कैसे सीएम मनोहर लाल बनें, नए हरियाणा के महानायक, जन्मदिन पर विशेष

  
चंडीगढ़ (Abtaknews.com- मुकेश वशिष्ठ )05मई, 2020:किसी भी देश अथवा समाज में महानायक बनने का साहस और आत्मविश्वास हर नायक में नहीं होता, श्वास-प्रश्वास लेते हुए भी लोग मृत होते हैं। हरियाणा की राजनीति में ऐसे लोगों की कमोवेश कमी नहीं है, जिन्होंने सत्ता को अपनी सुविधा के मुताबिक भोगा। जिसमें आम आदमी के सुखमय जीवन की बजाए अपने परिवार, अपनी जाति और अपने क्षेत्र की ज्यादा चिंता थी। लेकिन,अपने साढ़े 5 साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक महानायक की भांति ऐतिहासिक कदम उठाएं और स्थायी समाधान तलाशने की नीति को आगे बढ़ाया। 5 मई को मुख्यमंत्री मनोहरलाल का 66वां जन्मदिन है। इस मौके पर हम आपको ऐसे 10 ऐतिहासिक कदमों की जानकारी देंगे, जिनसे हरियाणा के स्वरूप में परिवर्तन आया है।
(1)  26 अक्तूबर, 2014 को सत्ता संभालने के बाद ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मेरिट और पारदर्शी तरीके से नौकरी देने का दावा किया। इस वायदे पर मनोहर सरकार पूरी तरह खरा उतरी। 25 मार्च 2015 को हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के गठन के तुरंत बाद सरकार ने इंटरव्यू के अंक 12.5 प्रतिशत तय कर दिए। साढ़े 5 साल के कार्यकाल में अब तक सरकार 83 हजार युवाओं को पारदर्शी व मेरिट के आधार पर नौकरी दे चुकी है। 

(2)  भ्रष्टाचार के खात्मे और पारदर्शी व्यवस्था बनाने के लिए मनोहर सरकार ई—सेवाओं पर विशेष जोर दे रही है। 37 विभागों की 491 योजनाएं व सेवाएं, 115 अंत्योदय एवं सरल केंद्रों और 4000 अटल सेवा केंद्रों के माध्यम से एक ही छत के नीचे मुहैया कराई जा रही है। योजनाओं के आनलाइन होने के कारण सरकारी कामकाज में तेजी आई है। साथ ही लोगों को घर बैठे सुविधा मिलनी शुरू हुई है। इसीतरह सरकार ने ट्रांसफर के नाम पर होते भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया है। सरकार अब तक 62,347 शिक्षकों का ऑनलाइन तरीके से ट्रांसफर कर चुकी है।

(3)  पूर्ववर्ती सरकारों के अधिकांश मुख्यमंत्री सीएलयू करने में रूचि लेते थे। इसलिए 1991 से लगातार वाणिज्यिक, आवासीय परियोजनाओं और कालोनियों के लिए लाइसेंस और सीएलयू आमतौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय देखता था। पहली बार है कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सीएलयू में कोई रूचि नहीं दिखाई। बल्कि लाइसेंस जारी करने की कानून द्वारा दी गई शक्तियां को नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग को वापस कर दी। अब एक एकड़ तक उद्योगों के लिए सीएलयू जिला उपायुक्त कर सकते है।

(4)  प्रदेश सरकार ने पढ़ी-लिखी पंचायत का सपने को क्रियान्वित कर सरकार ने अपने दृढ़ संकल्प को दृशाया है। इस फैसले के परिणामस्वरूप प्रदेश में 70071 सीटों में से 56 प्रतिशत यानि 39249 सीटों पर सर्वसम्मत चुनाव हुए। कुल 61323 पंचों में से 38555 पंच यानि 64 प्रतिशत सर्वसम्माति से चुने गए। 274 सरपंच, 11 पंचायत समिति सदस्य और दो जिला परिषद महिला सदस्य सर्वसम्मति से चुने गए। शैक्षणिक योग्यता में 23 प्रतिशत सरपंच स्नातक, 17 प्रतिशत 12वीं और 50 प्रतिशत 10वीं पास है। अब पंचायत विकास कार्यो के साथ सामाजिक सुधार की परिचायक बन रही है।

(5)  समाज के अंतिम छोर तक सस्ती दर पर राशन ईमानदारी से पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) मॉडल अपनाया है। आज प्रदेश के 29 लाख परिवारों के करीब एक करोड 22 लाख उपभोक्ताओं को पीडीएस सिस्टम के कंप्यूराइज तरीके से राशन दिया जाता है। अब केवल पात्र व्यक्ति को ही राशन मिलता है। क्योंकि इस डिवाइस पर बायोमैट्रिक से ही राशन लिया जा सकता है। इस मॉडल को अब मोदी सरकार भी अपनाने जा रही है।

