भारतीय नववर्ष पर करें संकल्प कोरोना मुक्त हो भारत वर्ष : सुनील भारद्वाज

हरियाणा (Abtaknews.com)25मार्च, 2020: सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो,भद्राणि पश्र्यतु। सर्व कामानवाप्नोतु ,सर्वः सर्वत्र नन्दतु।। समूची प्रकृति के नई-नवेली होने की बैला में आती है चैत्र प्रतिपदा । भारतीय परंपरा का पहला मास है चैत्र । भारतीय वर्ष का अंत बसंत में ओर आरंभ भी बसंत में है । प्रकृति में परिवर्तन देखते-देखते वर्ष का अंत भी ओर आरंभ भी । दिन -रात दोनो सुंदर हो रहे हैं । सरसों में पीले फूल, आम में बौर, प्रकृति में हरितिमा, पेड़ो में नई पत्तियां, कोयल की बांसुरी , सभी फल-फूलों की खूबसूरत गंध यानी सब कुछ नया-नया है । नई फसल पककर तैयार होने से उत्साह का समय, मौसम बदलाव का सकारात्मक समय,बसंत के बाद वृक्ष पल्लवित । नया साल, नया संकल्प, नया उत्साह , देवी की उपासना के साथ नव का उत्सव यानी नवसंवत्सर ।
वर्ष प्रतिपदा चैत्र शुक्ल एकम 
युगाबद्ध 5122 ,विक्रम संवत2077(इस बार 25 मार्च )
आज ही से नवरात्रों का शुभारंभ भी हो रहा है । आज ही के दिन शालीवाहन द्वारा आक्रांताओं पर विजय प्राप्त कर शालीवाहन शक संवत भी मनाया गया था । आज ही के विक्रमादित्य द्वारा विशाल सुशासन की स्थापना भी की गई । दुनिया के सबसे बडे स्वयं सेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ केशव राव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म भी आज ही के दिन हुआ । हम सबके आराध्य भगवान श्री राम जी का राज्याभिषेक भी आज ही के दिन हुआ था । आज ही के दिन ब्रह्माजी द्वारा श्रृष्टि की उत्पत्ति की गई। संत झूलेलाल का जन्म भी आज ही के दिन हुआ । युधिष्ठिर द्वारा राज्य ग्रहण के 36 वर्ष बाद श्री कृष्ण के महा निर्वाण भी आज ही के दिन हुआ । महर्षि दयानंद सरस्वती जी के द्वारा आर्यसमाज का स्थापना भी आज ही के दिन की गई थी ।

ऐसे अनेक प्रसंगों का स्मरण कराता यह अवसर ही हमारा नव वर्ष है । लेकिन अनेकों उत्सवों को अपने में समाहित करने वाला आज का यह दिन हमारे लिए चुनौती पूर्ण भी है।

महामारी से संघर्ष---आज भारतीय नव वर्ष एक ऐसे समय में आया है, जब पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है । कई विकसित देशों ने इस महामारी के सामने घुटने टेक दिए हैं । इसके साथ एक सत्य यह भी है कि आज पूरी दुनिया की नजरें भारत के ऊपर हैं। पूरी दुनिया को इस वायरस से बचाने के लिए यदि कोई पद्धति काम आ सकती है , तो वह सनातन पद्धति है , भारतीय संस्कृति है । इसलिए हम सब मिलकर विश्व को स्वस्थ करने का संकल्प लें। हमारी भूमिका हो सकती है :-

हवनयज्ञ करें------ विश्व कल्याण के लिए प्रतिदिन हवन यज्ञ करें । हवनयज्ञ वातावरण को शुद्ध करने का सबसे उत्तम साधन है क्योंकि हवन सामग्री बहुत सारी जडीबुटियों से मिलकर बनती है इसलिए उसमें वातावरण को शुद्ध करने की शक्ति है ओर यज्ञ करते समय जब अग्नि में सामग्री की आहूति दी जाती है तो घी डलने से उसकी शक्ति सेंकडों गुणा और बढ़ जाती है । ओर जब हम मंत्रोच्चारण के साथ आहूति डालते हैं तो वातावरण को संक्रमित करने वाले किटाणु ओर वायरस समाप्त हो जाते है । इससे आपको ओर परिवार को शांति ओर सकारात्मकता की अनुभूति भी होगी । साथ ही विश्व महामारी से हम सब मिलकर विजय प्राप्त करेंगे, ऐसी भी ईश्वर से प्रार्थना करें ।

