Saturday, May 30, 2020

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मविश्वासी से आत्मनिर्भर भारत

   
फरीदाबाद (Abtaknews.com मुकेश वशिष्ठ) 30मई,2020:  प्रधानमंत्री   नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का एक साल और कुल मिलाकर अपने कार्यकाल के छह साल पूरे कर लिए हैं। अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह के कई ऐतिहासिक फैसले लिए, वैसे ही फैसले बीते एक साल में भी लिए। तुलना करें तो ध्यान में आता है कि पांच साल में फैसलों से जहां देश में आत्मविश्वास का माहौल बना और एक नए आत्मविश्वासी भारत की तस्वीर उभर कर सामने आई। वहीं बीते एक साल में देश के आत्मविश्वास की डगर और मजबूत हुई। इसी कारण कोरोना वायरस से उपजी महामारी में विश्व त्राहि—त्राहि कर रहा है। दूसरी तरफ भारत तटस्थ भूमिका में इस संकट का डटकर मुकाबला कर रहा है। साथ ही संकट से समाधान निकालते हुए आत्मनिर्भर भारत की तरफ भी बढ़ रहा है।
2014 की भांति 2019 के चुनावों में भी मोदी ने भाजपा को प्रचंड जीत दिलाई। प्रचार के दौरान मोदी ने धुंआधार सभाएं कीं। उनके प्रचार की आक्रामक शैली ने विपक्ष पूरे चुनाव निरोत्तर रहा। बल्कि विपक्ष के नकारात्मक प्रचार को उन्होंने सकारात्मक रूप में लिया और भुनाया। इसबार भी चुनाव में बच्चों से लेकर बुर्जुग तक की जुबां पर एक ही नाम था 'मोदी'। सभाओं में उमड़े जनसैलाब ने बता दिया कि मोदी के व्यक्तित्व में कितना आकर्षण है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी का जादू आज भी बरकरार है। बल्कि मोदी का यह जादू अब दुनियाभर में सर चढ़कर बोल रहा है। आज राजनीतिक विश्लेषक मानते है कि मोदी पीएमओ में निश्चिंतता लेकर आए हैं। वो कहते हैं, " मोदी पीएमओ में निश्चिंतता लेकर आए है। पूर्व सरकारों में ऐसा लगता था कि पीएमओ ऑटो-पायलट मोड पर चलता है। उनका पीएमओ में होना महसूस हो रहा है।" वे वे आज भी उन दिनों को नहीं भूलते, जब अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिलने वाशिंगटन डीसी रवाना हो चुके मनमोहन सिंह की अनुपस्थिति में राहुल गांधी ने पत्रकारों के सामने एक अध्यादेश का मसौदा फाड़ दिया था। मगर, बीते छह साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर मुद्दे पर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। विश्व पटल पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत एक नए स्वरूप, नई सामर्थ्य के साथ खड़ा हुआ है। बीते छह साल के कार्यकाल में मोदी सरकार ने न केवल विश्व-मंच पर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है, बल्कि वह कई मोर्चों पर अगुवाई की भूमिका में भी है। अनेक अवसरों पर भारत की साख बनी है, बढ़ी है, जैसा इससे पहले कभी नहीं हुआ था।
2014 के चुनाव से पहले मोदी टैक्स भरने, व्यापार शुरू करने जैसी प्रक्रिया को सरल बनाने की बात करते थे। पासपोर्ट, परिचय पत्र, लाइसेंस, राशन कार्ड के आवेदन के अलावा कई महत्वपूर्ण कामों जैसे स्कूलों और विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए पहले किसी राजपत्रित अधिकारी के हस्ताक्षर की जरूरत होती थी, यानि उसे सत्यापित करवाना पड़ता था। अब इसे बंद कर दिया गया है और लोग खुद अपने दस्तावेज़ों को सत्यापित कर सकते हैं। इससे जिंदगी आसान हो गई है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना के माध्यम से देश में अभूतपूर्व बदलाव आया है, जिसके अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया कि देश के सभी नागरिक वित्तीय तंत्र में शामिल हों। इस योजना के तहत 38.57 करोड़ लोगों को फायदा मिला। कारोबार को आसान बनाने के ‘मेक इन इंडिया’ से निवेशकों और उद्यमियों में अभूतपूर्व उत्साह और उद्यमिता के भाव का संचार हुआ है। ‘श्रमेव जयते’ पहल के अंतर्गत श्रम सुधारों और श्रम की गरिमा से लघु और मध्यम उद्योगों में लगे अनेक श्रमिकों का सशक्तिकरण हुआ है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के जरिए कम पढ़े लिखे युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया और 16 लाख 61 हजार युवाओं को अपने—अपने क्षेत्र में रोजगार दिलाया गया। उज्ज्वला योजना, 8 करोड़ महिलाओं  के लिए वरदान साबित हुई है, जिन्हें खाना बनाने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। बीते छह साल में मोदी सरकार ने डिजिटाइजेशन पर काफी जोर दिया है। आज बैंकिंग क्षेत्र से लेकर अन्य सरकारी कार्यों में डिजिटाइजेशन को बढ़ावा मिला है, जिससे लोगों को काफी राहत मिली है। डिजिटल भुगतान को आसान बनाने बनाने वाली भीम एप के तहत पैसे सीधे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए जा सकते है। मुद्रा योजना के अंतर्गत 3 करोड़ युवाओं को 1 लाख 62 करोड़ रुपये देकर उद्यमी बनाने का काम किया है। मोदी सरकार में सरकारी कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई। कोयला ब्लॉक आंवटन से लेकर पर्यावरण संबंधी मंजूरियां के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हुई। पहली बार किसी सरकार और उसके मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे। अन्यथा