सरकार की उपेक्षा पूर्ण नीति के विरोध में काले बिल्ले लगाकर सर्वे कर रही हैं आशा वर्कर

फरीदाबाद(Abtaknews.com)18अप्रैल, 2020:आशा वर्कर्स यूनियन, जिला कमेटी फरीदाबाद के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने राज्य कमेटी के आव्हान पर शनिवार को राज्य सरकार की उपेक्षा पूर्ण नीति के विरोध में काले बिल्ले लगाए। यह जानकारी आशा वर्कर यूनियन की जिला प्रधान हेमलता और जिला सेक्रेटरी सुधा पाल ने दी। दोनों नेताओं ने बताया कि सरकार आशा वर्करों के साथ भेदभाव कर रही है। जबकि यूनियन की प्रत्येक सदस्य हर घर में जाकर सर्वे का काम कर रही हैं। यूनियन को  यह कार्रवाई सरकार के द्वारा उनकी मांगों पर टालमटोल की नीति अपनाने के विरोध में करनी पड़ी है। 
उन्होंने बताया कि आशा वर्करों की समस्याओं का समाधान करने के लिए यूनियन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री, हरियाणा, एवं स्वास्थ्य मंत्री हरियाणा को पत्र लिखकर मांग की थी कि आशा वर्कर्स को भी करोना वायरस महामारी के दौरान काम करने के लिए उनके फिक्स वेतन को दुगना किया जाए। मुख्यमंत्री हरियाणा जब तमाम स्वास्थ्य कर्मियों के वेतन को दुगना करने की घोषणा कर रहे थे। तब आशाओं का नाम छोड़ दिया था। अभी पत्र भेजने के 4 दिन बाद तक भी हमें स्वास्थ्य विभाग से और मुख्यमंत्री से किसी तरह का कोई जवाब नहीं मिला है।
इससे पहले भी हमने मिशन डायरेक्टर को कोरोना महामारी में काम करने के लिए अपने फिक्स वेतन को दोगुना करके देने की मांग को लेकर ज्ञापन भेजा था। लेकिन तब भी विभाग ने केवल करोना महामारी के दौरान काम करने के लिए ₹1000 अतिरिक्त देने की ही बात स्वीकार की जो नाकाफी है। जिला सचिव सुधा पाल ने बताया कि एक तरफ सरकार आशा वर्करों से कोरोना वायरस की महामारी के चलते घर घरों में जाकर सर्वे के कार्य को करने का दबाव बना रही है। दूसरी तरफ आशा वर्करों के साथ किसी भी पुरुष कर्मचारी को नहीं भेजा जा रहा है। जिसकी वजह से आशा वर्करों के  साथ अप्रिय घटनाओं घटित हो रही हैं। उन्होंने सरकार से आशा वर्करों के साथ पुरुष कर्मचारियों को भेजने की अनिवार्यता पर जोर देते हुए कहा की यदि पुरुष कर्मचारी नहीं जाएंगे तो आशा वर्कर सर्वे के कार्यों का डटकर विरोध करें। उन्होंने सभी आशा वर्करों को जीवन रक्षक उपकरण शीघ्र देने की मांग पर जोर दिया।

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