाए। काम के घण्टे 8 से बढाकर 12 करने के फैसले को रद्द किया जाए। 

7 .शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं का राष्ट्रीयकरण किया जाए। बिजली, परिवहन सहित सार्वजनिक क्षेत्र के निजिकरण पर रोक लगाई जाए।

8.चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अप्रैल महीने में गेहूं खरीदने के लिए मिलने वाले ब्याज मुक्त ऋण का पत्र अविलंब जारी किया जाए।

9.नई भर्ती पर लगाई गई रोक हटाकर सभी रिक्त पदों को नियमित भर्ती से भरा जाए। सन् 2015 में 1035 टीजीटी (अंग्रेजी) सहित 1538 विज्ञापित पदों के जल्द परिणाम घोषित कर उन्हें ज्वाइन करवाया जाए।

10.लोकतांत्रिक गतिविधियों को रोकने के लिए बनाए गए यूएपीए जैसे काले कानून को समाप्त किया जाए और इसके तहत झुठे मुकदमों में गिरफ्तार किए गए सोशल एक्टिविस्ट को बिना शर्त रिहा किया जाए तथा धारा 311(2 एबीसी) खत्म की जाए।

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