Tuesday, December 31, 2019

सर्दी से बचाने वाली अंगीठी बनगई काल, लील लिया पूरा परिवार, वजीरपुर में 3 मौत से मचा कोहराम

फरीदाबाद (abtaknews-दुष्यंत त्यागी ) 31दिसंबर, 2019: जाता हुआ साल चंदेला परिवार पर दुःख का ऐसा पहाड़ छोड़ गया जिसे उम्र भर भुलाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। परिवार के छोटे बेटे उसकी पत्नी और बेटे की दर्दनाक मौत से मां वीरवती का रो रोकर बुरा हाल है। बेसुध हुई वीरमति अपने पति संतराम को पहले ही खो चुकी थी। जवान बेटे और उसके परिवार की इस वीभत्स मौत ने उनके ऊपर दुःखो का पहाड़ तोड़ दिया है। रविंद्र ने अपना भाई गजेंद्र, बबली ने अपनी बहन पायल और सिमरन ने अपनी सहेली दीपांशी को हमेशा के लिए खो दिया। एक ही परिवार में तीन मौत की खबर से गांव में कोहराम मच गया। मंगलवार की सुबह जिसने भी ये घटना सुनी वो घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा। 

ग्रेटर फरीदाबाद के वजीरपुर गांव में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत से कोहराम मच गया। सूचना मिलते ही खेड़ी पुल पुलिस थाना पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव के एक परिवार में हुए इस दर्दनाक हादसे में मरने वाले गजेंद्र उर्फ़ गज्जू उम्र 34 साल,  पायल उम्र 31 साल और बच्ची दीपांशी उम्र 9 साल शामिल है।
मृतक परिवार के जानकार बालकिशन वशिष्ठ ने बताया कि  गजेंद्र उर्फ़ गज्जू मवई गांव स्थित राठी गैस एजेंसी पर नौकरी करता था। वह दो भाई और तीन बहनों में सबसे छोटा था। गजेंद्र और रविंद्र भाई के आलावा साढ़ू थे। मृतक पायल की बड़ी बहन बबली रविंद्र से ब्याही थी। दोनों भाईओ के एक एक लकड़ी थी जिनके नाम सिमरन और दीपांशी है। कक्षा 3 में पढ़ने वाली दीपांशी की इस हादसे में मौत हो गई।  दीपांशी और सिमरन दोनों बहनो में बहुत अच्छी दोस्ती थी। सिमरन का भी रो रोकर बुरा हाल है। उधर बबली अपनी बहन पायल की मौत पर दहाड़े मार मारकर रोते रोते बार बार बेहोश हो रही है। मौके पर मातम करने वाली महिलाओं का जमघट लगा हुआ है।
कैसे हुआ हादसा ---- हाड कपकपा देने वाली सोमवार की रात को ठंड से बचने के लिए गजेंद्र उर्फ़ गज्जू, पायल और दीपांशी अंगीठी में उपले जलाकर उसे अपने बैड और चारपाई के पास रख कर सो गए। मंगलवार की सुबह 8.30 बजे बड़े भाई रविंद्र ने गजेंद्र को फ़ोन किया, जब फ़ोन नहीं उठा तो अपनी बेटी सिमरन को कमरे में देखने के लिए भेजा, सिमरन ने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला तो आकर उसने अपने पापा रविंद्र को सारी बात बताई। उसके बाद परिवार के लोगों ने  खूब आवाज लगाई  लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया ना होने के बाद खिड़की से झांककर देखा तो तीनो बेसुध पड़े हुए थे। खिडकी तोडकर दरवाजा खोला तो हक्केबक्के रह गए, तीनों बेहोशी की हालत में बेसुध पड़े हुए थे। परिजनों ने तीनो को हिलाडुला कर देखा तीनो की सांसे बंद थी। घर में कोहराम मच गया। बताया जा रहा है कि रात भर सुलगती अंगीठी के कारण उससे निकलने वाली गैस के चलते ही ये हादसा हुआ है। उसी गैस से सभी बेहोश हुए और फिर बेहोशी की हालत में ही दम घुटने से तीनो की मौत हो गई। वजीरपुर गांव में रहने वाले गुर्जर जाति के चंदेला परिवार की इस हृदय विदारक खबर से समूचा गांव सदमे में है। मृतक के परजनो का रो रोकर बुरा हाल है। घटनास्थल पर ग्रामीणों का हजूम मौजूद है स्थानीय पुलिस भी खबर मिलने पर मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है। मृतकों में पति-पत्नी और एक बच्ची शामिल है। तीनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल पहुंचा दिया है।  
पहले भी हुई ऐसी दर्दनाक घटना-- 2010 में खेतों पर खड़ी एक कार में तीन बच्चों की मौत हुई थी। उस घटना के बारे में भी बाल किशन वशिष्ठ ने बताया कि वो घटना भी लापरवाही  के चलते बड़ा हादसा हुआ था। 

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