सूरजकुंड मेला : पर्यटकों को आकर्षित कर रही है ऑयल पेंटिंग, रंगबिरंगी अफगानी कारपेट व ज्वैलरी, लकड़ी के कड़े-क्लिप


सूरजकुंड (फरीदाबाद), 12 फरवरी। अगर आप हाथ से बनी चित्रकारी, ऑयल पेंटिंग के दिवाने हैंतो 34वें अतर्राष्टï्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले मेंनीदरलैंड से आए सरदार पे्रमजीत सिंह की स्टाल विशेष आकर्षक का केंद्र बनी हुई है। स्टाल पर घर की सजावट को बेहतर बनाने के लिए हाथ से निर्मित कलाकृतियां, ऑयल पेंटिंग्स, हाथ से बुने हुए चित्र फ्रेम व अन्य ऐसी सैकड़ों चीजें उपलब्ध है। स्टॉल पर नीदरलैंड में फ्रिज चुम्बक नाम से प्रसिद्घ छोटी-छोटी कलाकृतियां भी उपलब्ध है। जिनसे आपके दरवाजे, खिडक़ी, गाड़ी को सजाया जा सकता है। 

स्टॉल संचालक प्रेमजीत सिंह ने बताया कि वे मूल रूप से पंजाब के निवासी है परंतु पिछले 30 वर्ष से नीदरलैंड में परिवार के साथ रहते हुए यह कारोबार चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे अपने देश को न भूलते हुए समय-समय पर विभिन्न राज्यों लगने वाले राज्य स्तरीय मेलों में अपनी कला का प्रदर्शन करते आ रहे है परंतु सूरजकुंड मेले में पर्यटकों व ग्राहकों की काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
----------------------------------------------------------------------------------
पर्यटकों को रंगबिरंगी अफगानी कारपेट व ज्वैलरी ने लुभाया