व्रत एवं उपवास करें----- मन ओर शरीर की शुद्धि के लिए हमारी संस्कृति में व्रत व उपवास का बहुत महत्व है । व्रत का मतलब होता है संकल्प करना । ऐसे समय में हम किसी बुरी आदत को छोडने ओर किसी अच्छी आदत को अपने व्यवहार में जोडने का संकल्प कर सकते हैं । उपवास, उप - यानी निकट वास -यानी जाना । किसी के निकट जाना यानी उपवास । मुझे लगता है सबसे पहले हमें खुद के निकट जाना चाहिए । उसके साथ-साथ ये समय हमें अध्यात्म के, गुरु के, भगवान के निकट लाने में भी कारगार साबित होगा । हम सबका यह भी सौभाग्य है कि आज से नवरात्रों का भी शुभारंभ हो रहा है । इसलिए ये हमारे लिए भक्ति का समय भी है । नवरात्रों में अपने इम्यून सिस्टम को कमजोर ना होने दें । गला ना सूखे यह भी ध्यान रहे ।

स्वाध्याय करें--- ये समय स्वाध्याय की दृष्टि से सबसे अच्छा समय हो सकता है । ये समय बहुत कुछ पढ़ने,जानने ओर समझने का है। आपके बौद्धिक विकास का समय हो सकता है । अपनी एकाग्रता को बढाने का समय हो सकता है ।

सोशलमीडिया का सही उपयोग-- इस समय में सोशलमीडिया दुधारी तलवार के जैसा है । सही जानकारी से समाज को बचाया जा सकता है ओर अफवाह फैला कर समाज को भ्रमित भी किया जा सकता है । इसलिए सोशलमीडिया का सही उपयोग करें । सही जानकारी ही लोगों तक पहुचाएं । जो लोग इस समय में भी अपनी जान की बाजी लगाकर स्वस्थ राष्ट्र के संकल्प को सार्थक करते हुए कोरोना जैसी महामारी से लड रहें हैं , हमें सोशलमीडिया के माध्यम से उनका ओर उनके परिवार का उत्साह वर्धन करना चाहिए। उनका अभिनंदन करना चाहिए ।

सरकार व प्रशासन का सहयोग--- जैसा प्रधानमंत्री जी ने कहा की अगले 21 दिन लॉकडाउन । उन्होंने हाथ जोड़ कर प्रधानमंत्री के रूप में नही ब्लकि आपके परिवार के सदस्य के नाते बार-बार कहा है यह एक लक्षण रेखा है रावण रुपी वायरस से बचने के लिए । मतलब अपने घरों में ही रहें ,अपने लिए ओर अपनों के लिए । कुछ लोग अनावश्यक रूप से अभी भी घरों से बाहर घूम रहे हैं । प्रशासन को उनके साथ शक्ति से पेश आना चाहिए । ऐसे समय में हम सबका दायित्व है कि हम एक जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दें ओर सरकार व प्रशासन की सूचना का अक्षरशः पालन करें । ये बहुत ही खतरनाक वायरस है ,यह सच है कि अगर हमने सूचनाओं का पालन नही किया तो हमारी पीढियां तबाह हो जाएंगी । सरकार व प्रशासन द्वारा हम अगली किसी भी सूचना के लिए तैयार रहें ।
स्वच्छता ही सेवा----- ऐसे समय में स्वच्छता ही राष्ट्र की सबसे बडी सेवा है । खुद को स्वच्छ रखें, परिवार को स्वच्छ रखें, ओर घर को स्वच्छ रखें । बार-बार साबुन से हाथ धोयें ।

सोशल डिस्टेंसिंग----अपने राष्ट्र के नाम उद्बोधन में माननीय प्रधानमंत्री जी ने सोशल डिस्टेंसिंग पर बहुत जोर दिया है । इसलिए इसका पूरा ध्यान रखें, घर में भी ओर बाहर भी । लोगों से दूरी बनाकर रखें ।

ओर अंत में एक निवेदन है हमारे आस-पास इस भीषण समय में कोई भी गरीब भूखा ना सोय इसकी चिंता करना भी हमारा कर्तव्य है ।

No comments

Powered by Blogger.