(6)  किसानों को सशक्त बनाने के प्रति मुख्यमंत्री मनोहर लाल की लगन इसी बात से लगाई जा सकती है कि आजाद हिंदुस्तान में पहली बार किसी सरकार ने बेमौसम बारिश के चलते होने वाली फसल बर्बादी पर किसानो के लिए डेढ़ गुना मुआवजा बांटा। अपने पांच साल के दौरान 30 हजार करोड रूपये का मुआवजा बांट चुकी है। सरकार ने फसल जलने पर 12 हजार रूपए प्रति एकड के हिसाब से भी मुआवजा बांटा है। मुख्यमंत्री मनोहर ने कहा कि वो लोग भी मुआवजा पाने के हकदार होंगे जिनकी 33 फीसदी फसल बरबाद हुई है। अभी तक यह मानक 50 फीसदी था। किसानों की आय पर लगातार ध्यान देने के कारण प्रदेश के कृषि परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। प्रति कृषक परिवार की राष्ट्रीय मासिक औसत आय 6426 रुपये की तुलना में हरियाणा दूसरे नंबर पर 14,434 रुपये मासिक हुई है।

(7)  25 दिसंबर 2014 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर सीएम विंडो योजना शुरू कर मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने प्रदेश की जनता को कारगार हथियार मुहैया करवाया। आज सीएम विंडो सरकार जनता के बीच सीधे संवाद का सशक्त माध्यम बना है। इसके जरिए लोगों को जल्दी न्याय मिलने और उनकी समस्या हल होने का अवसर बढ़ा है। सभी जिला मुख्यालयों पर स्थापित सीएम विंडो के माध्यम से लोग अपनी शिकायतें और अन्य समस्या लिखित रूप में बिना खर्चे के दर्ज करा सकते है। सितंबर, 2019 तक 6 लाख 22 हजार 602 लोगों ने सीएम विंडो पर अपनी शिकायतें दर्ज कराई गई। आई शिकायतों में से अभी तक 5 लाख 80 हजार 901 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। आम लोगों तक सीएम विंडो की पहुंच बढाने के लिए हरियाणा सरकार ने अब ब्लॉक स्तर पर डेस्क बनाने की शुरूआत की दी है। हैं। शिकायतों पर उचित संज्ञान न लेने वाले 120 अधिकारियों व कर्मचारियों को सस्पेंड भी किया जा चुका है।

(8)  बीते सालों में कोई सरकार महिला सुरक्षा को लेकर इतनी चिंतित दिखाई दी। 32 महिला थाना खोलकर प्रदेश सरकार ने महिला सुरक्षा को लेकर अपनी कटिबद्धता जगजाहिर की है। जबकि पहले बहुत सारे मामलों में रेप की शिकायतें ही दर्ज नहीं हो पातीं। लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले उसके करीबी लोग अपराध के बाद उसे धमका कर या बहला-फुसला कर उसे पुलिस के पास भी नहीं फटकने देते।

(9)  2011 की जनगणना के अनुसार हरियाणा में प्रत्येक 1000 पुरुषों के अनुपात में केवल 879 महिलाएं थीं जोकि 940 की राष्ट्रीय औसत से काफी कम थी। जिसके कारण प्रदेश कन्या भू्रण हत्या के लिए जाना जाने लगा था। बेटियों को सम्मान देने के साथ प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र की अगुवाई में 22 जनवरी, 2015 को पानीपत से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया। कोरे विज्ञापन और जागरूकता अभियानों से निकल सरकार ने जमीनी स्तर पर काम शुरू किया फलस्वरूप प्रदेश का लिंगानुपात 930 हो गया है।
(10)  पूरा भारत कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है। ऐसे समय में सक्रिय भूमिका निभाकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दूसरे प्रदेशों के लिए मार्ग—प्रशस्त किया है। अलबत्ता कोरोना संकट में हरियाणा एक मॉडल प्रदेश बना है। केंद्र व प्रदेश का विश्लेषण करने पर ध्यान आता है कि हरियाणा देश के अन्य प्रदेशों से काफी अच्छी स्थिति में है। जहां राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना की मृत्यु दर अभी तक 3.19 प्रतिशत है। वहीं हरियाणा में यह 0.79 प्रतिशत है। इसीतरह मरीजों के ठीक होने की दर बढ़कर 24.52 फीसदी है। इस स्थिति में भी हरियाणा तीन गुणा अच्छा है, ठीक होने की दर 72.72 प्रतिशत है। प्रदेश में कोरोना की डबलिंग रेट 23 दिन का है। जबकि केंद्रीय स्तर पर डबलिंग रेट 11 दिन का है। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ—साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल जरुरतमंदों के लिए तत्पर है। फिलहाल सरकार 24 लाख गरीब परिवारों को सरकार आर्थिक सहायता और मुफ्त राशन मुहैया करा रही है।

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