सूरजकुंड (फरीदाबाद), 12 फरवरी। 34वें अंतरराष्टï्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में पर्यटकों का अलग ही उत्साह नजर आया और लोगों ने जमकर खरीदारी की। पर्यटकों ने स्टाल दर स्टाल घूम कर विदेशी परम्परा व हस्तकलां से रूबरू हुए बल्कि विशेष जानकारी हासिल कर सामान भी खरीदा। अफगानिस्तान की छह स्टालों पर आकर्षक छोटे बड़े, रंगबिरंगे कारपेट ने पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया। अपने घरों की सजावट में चार चांद लगाने के लिए महिलाओं ने कारपेट व अफगानी आभूषण की जमकर खरीदारी की।
अफगानी स्टाल के मालिक हुमायुन ने बताया कि यह कारपेट व ज्वैलरी सौ प्रतिशत हस्तकला से बनाई जाती है। इन कारपेट की विशेषता है कि इनका कलर बिल्कुल प्राकितक लगता है और कभी भी रंग फीका नहीं पड़ता। सिल्वर से बने विशेष प्रकार के आभूषण भी लोगों को खूब भा रहे हैं। लटकन, अंगूठी, व हांथ में बाधने के लिए मोतियों से गुदे हुए कड़े को लोग बेहद पंसद कर रहे हैं। हुमायुन ने बताया कि सूरजकुंड मेले में लोगों का रूझान अफगानी कारपेट व ज्वैलरी की तरफ बढ़ता देख बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा कि उम्मीद करता हूं कि भारतीय नागरिकों को अफगानी कलां से निर्मित कारपेट व ज्वैलरी पसंद आएगी।
-------------------------------------------------------------------
कामिनी बर्मन का फर्नीचर बन रहा है सूरजकुंड मेले की पसंद, लकड़ी से बने कड़े और क्लिप युवतियों की बनी पसंद   
 सूरजकुंड (फरीदाबाद), 12 फरवरी। 34वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में इस बार फिर से आसाम से आए कामिनी बर्मन का फर्नीचर लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। यही वजह है कि उसे इस बार मेले से बड़ी मात्रा में एडवांस आर्डर भी मिले हैं।
आसाम के मालबारी जिला के रहने वाले कामिनी का कहना है कि उसने अपने पुस्तैनी कारोबार को 1979 में एक छोटे उद्योग का रूप दिया और गांव में ही एक लघु उद्योग स्थापित किया। यहां उसने कैन की लकड़ी से फर्नीचर बनाने से काम की शुरूआत की। पहली बार 1979 में ही दिल्ली के प्रगति मैदान में अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में अपना सामान बेचने का मौका भी मिल गया। लोगों ने उसके फर्नीचर को काफी पसंद किया।
उसके फर्नीचर की खासियत यह है कि वह बरसात व धूप में पड़ा रहने के बावजूद 40 वर्षों तक भी खराब नहीं होता। धूप व बारिश कैन की लकड़ी को मजबूती देती रहती है। उन्होंने बताया कि लोग घरों में लान व ड्राईंग रूम के लिए उनके फर्नीचर को खरीदते हैं। उन्होंने बताया कि प्रगति मैदान के बाद उसने ओखला दिल्ली में लगने वाले दिल्ली हाट, जनकपुरी सहित सभी स्थानों पर अपना फर्नीचर बेचा। मुंबई, केरला, नेपाल, भूटान सहित कई देशों में भी वह अपना फर्नीचर बेच चुके हैं।
मेले के स्टाल नंबर 386 पर अपना सामान बेचने वाले कामिनी बर्नर का कहना है कि कैन की लकड़ी से बने सोफे, टेबल, कुर्सी सहित वह अब टेबल लैंप, महिलाओं के कड़े, बांस के फ्रेम में जड़े हुए शीशे, घडि़य़ों सहित कई आईटम अब तैयार करते हैं। इस बार के सूरजकुंड मेले में उसे जबरदस्त रिसपांस मिला और पूरा सामान बिकने के साथ ही बड़ी संखया में एडवांस आर्डर भी मिले हैं।  
---------------------------------------------------------------------
सूरजकुंड मेला : सेल्फी प्वाइंट पर लगा पर्यटकों का तांता
सूरजकुंड (फरीदाबाद), 12 फरवरी। अरावली की वादियों में चल रहे 34वें अंतरराष्टï्रीय हस्तशिल्प मेले के 12वें दिन पर्यटकों की अच्छी खासी भीड़ रही। मेले में आने वाले क्या बुजुर्ग, महिलाएं के साथ साथ विशेषकर युवाओं ने दिनभर मस्ती की और सेल्फी प्वाइंटों पर मेले की यादों को कैमरे में कैद किया। सूरजकुंड मेले में पर्यटन विभाग द्वारा दर्जनों सेल्फी प्वाइंट बनाए गए है, इसके अलावा अन्य विभागों द्वारा सेल्फी प्वांइटों के माध्यम से स्वच्छता, जनगणणा व बेटी बचाओ के संदेश दिए जा रहे हैं।
दिल्ली की मंगोलपुरी से मेले में परिवार सहित पहुंचे सुनीता, देवीका व रोशनी ने बताया कि वे हर साल सूरजकुंड मेले  का बेस्रबी से इंतजार करते हैं। मेले में पूरे परिवार सहित मस्ती के साथ घर में सजावट के लिए भी कई बेहतर चीजें मिल जाती है। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों के लाजवाब व्यंजन भी बच्चों को खूब पसंद आते है। इसी प्रकार सोनीपत व करनाल से गोबिंंद, राकेश व संजय ने बताया कि सूरजकुंड भारत में सबसे अधिक सुंदर व हस्तशिल्प मेला है। मेले के माध्यम से न केवल बच्चे हमारी प्राचीन संस्कृति व विरासत से रूबरू होते है बल्कि कई प्रकार कलाओं से भी परिचित होने का अवसर मिलता है। उन्होंने बताया कि मेले का विशेष आकर्षण सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए बनाई गई चौपाले हैं। दिनभर मस्ती व खरीदारी के बाद चौपाल में बैठकर देश व विदेशोंं की प्राचीन लोक कलाओं को देखना व सुनने का मौका मिलता है। विशेष रूप से पंजाब व हरियाणा गीत व नृत्य बच्चों को खूब भाते है।

No comments

Powered by Blogger.