प्रधानमंत्री से प्रेरित होकर घर पर कपड़े के मास्क बनाने में जुटी महिलाएं, जरूरतमंदों को है बांटती

फरीदाबाद (Abtaknews.com)29 अप्रैल,2020: कोरोना वायरस जैसी महामारी के चलते बल्लभगढ़ के  अहीर वाड़ा मोहल्ले में रहने वाली समाजसेवी सुषमा यादव का जज्बा अलग ही देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील से प्रभावित होकर सुषमा अपने घर पर  अन्य महिलाओं  और अपने बच्चों की मदद से पिछले 1 महीने से कपड़े के मास्क बनाकर शहर के चौक चौराहों और गांव में  जाकर पुलिस के जवानों , रेहड़ी वालों , सफाई कर्मचारियो और अन्य जरूरतमंदों को कपड़े के मास्क बांट रही है ! सुषमा यादव का कहना है की आने वाले समय में यूज एंड थ्रो  वाले फैंके जाने वाले मास्क का कूड़ा पॉलिथीन की तरह जगह जगह नजर आएगा जिससे और बीमारियां फैलेंगी। इसलिए बार-बार धोकर पहनने वाले कपड़े के मास्क ही बेहतर है।

महामारी के इस दौर में कपड़े के मास्क बनाकर समाज सेवा कर रही यह महिला सुषमा यादव है  जो बल्लभगढ़ के अहीर वाड़ा कॉलोनी में रहती हैं और' बदलाव हमारी कोशिश है ' नामक ट्रस्ट भी संचालित करती हैं । सुषमा का कहना था करोना महामारी के दौरान  मास्क की जरूरत को देखते हुए  उसने कपड़े के मास्क बनाकर जरूरतमंदों में वितरण करने का बीड़ा उठाया और अपने साथ आसपास की महिलाओं को भी जोड़ा । पिछले 1 महीने से सुषमा हजारों मास्क बनाकर चौक चौराहों और गांव में  जाकर पुलिस के जवानों , रेहड़ी वालों, सफाई कर्मचारियो और अन्य जरूरतमंदों को कपड़े के मास्क  वितरित कर चुकी है और मास्क बनाने का यह काम और सेवा अभी भी लगातार जारी है। सुषमा की सोच है कि आने वाले समय में यूज एंड थ्रो  वाले फैंके जाने वाले मास्क का कूड़ा पॉलिथीन  की तरह जगह जगह नजर आएगा जिससे और बीमारियां फैलेंगी ।  इसलिए बार-बार धोकर पहनने वाले कपड़े के मास्क ही बेहतर है क्योंकि इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी ने भी कपड़े के मास्क का उपयोग करने की सलाह दी है ।  सुषमा ने बताया कि उनके द्वारा कपड़े की डबल लेयर के मास्क बनाकर वितरित किए जा रहे हैं जिन्हें धोकर बार-बार यूज किया जा सकता है । उनका कहना था कि जब वह किसी को अपने हाथ का बना हुआ मास्क पहना हुआ देखते हैं तो उन्हें बहुत खुशी मिलती है ।

इस नेक काम में सुषमा का हाथ बटाने वाली महिलाओ  नीलम, अनीता और उर्मिला ने बताया कि वह पिछले 1 महीने से सुषमा के साथ मास्क  बनाने के काम में जुटी हुई हैं जिसमें वह कपड़े की कटिंग करने और सिलाई करने के अलावा जरूरतमंदों में  इसे बांटने का काम करती हैं  जिससे उन्हें  बहुत आत्मिक संतुष्टि  मिलती है।

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