Wednesday, February 5, 2020

सूरजकुंड मेले की चौपाल पर दिखाई देती है हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति की समृद्घि की झलक

फरीदाबाद(abtaknews.com )5 फरवरी।34वें सूरजकुंड मेले की थीम स्टेट हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति की समृद्घि की झलक मुख्य चौपाल के मंच पर रात को देखने को मिली। शिव स्तुति, देवी की उपासना, धार्मिक त्यौहार और सामाजिक सौहार्द की भावना को प्रफुल्लता से कलाकारों ने प्रस्तुत किया।अंतर्राष्टï्रीय स्तर का कला मंच बन चुका सूरजकुंड देश-विदेश से आए लगभग बारह सौ कलाकारों की प्रस्तुतियों से गुंजायमान हो रहा है। गत रात्रि हिमाचल लोक संस्कृति को बड़ी चौपाल के मंच पर दिखाया गया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। उनके साथ हरियाणा आवास बोर्ड के चेयरमैन संदीप जोशी भी मौजूद थे। चौपाल में इस दौरान दर्शकों के लिए पांव रखने के लिए भी स्थान नहीं था। बड़ी संख्या में दर्शक बाहर खड़े रहे। लोकवाद्यों की धुनों पर पहाड़ी प्रदेश के महिला एवं पुरूष कलाकारों ने अपने नृत्य और लोकगीतों की मस्ती से दर्शकों की खूब वाह-वाही लूटी।


हिमाचल के स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने इस मौके पर कहा कि  सूरजकुंंड जैसे अंतर्राष्टï्रीय आयोजन की हरियाणा सरकार बरसों से जिम्मेदारी उठा रही है। इसके लिए राज्य सरकार बधाई की पात्र है। आज के समय  पूरे भारत वर्ष में सूरजकुंड जैसा विशाल आयोजन नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि हिमाचल में भी इस प्रकार के मेले लगाने की संभावनाएं मौजूद हैं। पर्यटन उनके राज्य के प्रमुख व्यवसायों में से एक है। विपिन परमार ने कहा कि हिमाचल की संस्कृति काफी गरिमामय और प्रेरणापूर्ण है। प्रेम और अपनापन यहां की कला संस्कृति की लोकधारा है।


हरियाणा आवास बोर्ड के चेयरमैन  संदीप जोशी ने कहा कि राज्य सरकार 1987 से हर साल निर्बाध रूप से सूरजकुंड मेले का आयोजन करती आ रही है। यह मेला अब हरियाणा सरकार का गौरव बन चुका है। इस मौके पर हिमाचल राज्य के विधायक, अधिकारी सहित अन्य गणमान्य अतिथि भी मौजूद रहे।

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फरीदाबाद, 5 फरवरी।अरावली  की पथरीली माटी में बसा सूरजकुंड अपने 34 सालों के सफर में मिनी भारत बन चुका है। हर साल किसी ना किसी  भारतीय  प्रदेश को थीम स्टेट के रूप में चुना जाता है। ये सभी राज्य मेला परिसर में बनाए  गए विभिन्न द्वारों की वजह से आज भी अपनी उपस्थिति यहां दर्शा रहे हैं।सूरजकुंड मेला ग्राउंड में आने के लिए महरौली रोड पर पांच मुख्य प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। हर गेट पर कोई ना कोई स्टेट का प्रतीक द्वार बना हुआ है। उदाहरण के तौर पर वीआईपी तीन नंबर गेट से पर्यटक प्रवेश करें तो केरल का कोटï्टायलांबा द्वार आपका स्वागत करता प्रतीत होगा। इस राज्य को वर्ष 1991 में थीम स्टेट बनाया गया था। इसी प्रकार गेट नंबर पांच पर हिमाचल का चंडीदेवी और माता ज्वाला देवी द्वार  आपका अभिनंदन करते प्रतीत होंगे। इससे थोड़ा आगे ही हैदराबाद की चारमीनार गोलगुंबद की अनुकृति बनी  हुई है। वर्ष 1995 में सूरजकुंड मेले के थीम स्टेट रहे पंजाब के रामबाग की कलाकृति भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। वर्ष 2003 में मेले का प्रमुख सहयोगी उत्तराखंड अपनी स्टेट के द्वार से गढ़वाल की याद ताजा बनाए रखता है।
साल 2016 में थीम स्टेट रहे तेलंगाना का प्रवेश द्वार राज्य की संस्कृति को दर्शा रहा है। इस बार के  थीम स्टेट हिमाचल ने भी सुप्रसिद्घ भीमाकाली मंदिर की हूबहू अनुकृति बनाकर पर्यटकों को हिमाचल की देवभूमि का अनुभव करवा रही है। वर्ष 1996 में भी यही राज्य सूरजकुंड का प्रमुख प्रदेश था। उस समय का 24 साल पुराना हिमाचल द्वार देखकर लगता है, जैसे इसे चार दिन पहले ही बनाया गया हो। पर्यटकों को भी इन द्वारों और प्रतीकात्मक इमारतों के सामने खड़े होकर सेल्फी या फोटो लेने से  काफी खुशी का एहसास हो रहा है। अन्य द्वारों में शाक्य तंगयुंग मोंटेसरी, उजबेेकिस्तान, मारूति टेंपल झारखंड, विष्णुपुर द्वार पं.बंगाल, दंतेश्वरी देवी मंदिर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ द्वार, गोआ स्वागत द्वार पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र तो हैं ही, साथ ही इन राज्यों से आने वाले पर्यटकों को भी उनकी भूमि की स्मृति करवाते हैं। कुल मिलाकर सूरजकुंड में आने से लगता है कि हम एक ही परिसर में बनाए गए मिनी भारत में आ गए हैं। इसे देखकर भारत देश की एकता, अखंडता और हमारी विविध संस्कृति का एहसास होता है।

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