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कोविड-19 महामारी की आड़ में बिजली का निजीकरण बर्दाशत नही : सुनील खटाना

फरीदाबाद(Abtaknews.com)06जून,2020:हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड वर्कर यूनियन सर्कल फरीदाबाद की चारों यूनिटों के प्रधान व सचिवों सहित सर्कल सेक्रेटी सन्तराम लाम्बा की अगुआई में एक आवश्यक मीटिंग कर कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई । जिसमे काफी विषयों के मसले पर सर्कल सचिव सन्तराम लाम्बा के साथ फरीदाबाद सर्कल कमेटी के चारों बिजली कर्मचारी नेताओं ने प्रदेश महासचिव सुनील खटाना से मिलकर अपने विचार रखे।जिनमे प्रधान लेखराज चौधरी, विनोद शर्मा, कर्मवीर यादव, सुनील कुमार, जयभगवान अन्तिल, वेद प्रकाश शर्मा, ठाकुर राजाराम ने कर्मचारियों से जुड़े अनेकों मुद्दों पर महासचिव को बताया । जिन्हें सुनने के बाद महासचिव सुनील खटाना ने कहा कि फिलहाल केन्द्र की सरकार व राज्य की सरकार जो आज जनता, मजदूर, किसान, व्यवसाय जगत और कर्मचारी विरोधी अधिनियम जैसे काले कानून में बिजली बिल अधिनियम-2020 को वैश्विक कोरोना महामारी काल की आड़ में जो इसे लागू करने की मन्शा को बनाये हुए है । इसे प्रदेश का कर्मचारी कभी सफल नही होने देगा । आज जब प्रदेश के कर्मचारियों ने इस पूरे ढाँचे को अपने खून पसीने से सींच कर खड़ा किया है । तो अँधेरे से उजाले की ओर बढ़ते बिजली विभाग को बड़े बड़े शरमायेदारों यानी निजी कम्पनियों के हाथों में बेचने के विरोध में यूनियन सड़कों पर उतरकर इसका पूर्ण विरोध करेगी । इस इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2020 बिल को कतई भी लागू नही होने देंगे । इसके लिये एचएसईबी वर्कर यूनियन अब कमर कस मैदान में उतरने का मूंड बना चुकी है । जिसके लिये प्रदेश कमेटी की हाई लेबल की एक बड़ी मीटिंग को बुलाकर जल्द ही कार्यक्रमों का ब्यौरा जारी कर सभी जिलों में सबडिवीजन स्तर से लेकर सर्कल स्तर पर और जिला अधिकारी से लेकर मन्त्रीयों के समक्ष धरने व विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया जायेगा । सरकार देश मे बिजली संयन्त्र आपूर्ति के प्रोजेक्ट लगाने की बजाय एवं बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर देने की बजाय अपनी जिम्मेदारीयों से पल्ला झाड़ बिजली महकमें का निजीकरण कर ओर ज्यादा बेरोजगारी बढ़ाने पर उतारू प्रतीत हो रही है । पूर्व की सरकारों ने देश मे ऐसे सरकारी तन्त्र के विभाग नो प्रोफेट व नो लोस के मद्देनजर बनाये गये थे । ना कि बेचने के लिये । इन विभागों को बचाने के लिये प्रदेश का एक एक कर्मचारी एकजुटता के साथ लामबन्द होगा । कर्मचारियों की नौकरियों पर सरकार का दमनात्मक कुठाराघात बर्दाश्त नही होगा । इसी कोविड-19 आपातकाल की आड़ और आर्थिक संकट का रोना रोकर जो सरकार ने कर्मचारियों की एलटीसी, डीए व अन्य वेतन भत्तों में कटौती करके द्वेषपूर्ण की नीति का परिचय दिया है और वहीं दूसरी ओर अपने ही मन्त्रियों के हाउस रेन्ट, टेलीफोन बिल सहित पचास हजार के खर्चों को ओर बढ़ाकर एक लाख तक कर दिया गया इसके लिये आर्थिक संकट की परिस्तिथि नही थी । ऐसे ही अनेकों मुद्दे पर प्रदेश की सरकार को घेरने का काम हरियाणा का कमेरा वर्ग करने का काम करेगा ।

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