आज है रोज डे, रोजाना देखें सूरजकुंड मेले में विभिन्न राज्यों की संस्कृति की झलक



फरीदाबाद(abtaknews.com दुष्यंत त्यागी )7 फरवरी।34वें सूरजकुंड मेले में विभिन्न राज्यों की संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है। मुख्य चौपाल के बाई तरफ लगाई गई मेले की थीम स्टेट हिमाचल प्रदेश गैलरी में स्थित एक स्टॉल लगी है। जहां आपको वैस्ट मैटेरियल से निर्मित सजावटी वस्तुएं तथा कुल्लू के विश्व प्रसिद्घ परिधान आपको उचित दामों पर मिल सकते हैं।
कुल्लू से आई स्टॉल संचालिका अंजना शर्मा ने बताया कि उनके पास वैस्ट मैटेयिल से हस्तनिर्मित फूल, गुलदस्ते, लंच बाक्स उपलब्ध हैं। उन्होंने पुराने अखबारों से निर्मित बहुत सारी वस्तुएं बनाई हुई हैं। कुल्लू के मशहूर शॉल, स्टॉल, हिमाचली टोपी, जैकेट सहित हाथ की दस्तकारी का बेहतरीन नमूना मैक्रम का शीशा भी पर्यटकों को वह बेच रही है।
अंजना शर्मा ने बताया कि वे कुल्लू में स्वयं सहायता समूह चलाती हैं। इस समूह के द्वारा वह सौ से अधिक लड़कियों को रोजगार दे रही हैं।  अंजना लड़कियों को हस्तशिल्प कला में निपुण बनाने के लिए लगातार प्रयारत है। इसके लिए वह नि:शुल्क प्रशिक्षण देती हैं। उन्होंने कहा कि घर में कोई चीज बेकार नहीं होती। आप में कला है तो किसी बेकार वस्तु को सुंदर रूप दिया जा सकता है। अंजना के अनुसार लड़कियों को घरेलू कुटीर उद्योग का प्रशिक्षण देने की सरकारी स्तर पर व्यवस्था हो जाए तो देश की हजारों-लाखों महिलाओं को घर बैठे स्वरोजगार मिल सकता है।
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फरीदाबाद, 7 फरवरी।मेदनापुर पश्चिम बंगाल से आया औनिंदय मोतियों से बने हार और सीप की हैंडवाश बोतल, गिलास आदि की स्टाल लगाकर अपने राज्य के कारीगरों का हुनर पर्यटकों के सामने रख रहा है।आठवीं कक्षा तक शिक्षित औनिंदय मेदनापुर  जिला के दीघा गांव बाशिंदा है और अब दिल्ली आने के बाद यहीं का होकर रह गया है। औनिंदय ने बताया उनका परिवार हैदराबाद से मोतियों की खरीद करता हे। उसके बाद उसके गहने व अन्य साज-सज्जा का घरेलू सामान बनाया जाता है। इसमें मोतियों के अलावा सीशैल से साबुनदानी, ट्रे, बोतल, गिलास, कप आदि को संवारा जाता है। औनिंदय ने बताया कि उनका ज्वैलरी का काम अधिक है। सीप व मोती से चूडिय़ां, कड़े, हार, माला, कानों केे झुमके बनाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं में मोतियों के गहने, अंगूठी आदि पहनने का विशेष चाव होता है। उसकी स्टाल पर महिलाओं  और लड़कियों का हुजूम देखा जा सकता है।
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फरीदाबाद, 7 फरवरी। गाढ़े आली गजबन छोरी बहादुरगढ़ का बम...हरियाणवी गीत तो आपको बखूबी याद होगा। बहादुरगढ़ की छोरी ही नहीं छोरे भी कमाल के हैं। चंद्रकांत लकड़ी की कारीगरी से देश और दुनिया में प्रदेश का  नाम गौरवान्वित कर रहा है। वुड कार्विंग में माहिर चंद्रकांत वर्ष 2004 में युनेस्को व राष्टï्रीय स्तर  पर सम्मान प्राप्त कर चुका है। वर्ष 2005 में उसे कलामणि अवार्ड से नवाजा गया था। चंद्रकांत को वर्ष 2009 में कलामणि सम्मान दिया गया था। उसके दादा जयनारायण भी इस कला में माहिर थे। उन्हेंं 1966 में नेशनल अवार्ड दिया गया था। चंद्रकांत के पिता महावीर प्रसाद को 1979 व चाचा राजेंद्र प्रसाद को 1984 में राष्टï्रीय पुरस्कार काष्ठï कारीगरी  में दिया गया। उसके बड़े भाई सूर्यकांत को साल 2013 में सम्मानित किया गया। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि बहादुरगढ़ का यह नौजवान कितना हुनरमंद है। इसके बनाए गए हाथी, घोड़े, ऊंट, मालाएं, शतरंज, मोर आदि  घरों में काफी सहेजकर रखी जाते हैं।
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फरीदाबाद, 7 फरवरी।रसोई के कूड़े को ना फेंककर इसका उपयोग खाद बनाने में किया जाए तो पेड़-पौधों को बेहतरीन किस्म की जैविक खाद मिल सकती है।फरीदाबाद की रहने वाली स्वच्छताकर्मी मोनिका शर्मा गत पांच वर्षों से सब्जियों, फलों व फूलों के कचरे से उन्नत किस्म की प्राकृतिक खाद ना केवल बनाती है, बल्कि इसको बनाने का तरीका भी लोगों को समझा रही है। मोनिका ने बताया कि वह सफाई के प्रति काफी संवेदनशील रहती थी और घर या रसोई में पड़ा कूड़ा उसे बेचैन कर देता था। फिर किसी ने उसको समझाया कि शिकायत करने की बजाय इसका समाधान निकाला जाए। धीरे-धीरे उसे अपने मिशन में कामयाबी मिलती चली गई। अब वह मिट्टïी के घड़ों का इस कार्य में उपयोग कर रही है। मोनिका ने बताया कि इन मिट्टïी के बर्तनों को वह खासतौर पर हैदराबाद और राजस्थान के जोधपुर से मंगवाती हैं। मोनिका के साथ ही आर.डी. शर्मा ग्रेटर  नौएडा स्थित अपने प्लांट में प्लास्टिक कचरे से सुंदर टाइलें बना रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  की ओर से शुरू किए स्टार्ट अप प्रोग्राम से जुडक़र राष्टï्रीय भौतिकी प्रयोगशाला से उन्होंने इसकी स्वीकृति हासिल की। मोनिका ने बताया कि वह गोबर से सूखी ज्वलनशील लकडिय़ां  भी बना रही हैं। इनका  ईंधन में बाखूबी इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके साथ मानव, संदीप नागपाल, पारस सलूजा भी इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं।
एनजीओ ह्यूमन काइंड फाउंडेशन की संचालिका मोनिका शर्मा ने बताया कि मिट्टïी के तीन या दो घड़ों का प्राकृतिक खाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। फलों, सब्जियों की  कचरा सामग्री को लकड़ी के बुरादे व सूखे पत्तों  से ढक़  दिया जाता  है। इसमें बैक्टिरिया छोड़े जाते हैं। दस-बारह दिन में ही जैविक खाद बन कर तैयार हो जाती है। मोनिका गुड़ और आटे से डिस्पोजल प्लेट कटोरी भी बनाती हैं,  जिसको प्रयोग करने के बाद पशु या चींटियों को खिलाया जा सकता है।

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