कोरोना( Covid-19) को वैश्विक महामारी बताने में ड्रग माफियाओ की बड़ी साजिश है: डॉ बिस्वरूप राय चौधरी

फरीदाबाद (Abtaknews.com) 29मार्च, 2020: तीन दिन में शुगर को बिना दवाई कंट्रोल करने का फार्मूला बताने वाले डॉक्टर बिस्वरूप रॉय चौधरी ने कोविड-19 को नार्मल फ्लू  बताया है और अपने दावे के पीछे ब्रिटेन के उन डॉक्टर्स का हवाला भी दिया है जिन्होंने कोविड -19 को पहले बहुत खतरनाक माना था लेकिन अब वह खुद ही इसे नार्मल फ्लू बता रहे हैं। डॉ रॉयचौधरी के मुताबिक कोविड-19 की  इंटेंसिटी आम फ्लू जितनी भी नहीं है जिसे अब यूके की  न्यू एंड इमर्जिंग रेस्पिरेटरी थ्रेट वायरस ग्रुप ने भी स्वीकार कर लिया है। डॉक्टर रॉयचौधरी के मुताबिक यूके के इस ग्रुप ने स्वीकार किया है कि पहले उन्हें लग रहा था कोविड-19 की मोर्टलिटी रेट 3 से 4% होगी लेकिन यह .002 परसेंट है जो कि नॉर्मल फ्लू से भी कम है। उन्होंने कहा कि इसे महामारी बताने में ड्रग माफिया की भी संलिप्तता है। 

डॉक्टर रॉय चौधरी ने अबतक न्यूज पोर्टल टीम के साथ उन लिंकस को भी शेयर किया जिसमें यूके के एडवाइजरी ग्रुप  द्वारा कोविड-19 के बारे में कही हुई बातें लिखी हैं।
New and Emerging Respiratory Virus Threats Advisory Group - Wikipedia
यह ग्रुप उन डॉक्टर्स का है जो यूके में रेस्पिरेट्री बीमारियों के बारे में लोगों को आगाह करते हैं और WHO भी इनकी बात को मान्यता देता है। 
डॉ रॉयचौधरी ने एक और लिंक Fear Mongering COVID-19 Epidemiologist Says He Was Wrong

 शेयर कर बताया कि किस तरह एपिडेमियोलॉजिस्ट नील फर्गुसन ने यह स्वीकार किया है कि कोविड-19 के बारे में वह कितना गलत थे ।उन्होंने पहले अनुमान लगाया था कि कोविड-19 से अमेरिका में करीब 2200000 मौतें होंगी और यूके में मौतों की संख्या 5 लाख़ होगी लेकिन अब उनका कहना है कि यूके में अस्पताल बेहतर स्थिति में है और यूके में कोविड-19 से मौतों की संख्या करीब 20,000 या उससे कम ही होगी।

डॉ बिस्वरूप रॉयचौधरी के मुताबिक इटली का ही अगर पिछले 10 साल का आंकड़ा देखा जाए तो इस सीजन के दौरान चाहे कोई भी वायरस हो उनके यहां मौतों की संख्या 20 से 25000 रहती है । वहां बूढ़े लोगों की संख्या ज्यादा है। इसी तरह यूरोप में भी किसी भी इंफेक्शन या किसी अन्य बीमारी से इस सीजन में मौतों की संख्या में इजाफा रहता है लेकिन कोविड-19 पहली बीमारी है जिसमें एक-एक मौत का आंकड़ा प्रचारित किया जा रहा है ।इसके पीछे कहीं ना कहीं ड्रग माफिया भी है। उन्होंने कहा कि हर साल भारत में निमोनिया से डेढ़ से 200000 मौतें होती हैं । मलेरिया से इतनी ही मौतें होती हैं और कई सारी बीमारियों से मौतें होती हैं लेकिन कहीं भी इसे इस तरह से प्रचारित नहीं किया जाता।  उनके मुताबिक कोविड-19 मरीजों को एड्स की दवा दी जा रही है, मलेरिया की दवा दी जा रही है जिसका इस बीमारी से कोई लेना-देना नहीं है । उन्होंने कहा कि एड्स की दवाइयों के अपने साइड इफ़ेक्ट्स हैं। उन्होंने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी और अपने खान-पान में बदलाव कर सिट्रिक फलों का जूस, सलाद, नारियल पानी लेने की सलाह दी । जानते हैं उनसे कि इसे किस तरह से लेना है जिससे कोविड-19 से बचाव हो सके और अगर यह बीमारी हो गई है तो उसे कैसे ठीक किया जाए।

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