श्री सिद्धदाता आश्रम ने मनाई रामानुज स्वामी की जयंती, जनकल्याण के लिए की गई प्रार्थना

 
फरीदाबाद(abtaknews.com)उत्तर भारत में रामानुज संप्रदाय के तीर्थ क्षेत्र श्री सिद्धदाता आश्रम एवं श्री लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम में श्री रामानुज स्वामी की जयंती विधि विधान के साथ मनाई गई और जनकल्याण के लिए प्रार्थना की गई। स्वामीजी को वैष्णव परंपरा के पुनरोद्धारक के रूप में माना जाता है।
करीब एक हजार वर्ष पूर्व जब दुनिया में पाप का बोलबाला बढ़ रहा थाऐसे में दक्षिण में जन्म रामानुज स्वामी ने न केवल वैष्णव परंपरा की ओर लोगों का मन उन्मुख किया बल्कि घर घर में भगवान की आराधना का विधान करवाया। श्री सिद्धदाता आश्रम के अधिपति जगदगुरु रामानुज स्वामी उन्हीं की गुरु शिष्य परंपरा में आते हैं। उन्होंने बताया कि श्रीभाष्यों पर टीका लिखने से उन्हें भाष्यकार स्वामी भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने भगवान के निर्देश पर ही मानव जाति को धर्म का पाठ पढ़ाकर धर्मावलंबी बनाया और करीब 120 वर्ष की अवस्था में प्रयाण किया। लेकिन जाने से पहले उन्होंने भारतवर्ष में 72 पीठों की स्थापना कर धर्म ध्वजा की रक्षा को आश्वस्त किया।
आज उन्हीं रामानुज स्वामी की जयंती विधि विधान से आयोजित की गई। जिसका लाइव प्रसारण आश्रम के फेसबुक पेज के माध्यम से देश दुनिया में फैले परिवारों के लिए किया गया। उल्लेखनीय है कि आश्रम के पेज पर करीब 10 लाख लोग जुड़े हैं जो इन दिनों लॉकडाउन की अवधि में भी आश्रम की गतिविधियों से इंटरनेट के जरिए जुड़े हुए हैं।
अधिपति अनंतश्री विभूषित इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा पीठाधीश्वर श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के निर्देश पर कोरोना संकट को देखते हुए आश्रम को आम भक्तों के लिए बंद किया गया है। कल यानि 30 अप्रैल को आश्रम में भगवान श्रीमन्नारायण का महाभिषेक होगाइसके साथ ही यहां चल रहे पांच दिवसीय तेरहवें ब्रह्मोत्सव का समापन होगा।

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