कांग्रेस सरकार टूजी, कोयला, कॉमनवेल्थ, चॉपर, आदर्श सोसाइटी घोटालों के आरोपों से घिरी रही। स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत ने प्रधानमंत्री मोदी को जमीनी स्तर का नेता बना दिया। जहां देश में पहली बार स्वच्छता पर जनांदोलन शुरू हुआ और देश को खुले में शौच जैसे कुप्रभा से मुक्ति मिली। देश में 8.3 करोड़ शौचालयों का निर्माण हुआ। तीन तलाक पर कानून बनाकर मोदी सरकार देश को यह संदेश देने में सफल रही कि वह हर मुद्दे पर जागरूक है। रेल अवसंरचना में विदेशी निवेश को अनुमति, रक्षा में विदेशी निवेश सीमा बढ़ाकर 49 फीसदी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण मामले में सीमा 74 फीसदी और 36 राफेल युद्धक विमान की खरीदारी को मंजूरी देकर मोदी सरकार ने नया इतिहास रचा। उरी और पुलवामा आंतकी हमले के बाद पाकिस्तान को करारा जबाव देकर सरकार ने एक नए और आत्मविश्वासी भारत की नींव रखी। इसी आत्मविश्वास ने भारत को आगे बढ़ने की ताकत दी और संकटों से जूझना सिखाया। 
सही मायने में मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल आत्मविश्वासी भारत को आत्मनिर्भर बनाने का समय है। इसलिए साल के शुरुआत से सरकार ने कई अहम फैसले लिए। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना हो या फिर नागरिकता संशोधन एक्ट को पास करना हो या राम मंदिर जैसे मुद्दे को बिना किसी विवाद से खत्म करना, ऐसे सभी बड़े फैसलों के मोर्चे पर सरकार ने आक्रामक रुख अपनाया। 2019 के चुनाव में प्रधानमंत्री ने किसानों को पेंशन, आय दोगुनी उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने का जो वादा किया था, उसे सरकार बनने के बाद अमलीजामा पहनाने का काम किया।बाकायदा अपनी पहली कैबिनेट बैठक में देश के सभी किसानों को पेंशन देने के लिए किसान सम्मान योजना को मंजूरी दी। इसीतरह मोदी सरकार ने दूसरी बार सत्ता में आने के बाद 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' योजना को भी अमलीजामा पहना दिया है। इस योजना के जरिए एक ही राशन कार्ड पर कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी हिस्से में उचित मूल्य (जन वितरण प्रणाली) की दुकान से राशन ले सकेगा। इससे ना केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगा, बल्कि रोजगार या अन्य वजहों से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने वाले गरीबों को सब्सिडी वाले राशन से वंचित नहीं होना पड़ेगा। साथ ही जल संबंधी मुद्दों से निपटने के लिए एकीकृत मंत्रालय का गठन कर उन्होंने हर भारतीय को साफ पेयजल उपलब्ध कराने के संकल्प को और मजबूत किया। सरकार ने 'जलशक्ति अभियान' के तहत 256 जिलों के 1592 खंडों की पहचान है, जिन जगहों पर जल स्तर नीचे है। इसके जरिए जल संरक्षण और जल संचयन का लक्ष्य भी रखा गया है।
आज कोरोना वायरस न केवल पूरी दुनिया में इंसान की जान ले रहा है, बल्कि इसने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर संकट पैदा कर दिया है। ऐसी विकट स्थिति में भी मोदी सरकार ने मजबूत नेतृत्व और बेहतर निर्णय का परिचय दिया। संकट का पूर्वानुमान लगाते हुए सरकार ने  24 मार्च को देशभर में लॉकडाउन लगा दिया। इसी फैसले का परिणाम है कि जहां पूरे विश्व में 6.45 फीसद मृत्यु दर है। वहीं, भारत में मृत्यु दर 2.87 है। 15 अति—विकसित देश, जिनकी आबादी एक अरब 42 करोड से अधिक है। वहां कोरोना से 3 लाख 45 हजार मौतें हुई। जबकि भारत की आबाद 135 करोड होने के बावजूद 4337 मौतें हुई। इस अचूक निर्णय में सरकार को जनता का अद्वितीय सहयोग मिला। विश्व में जहां प्रति एक लाख आबादी पर 69.9 मुकदमें दर्ज हुए। वहीं, भारत में 10.7 मामले सामने आए। कोरोना मरीजों की रिकवरी दर में भी भारत लगातार प्रगति कर रहा है। 25 मार्च को जहां भारत की रिकवरी दर 7.10 फीसद थी, वह 26 मई को बढ़कर 41.61 फीसद हो चुकी है। कोरोना महामारी ने भारत ही नहीं, अपितु पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया है। 'जान है, तो जहान' के संकल्प पर मजबूती से चल रही मोदी सरकार अब बिगड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए काम कर रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ के पैकेज का एलान करते हुए आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की। उन्होंने लैंड, लेबर, लिक्विडटी के साथ-साथ इकोनॉमी, इंफ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम, डेमोग्राफी और डिमांड जैसे पांच पिलरों को मजबूती देने का आह्वान किया है, इससे आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। साथ ही हर क्षेत्र में स्वदेशी वस्तुओं को देश में बढ़ावा मिलेगा। सरकार के आर्थिक पैकेज में कुटिर उद्योग, लघु उद्योग, मंझोले उद्योग और किसान के लिए खास फोकस किया गया है। सरकार जनमानस के आर्थिक व सामाजिक विकास की रूपरेखा तैयार कर धरातल पर उतार रही है। इसका असर गांव-समाज में अब देखा जा सकता है। निश्चिततौर से आत्मनिर्भर भारत से एक आधुनिक और भविष्योन्मुख भारत का निर्माण तय है।

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