Thursday, May 21, 2020

जे.सी.बोस विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय आत्मनिर्भर भारत-हैकाथॉन प्रतियोगिता का शुभारंभ

फरीदाबाद(Abtaknews.com)20मई,2020: हरियाणा उच्च शिक्षा तथा तकनीकी शिक्षा विभाग के महानिदेशक श्री अजीत बालाजी जोशी ने युवा इंजीनियरों और तकनीकीविदों से आग्रह किया है कि वे सरकार और प्राथमिक क्षेत्र, विशेषकर कृषि को कोरोना महामारी संकट से निपटने के लिए नवीन समाधान प्रदान करें। उन्होंने विद्यार्थियों की ऐसी समाधान आधारित परियोजना के लिए सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान करवाने का आश्वासन भी दिया।
महानिदेशक श्री जोशी जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद की इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय आत्मनिर्भर भारत - हैकाथॉन प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर कोरोना महामारी के उपरांत स्टार्ट-अप अवसरों को लेकर वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। वेबिनार की अध्यक्षता कुलपति प्रो दिनेश कुमार ने की। इवेंट का आयोजन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के अध्यक्ष डाॅ. लखविन्दर सिंह, डाॅ सपना गंभीर, टीईक्यूआईपी परियोजना निदेशक डॉ. विक्रम सिंह और एलुमनाई एवं कॉर्पोरेट अफेयर सेल के निदेशक डॉ. संजीव गोयल की देखरेख में किया जा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत हैकाथॉन प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों की 58 टीमों के 200 से ज्यादा विद्यार्थियों ने अपना पंजीकरण कराया है। इस प्रतियोगिता के विजेताओं को रुपये तक प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस प्रतियोगिता के विजेताओं को तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (टीईक्यूआईपी) के अंतर्गत 5 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन पुरस्कार राशि सीड मनी/ इंक्यूबेशन प्रोत्साहन के रूप में प्रदान की जायेगी।
महानिदेशक श्री जोशी ने कहा कि कोरोना महामारी में लॉकडाउन के बावजूद, कृषि क्षेत्र ही ऐसा क्षेत्र है जो सुचारू रूप से काम कर रहा है और इस पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं है। हालांकि, उन्होंने कृषि क्षेत्र में सप्लाई चेन नेटवर्क को संपर्क-रहित बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि कृषि क्षेत्रों और किसानों के लिए ऐसे समाधान बनाए जा सकते हैं, तो ऐसे समाधानों को आगे ले जाने तथा सरकारी स्तर पर लागू करवाने की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सरकारी और प्राथमिक क्षेत्र के लिए समाधान देने के लिए नवीन प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के लिए नई प्रौद्योगिकी और स्थानीय स्तर पर नवीन समाधानों की आवश्यकता पर भी चर्चा की। 
इससे पहले, अपने स्वागतीय भाषण में, कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने कोरोना महामारी के उपरांत उत्पन्न स्टार्ट-अप अवसरों का लाभ उठाने के लिए इनोवेशन तथा उद्यमशीलता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश को कोरोना संकट से निकालने के लिए युवा इंजीनियरिंग से बड़ी उम्मीदें हैं क्योंकि वे इनोवेटिव स्टार्टअप समाधानों के द्वारा कोरोना महामारी के उपरांत अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे सकते हैं।
इस सत्र के बाद उद्योग के विशेषज्ञों के साथ एक इंटरैक्टिव पैनल चर्चा हुई, जिसे विश्वविद्यालय में एडजंक्ट फैकल्टी अजय शर्मा द्वारा संचालित किया गया। यह चर्चा स्थानीय समस्याओं के लिए स्थानीय समाधान प्रदान करने के अवसरों का पता लगाने पर केंद्रित थी।
पैनल चर्चा के दौरान कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रवासी मजदूरों के समस्या के लिए समाधान देने पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को वर्तमान तथा भावी समस्याओं के लिए प्रौद्योगिकी आधारित समाधान प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया, और आश्वासन दिया कि ऐसे समाधानों को विश्वविद्यालय द्वारा पूरा समर्थन दिया जायेगा। उन्होंने बल दिया कि कॉर्पोरेट सेक्टर को स्थानीय प्रतिभाओं और स्थानीय उत्पादों की खरीद पर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि आत्म-निर्भर भारत को सफल बनाया जा सके। उन्होंने इनोवेटिव स्थानीय समाधान खोज में विद्यार्थियों को सहयोग देने के लिए उद्योग प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया।
पैनल चर्चा के दौरान, नीति निर्माता, राजकीय सुधारक और व्यवसायिक रणनीतिकार के रूप में पहचान रखने वाले श्री रमीश कैलासम जोकि वर्तमान में इंडियाटेक.ओआरजी (एक गैर-लाभकारी स्टार्ट-अप उद्योग संघ) के प्रमुख हैं, ने सरकार द्वारा व्यवसाय को सुविधाजनक बनाने के लिए शुरू किये गये नीतिगत ढाँचे में बदलावों को लेकर चर्चा की। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे एक ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल कंपनी को देश के सभी राज्यों में संचालन के लिए 37 कार्यालयों और जीएसटी पंजीकरण जरूरी है, लेकिन वहीं कंपनी एक ही कार्यालय से अपना कामकाज कर सकती है यदि वह देश के बाहर अपना कार्यालय स्थापित करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि स्थानीय समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रौद्योगिकीय इनोवेशन्स पर ध्यान केंद्रित करें, लेकिन साथ ही वैश्विक बाजारों पर भी नजर रखें।
विनिर्माण उद्योग के विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार ने कोरोना महामारी के उपरांत विनिर्माण क्षेत्र में पैदा होने वाले नए अवसरों और संभावनाओं के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान में घोषित प्रोत्साहन के बाद कंपनियां चीन से अपने विनिर्माण इकाईयों स्थानांतरित करने की संभावनाएं तलाश रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक दृष्टिकोण रखने तथा लॉकडाउन अवधि के दौरान अपने कौशल विकास पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। 
हरियाणा सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, और संचार विभाग में संयुक्त मुख्य सूचना और प्रौद्योगिकी अधिकारी श्री सुनील वट्टल ने महामारी के कारण उभर रही समस्याओं और लोगों के जीवन के दृष्टिकोण और परिवर्तित प्राथमिकताओं पर उनके दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बदलते परिवेश में कम से कम शारीरिक संपर्क और सामाजिक दूरी बनाते हुए कामकाज पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। ऐसे समय में, स्टार्टअप को प्रौद्योगिकी और इनोवेशन पर ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि यह ऐसी असामान्य परिस्थितियों में सफलता का उत्तम साधन बनने जा रहा है।
सिनोप्सिस इंडिया (पी) लिमिटेड के वरिष्ठ स्टाफ इंजीनियर तथा विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र विवेक मित्तल ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग कैसे भविष्य को बेहतर बनायेगा। अधिक से अधिक कंपनियां मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाएंगी। इस प्रकार, इन प्रौद्योगिकियों और संबंधित उत्पादों पर काम करने की अधिक संभावनाएं है। सत्र के अंत में कुलसचिव डॉ. एस.के. गर्ग ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया तथा विशेषज्ञ वक्ताओं का आभार जताया।
वेबिनार के अंत में प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने कोरोना महामारी के उपरांत उत्पन्न होने वाले विभिन्न स्टार्ट-अप अवसरों को लेकर विशेषज्ञों से जानकारी हासिल की। 

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