Sunday, February 16, 2020

महिला सशक्तिकरण आधारित सामाजिक सहभागिता ग्रामीण जन जागरूकता कार्यशाला

उत्तराखंड(Abtaknews.com)16फरवरी, 2020:नौला फाउंडेशन ने उत्तराखंड विज्ञानं एवं शिक्षा अनुशंधान केंद्र, देहरादून के तत्वाधान में दुर्गम गॉव बडेत कफडा मैं आयोजित किया गया । कार्यशाला अध्यक्ष ललित मोहन बिष्ट के अनुसार आखिर वो कौन से कारण थे जिनके चलते साल भर पनचक्की चलाने वाली नदियां, बरसाती नालों में तब्दील हो गई । जंगलों का घनत्व घटते रहने से खीरोगाङ तथा गगास को पानी की आपूर्ति करने वाले जल स्रोतों में भी पानी कम होता रहा। मिस्रित जंगलों के कटने से सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि शीतकालीन वर्षा  और बर्फबारी काफी कम होती गयी जिसके चलते भी सदावाहिनी नदियां बरसाती नदियों में बदल गई।     
  गगास व उसकी सहायक नदियों को उसका गौरवशाली अतीत वापस दिलाने के लिए जरूरी है कि इन सभी गैर हिमानी नदियों के कैचमेंट में वर्षा जल के संरक्षण हेतु चाल, खाल और गड्ढे बनाए जायें तथा सहायतित प्राकृतिक पुनरोत्पादन पद्धति से जंगलों का संरक्षण और संवर्द्धन किया जाये । उत्तराखंड विज्ञानं एवं शिक्षा अनुशंधान केंद्र पर्यावरणविद मनोहर सिंह मनराल ने बताया हमारे वेदों  के पारम्परिक जल विज्ञानं पर आधारित परम्परागत जल सरंक्षण पद्धति व सामुदायिक भागीदारी को ज्यादा जागरूक करके पारम्परिक जल सरंक्षण पर ध्यान देना होगा और ये तभी संभव है जब मात्र शक्ति को प्रशासनिक नीतिगत मामलो  मै ज़िम्मेदारी दी जाये तभी धरातल पर कार्य दिखेगा । संदीप कत्यूरी मनराल ने बताया अब समय आ चुका हैं हिमालयी क्षेत्र में तेजी से सुख रहे पारम्परिक जलस्रोतों को बचाने के लिए बने बृहद समुदाय आधारित रिसर्च हिमालयन डिक्लेरेशन ऑफ़ स्प्रिंगशेड रेजुवेनशन (एचडीएसआर) के तहत किया जा रहा हैं I वरिष्ठ वैज्ञानिक डां गीरीश नेगी के अनुसार हिमालय पर पर्यावरणीय गहरा सकंट आने वाला है भारत सरकार, नीती आयोग की रिपोर्ट में हिमालय के सतत विकास पर कहा गया है कि लगभग 30% स्प्रिंग्स ( पारम्परिक जल स्रोत नौले धारे ), जो लोगों की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, सूख रहे हैं और 50% ने कम निर्वहन की सूचना दी है। 
देश के हिमालयी क्षेत्र में तीन मिलियन से अधिक स्प्रिंग्स को पुनर्जीवित करने के लिए एक व्यापक योजना हिमालयन डिक्लेरेशन ऑफ़ स्प्रिंगशेड रेजुवेनशन ( #एचडीएसआर ) के तहत डॉ. नवीन चंद्र जोशी के नेतृत्व में नौला फाउंडेशन के वैज्ञानिकों ने योजना पर काम करना शुरू कर दिया है।  पर्यावरणविद किशन भट्ट के अनुसार हिमालयी राज्यों में साल दर साल तेजी से गहराते जलसंकट से निपटने के लिए अब वाटर हेरिटेज साइट्स बनाया जाएगा। इसमें स्थानीय ग्रामीणों की मदद से नौला धारों के संरक्षण संवर्धन में टीमें जलस्रोतों को चिह्नित करने, सूखे जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने, जल की गुणवत्ता और भूमिगत जल से जुडे़ पहलुओं पर कार्य करेगी I पर्यावरणविद गणेश कठायत ने बताया
हिमालय के लिए बनी ठोस नीति बनानी होगी और पर्यटकों पर पर्यावरण शुल्क भी लगाने के साथ साथ प्लास्टिक पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगाना होगा तभी थोड़ा बहुत हम अपने बच्चों को  साफ़ सुधरा भविष्य  दे सकते हैं  I बडेत गांव में आज का कार्यक्रम एचडीएसआर की गाइडलाइन पर महिला सशक्तिकरण का एक सच्चा उदाहरण है। एक समय था जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया से पूरी तरह से बाहर थीं। आज वे न केवल संगोष्ठी में शामिल हुए बल्कि उन्होंने बड़े श्रोताओं को संबोधित किया और वे ऐसे हैं जो आने वाली पहलों के लिए रोड मैप बना रहे हैं।गाँव के कई अन्य समूहों के साथ में महिला मंगल दल में सबसे आगे रहने वाली, गाँव की महिलाओं द्वारा 100% भागीदारी के साथ पूरी कार्यशाला का नेतृत्व ग्राम प्रधान श्रीमती रेखा बिष्ट ने किया यह सब दर्शाता है कि महिलाएं अब अपने घरेलु कार्य तक ही सीमित नहीं हैं। कमल पांडे के अनुसार नौला फाउंडेशन महिला सशक्तिकरण में एक महत्त्वपूर्ण
भूमिका निभा रहा है। द्वारहाट विकासखडं के सभी गॉवो मैं यह आयोजन होने चाहिये जो महिलाओं को सशक्त
कदम बढ़ाने और पूरे अभियान का नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

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