हरियाणा के इतिहास में पहली बार भुगतान सीधा किसानों के पास उनके खाते में गया: दुष्यंत चौटाला

चंडीगढ़(Abtaknews.com)19मई, 2020:हरियाणा के इतिहास में पहली बार किसानों की फसल का भुगतान उनके बैंक खाते के माध्यम से सीधा किसानों के पास पहुंचा है और इस प्रक्रिया में आढ़ती भाईयों का पूरा सहयोग मिला। प्रदेश सरकार ने किसानों की गेहूं खरीद का करीब 7 हजार 500 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है और बाकि बची अदायगी को भी जल्द उठान प्रक्रिया सम्पन्न करके पूरा कर दिया जाएगा। यह जानकारी मंगलवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने दी। वे चंडीगढ़ स्थित अपने आवास स्थान पर पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि किसानों के भुगतान से आने वाले दिनों में प्रदेश के राजस्व को फायदा मिलेगा।

डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने बताया कि किसानों की गेहूं खरीद व भुगतान प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि अब मंडियों में गेहूं की आवक करीब 40 हजार मीट्रिक टन तक रह गई है तो वहीं गेहूं खरीद का भुगतान भी सरकार ने 7500 करोड़ रुपये तक का कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर की मंडियों में गेहूं की उठान प्रक्रिया जोरों पर चल रही है और बाकि बची अदायगी को भी जल्द पूरा कर दिया जाएगा।

वहीं दुष्यंत चौटाला ने किसानों के भुगतान से प्रदेश के राजस्व को लाभ मिलने की बात कही है। उन्होंने कहा कि किसानों के पास अपनी फसल का पैसा जाने से अब वो उनका प्रयोग बाजार आकर+ अपनी आवश्यक वस्तुएं जैसे- आगामी फसल की बिजाई के लिए खाद-बीजखेती से जुड़े उपकरण व अपने परिवार के लिए जरूरी सामान आदि की खरीद करेंगे और इससे कोरोना महामारी के इस संकट में प्रदेश के राजस्व को फायदा मिलेगा। 

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण बनी विपरीत स्थितियों में भी प्रदेश सरकार किसानों व आढ़तियों के सहयोग से नई फसल खरीद प्रक्रिया को सफल बनाने में कामयाब रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के इतिहास में पहली बार किसानों का भुगतान सीधा उनके बैंक खातों में हुआ। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं इस बार किसानों को न ही अपनी फसल बेचने के लिए रातभर मंडियों में इंतजार करना पड़ा। वहीं पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में दुष्यंत चौटाला ने कहा कि वे भी जल्द सिरसा जाकर अपनी गेहूं की फसल को मंडी में बेचने का काम करेंगे। वहीं उपमुख्यमंत्री ने उन सभी बड़े किसानों का शुक्रिया किया है जिन्होंने सरकार के एक आग्रह पर मंडियों में पहले छोटे किसानों को फसल बेचने का  अवसर दिया और अपनी फसल स्टोर करके खरीद प्रक्रिया को सफल बनाने में सरकार का सहयोग किया।

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