सूरजकुणड मेंले के फैशन शो में डिजाइनर रितु बेरी ने नागालैंड की ज्वैलरी व पोशाक के साथ रैम्प पर उतारे माडल

फरीदाबाद(Abtaknews.com दुष्यंत त्यागी )7 फरवरी।पूर्वांचल प्रदेश नागालैंड के परिधानों ने शुक्रवार की शाम खूबसूरत मॉडलों के साथ सूरजकुंड के रैंप पर रंग बिखेरे तो खचाखच दर्शकों से भरी चौपाल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठी। विश्वविख्यात फैशन डिजाइनर रितु बेरी ने लाल, काला और सफेद रंग का बहुतायत में प्रयोग करते हुए तीन माह की अथक मेहनत से तैयार किया था और उनका परिश्रम मॉडलों के वस्त्रों से चमक रहा था।
शाम का शुभारंभ किया भारत सरकार की केंद्रीय जनजातीय मामलों की राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने। उनके साथ मंत्रालय के सचिव प्रवीन कृष्णा, हरियाणा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर एवं उनकी धर्मपत्नी डा. सोनिया खुल्लर, पर्यटन निगम के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयवर्धन, एडीजीपी सीआईडी अनिल राव, फरीदाबाद मंडल आयुक्त संजय जून, उपायुक्त यशपाल, एडीजे यशिका, पर्यटन निगम के महाप्रबंधक विकास यादव, अतिरिक्त उपायुक्त रामकुमार सिंह इत्यादि की गरिमामयी उपस्थित रही।
केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जंगलों और सुदूर सीमा प्रांतों में रहने वाले आदिवासियों के उत्थान के लिए असीम प्रयास किए हैं। आदिवासी जनजातीय मंत्रालय निरंतर वनों में रहने वाले दस्तकारों, बुनकरों, कलाकारों एवं कृषकों के हुनर को देश की मुख्य धारा में लाने की कोशिश कर रहा है। इनकी कला को जीवित रखने के लिए देश में हर साल आदि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। रेणुका सिंह ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि प्रसिद्घ फैशन डिजाइनर रितु बेरी ने नागालैंड की ज्वैलरी व पोशाकों का गहराई से अध्ययन किया है। वह स्वयं भी कपड़ों को डिजाइन करने में रूचि रखती हैं। जनजातीय मंत्रालय के सचिव प्रवीन कृष्णा ने इस मौके पर कहा कि जनजाति एवं
आदिवासी भारत देश के वो मूल निवासी हैं, जो हजारों सालों से यहां रहते हुए माटी की प्राकृतिक खुशबू व राग-रंग में पूरी तरह बस चुके हैं। पर्यटन निगम के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयवर्धन ने कहा कि आज की शाम इस बात की द्योतक है कि भारत विविध संस्कृति में रचा-बसा देश है। इस अवसर पर मेला प्रशासक एवं नगराधीश बेलीना, अभिनेता अभिनव चतुर्वेदी, पुलिस अधिकारी डा. अर्पित जैन, राजेश जून, विवेक भारद्वाज, जैनेंद्र सिंह, अनिल सचदेवा इत्यादि उपस्थित रहे।

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