कोविड 19 के बीच बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने के लिए बिजली संशोधन बिल- 2020 का ड्राफ्ट : सुभाष लांबा

फरीदाबाद(abtaknews.com)05मई, 2020: इलेक्ट्रीसिटी इम्पलाईज फैडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने की जल्दबाजी में है। बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्यव समिति ने इस बिल को जन एंव कर्मचारी  विरोधी करार देते हुए लाकडाउन समाप्ति पर ब्लैक डे आयोजित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि जब पूरी दुनिया व भारत कोविड-19 के खिलाफ अत्यंत कठिन जंग लड़ रहा है और संक्रमण को रोकने के लिए 24 मार्च से पुरा देश लाकडाउन में है। ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार ने कोविड 19 के शोर के बीच 17 अप्रैल को बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने के लिए बिजली संशोधन बिल- 2020 का ड्राफ्ट जारी कर दिया। ऊर्जा मंत्रालय ने सभी राज्यों व अन्य स्टेक हौल्डर्स से 5 जून तक अपने सुझाव एवं टिप्पणियां आमंत्रित की है। पहले यह समय अवधि 21 दिन की ही दी गई थी, बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्यव समिति के विरुद्ध के कारण अब इसको बढ़ाया गया है। उन्होंने बताया कि सरकार को मालूम है कि ड्राफ्ट का अध्ययन कर अपने सुझाव देना लाकडाउन में  कैसे संभव हो सकता है। उन्होंने बताया कि बिहार व तेलंगाना सहित कई राज्यों ने इस बिल का विरोध भी कर दिया है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री ने कैबिनेट की बैठक में इस बिल को शीध्र पास कराने के निर्देश दिए हैं।  उन्होंने बताया कि अगर यह बिल पास हो गया तो बिजली वितरण प्रणाली का निजीकरण का रास्ता साफ हो जाएगा। सब्सिडी व क्रॉस सब्सिडी खत्म हो जाएगी, बिजली के दाम और बढ़ेंगे और गरीब उपभोक्ता व किसानों की पहुँच से बिजली बाहर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी में बिजली कर्मचारी बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति करने के लिए दिन रात लगें हुए हैं। लेकिन भारत सरकार का उर्जा मंत्रालय बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने की जल्दबाजी में है। 

फैडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लांबा व राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य वह आल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के उप महासचिव ने कहा कि देश के 30 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं की सब्सिडी व क्रॉस सब्सिडी खत्म होने से भारी भरकम बिलों की मार आम जनता को झेलनी पड़ेगी। बिजली गरीब घरेलू व कृषि उपभोक्ता (किसानों) की पहुँच से बाहर हो जाएगी और बिजली क्षेत्र में कार्यरत लाखों कर्मचारियों की सेवा शर्तों व सेवानिवृति के लाभों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना निश्चित है। भारत सरकार तमाम बिजली उपभोक्ताओं व बिजली कर्मचारियों के हितों को ताक पर रख कर बिजली वितरण क्षेत्र को एकदम उन धनासेठों को मालामाल करने के लिए उनके हवाले करना चाहती है, जिनका देश के अन्दर विद्युतीकरण करने में कोई योगदान नहीं रहा है। सरकार की जल्दबाजी से साफ जाहिर है कि यह चंद एक चहेते पूंजीपत्तियों को लाभ पहुँचाने के लिए निजीकरण का रास्ता अख्तयार कर रही है। उन्होंने बताया कि देश के 16 राज्यों की सरकारें व कर्मचारी संगठन सन् 2017 में बिजली संशोधन विधेयक 2014 के खिलाफ अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं। बिजली वितरण संशोधन विधेयक 2020 में भी उन्हीं प्रावधानों को शामिल किया गया है, नया कुछ भी नहीं है। यह तो सिर्फ शराब की बोतल का लेबल बदलने जैसा ही है। उन्होंने बताया कि अगर  सरकार ने इस गरीब उपभोक्ता व किसान तथा कर्मचारी व इंजीनिय विरोधी बिल पास करने का प्रयास किया तो पुरे देश के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर किसानों के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर विरोध किया जाएगा।

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