सूरजकुंड मेले में गोल्ड मेडलिस्ट अशरफ हसन की जोधपुरियां जूतियां पर्यटकों को खूब भा रही

फरीदाबाद(Abtaknews.com- दुष्यंत त्यागी )15 फरवरी, 2020: वैसे तो जूतिया आपने बहुत देखी होगी लेकिन अशरफ हसन के परिवार ने जूतियों के क्षेत्र में जिन सतरंगी कल्पनाओं को मूर्त रूप दिया है।उसके लिए उन्हे कई बार राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। हम बात कर रहे है 34वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में जोधपुरिया जूतिया की स्टाल नंबर 1035 की, जिस पर दिनभर जोधपुरियां जूतियां लेने वाले पर्यटकों का तांता लगा रहता है। अशरफ हसन सूरजकुंड मेले में पिछले 20 सालों से लगातार आ रहे हैं और रंग बिरंगी, मजबूत तथा आकर्षक डिजायनों से बनाई गई जूतियों के लिए जाने जाते हैं।
अशरफ हसन बताते हैं कि सूरजकुंड मेले में आने से पहले ही पर्यटक उनसे फोन कर स्टाल नंबर पूछते है और बेस्रबी से इंतजार करते हैं। उन्होंने कहा कि हम भी पर्यटकों को निराश नहीं करते और आकर्षण रंगों, डिजायन के साथ रेट का भी विशेष ध्यान रखते है। अशरफ ने बताया कि जूतियां बनाने का उनका पुशतैनी कार्य है जो पिछली चार पीढियों से चला आ रहा है। दुनिया भर में कई देशों में आयोजित प्रदशिनियों में भाग ले चुके हैं और राज्य तथा राष्टï्रीय  स्तर कई बार सम्मानित भी हो चुके है। वर्ष 2005 तथा 2011 में टैक्सटाइल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा शिलगुरू अवार्ड से सम्मानित किए जा चुके है और गोल्ड मेडल प्राप्त कर चुके हैं। उनके स्टाल पर महिलाओं की डिजायनदार जूतियों के साथ साथ बच्चो व पुरूषों के लिए भी जूतियां उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि जोधपूरियां जूतियों की खास बात यह है कि इसमे राइट व लेफ्ट नहीं होता और पर्यटक इस बदल बदल कर पहन सकते है। बदल कर पहनने से न केवल जूतियों की मजबूती बढ़ती है बल्कि खूबसूरती में निखार आता है।अशरफ हसन बताते है कि उन्होंने दूनिया में सबसे छोटी जूती बनाई जिसे वे लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड के लिए भेजेंगे। 
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 फरीदाबाद, 15 फरवरी।34वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में वैसे से देश विदेश के हस्तशिल्पकारों की सैंकड़ों स्टाल है लेकिन अपनी विशेष कला और डिजायन के कारण कई स्टालें पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। ऐसी ही स्टाल है कुल्लुआनी हिमाचल प्रदेश की अजंना की, जिस पर विशेष विधि से बनाए गए बैंगल स्टैंड, मैकरम के शीशे, फ्लावर पोट, बैग पयर्टकों का लुभा रहे हैं।
स्टाल नंबर 225 की मालिक अजंना शर्मा बताती हैं कि अपने गांव कुल्लुआनी में पिछले आठ साल से यह कार्य कर है और सूरजकुंड मेले में वे पहली बार आई है। उन्होंने बताया कि यहां आने पर वे बेहद खुश है और पर्यटकों की पसंद की वजह से उनका सारा सामान भी हाथों हाथ बिक गया। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उन्होंने कोशिश एक आशा तथा शिवानी गु्रप बनाए हुए है जिनमे प्राचीन हस्तकला को बचाने के साथ महिलाओं को गांव में ही रोजगार का अवसर प्राप्त हुआ है। वे बताती है अखबार की रद्दी, वेस्ट मेटिरियल तथा बीयर की बोतलों से उन्होंने फ्लावार पोट, लंच बॉक्स तथा वॉल हेंगर बनाए है जो पर्यटकों को खूब पसंद आए। उन्हे पास 250 रूपये से लेकर दस हजार तक का सामान उपलब्ध 
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सूरजकुंड मेले का रविवार को महामहिम राज्यपाल करेंगे समापन
फरीदाबाद, 15 फरवरी।34वें अंतराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले का समापन 16 फरवरी को होगा जिसमे हरियाणा के राज्यपाल महामहिम सत्यदेव नारायण आर्य मुख्यअतिथि होंगे। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल बंडारू दंत्तात्रेय व उज्जबेकिस्तान के भारत में राजदूत फरोद अरजीव गेस्ट ऑफ ऑनर होंगे। कार्यक्रम की  अध्यक्षता हरियाणा के पयर्टन मंत्री कंवरपाल करेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, हरियाणा के परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा, बडख़ल की विधायक सीमा त्रिखा व हरियाणा पर्यटन निगम के चेयरमैन रणधीर सिंह गोलन भी उपस्थित रहेंगे।

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