सुरक्षा किट के अभाव में दिनरात एक कर बिजली को आम लोगों तक पहुँचाने में अहम भूमिका

फरीदाबाद (Abtaknews.com)14मई, 2020:ब्रेक डाउन अटेन्ड, लाइन पर वर्क परमिट व बाध्य लाइनों को दुरुस्त करने में जुटा बिजलीकर्मी सुरक्षा किट के अभाव में दिनरात एककर बिजली को आम लोगों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभा रहा हैं। एचएसईबी वर्कर यूनियन फरीदाबाद के सर्कल सचिव सन्तराम लाम्बा ने बताया कि एक तरफ तो निगम के अधिकारी कहते हैं । कि टेक्निकल कर्मी सम्पूर्ण सेफ्टी किट से लैस होकर ही लाइन पर काम करें व जीवन सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हुए लाइनों पर काम करते समय मेन्टिननस का काम पूरी सतर्कता के साथ करें । किसी भी तरह की कोई जल्दबाजी ना हो इसके लिये अधिकारी वर्ग कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएँ देने व मुहैया कराने के लिये सुरक्षा दिवस भी मनाते हैं । वहीं दूसरी ओर टेक्निकल स्टाफ कर्मचारियों के पास बिजली मरम्मत कार्य से लेकर सम्पूर्ण उपकरण औजार तो दूर बल्कि अपनी सुरक्षा के लिये पर्याप्त कम्प्लीट सेफ्टी किट तक नही है । जो सेफ्टी किट विभाग देता हैं वह एकदम घटिया कम्पनी का माल होती है । जो उपयोग लाने के दो महीने ही बामुश्किल चल पाती है । कर्मचारी नेता हरेक मीटिंग में इस मुद्दे पर अपने विचार रखते रहते हैं । एसडीओ सेन्ट्रल स्टोर से जेईओं दवारा किट ड्रा कराकर कर्मचारियों के बरतने के लिये सेफ्टी किट दे देते हैं । जिसके बाद एक बार भी बाद में कर्मीयों से सुध लेने की बजाय कई महीने हो जाते हैं समान है या नही कर्मचारी से पूछते तक नही । कर्मचारी को दोबारा से किट के लिये अपने सम्बंधित जेई से बार बार कहना पड़ता है और बावजूद इसके किट देने के लिये कर्मी को आनाकानी कर बात को दरकिनार कर दिया जाता है । पूर्व में दी गई सेफ्टी किटों में जिन्हें एक साल से भी ज्यादा का समय हो बीत चुका है । जिसमे सेफ्टी बैल्ट, हेलमेट, हैंड ग्लव्ज, टॉर्च, पिलास, सेन्सर टेस्टर, पुल्लिंग चैन, अर्थिंग स्टिक, स्क्रू ड्राइव टेस्टर, रस्सा, लकड़ी की सीढ़ी आदि कई समान घिस घिस कर रद्दी हो गये हैं । जो दो महीने से ज्यादा नही चल पाते हैं । कई बार कर्मचारी खुद अपनी जेब से खर्च वहन कर समान खरीदते हैं । ज्यादार कम्पलेण्ड सेन्टर पर लिफ्टर ही नही है । जिससे कर्मचारी को पेड़ों की छँटाई व अधिक ऊँची हाईट वाले 30 फुट के पोल पर चढ़ना काफी जोखिम भरा होता है । विभाग ने नई हाइड्रॉलिक गाड़ियां तो दी हैं पर उन्हें चलाने के लिये ड्राइवर नही है । जिसे दिन में या रात में लाइन फाल्ट के दौरान कर्मचारी ड्राइवर का काम भी खुद ही करते हैं । लेकिन कर्मचारियों के बार बार कहने के बावजूद कोई अधिकारी सुनने को राजी नही । ऐसा लगता है अधिकारी सिर्फ प्राइवेट ठेकेदारों के बिल पास करने की हजुरी में ही लगे रहते हैं । लेकिन कर्मचारी की कीमती जान की जिम्मेदारी किसी भी अधिकारी या विभाग की नही बनती है । अधिकारी रसूख कर्मचारियों को अब ब्लैक मेलिंग के साथ मानसिक तनाव देने लगा हैं । टेक्निकल स्टाफ कर्मी फील्ड में बिना सेफ्टी किट के काम करता पाया जाता है तो उसकी फोटो व्हाट्सअप भेज कर नौकरी से निकाल देने का दवाब बनाते हैं । अधिकारी धमकियाँ देकर आउटसोर्सिंग पर लगे कच्चे कर्मियों को निकाल दिए जाने को लेकर भी खूब शोषण इस सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास वाली सरकार में भरपूर हो रहा है । जिसे एचएसईबी वर्कर यूनियन कर्मचारियों पर होने वाले उत्पीड़न को बिल्कुल भी बर्दाश्त नही करेगी । अभी लॉकडाउन की स्तिथि के मद्देनजर कर्मचारी वर्ग शान्त है । जिसके बाद निगम के ऐसे तानाशाह अधिकारियों की पोल-खोल अभियान का आगाज़ शुरू करेंगे । 

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