प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीएए पर बवाल के बीच मोदी सरकार का बड़ा फैसला, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पर लगाई मुहर


नई दिल्ली:(abtaknews.com) 24 दिसंबर 2019:  नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर देशभर में जारी भारी विरोध प्रदर्शन के बीच मोदी सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। मोदी कैबिनेट ने सोमवार  को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) पर अपनी मुहर लगा दी है। सूत्रों के मुताबिक, इस मंजूरी के बाद राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एनपीआर को अपडेट किया जा सकेगा। दरअसल, नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) के तहत 1 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देशभर में घर-घर जाकर गणना की तैयारी है. देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना इसका मुख्य लक्ष्य है। इस डेटा में जनसांख्यिंकी के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी। बाहरी व्यक्ति भी अगर देश के किसी हिस्से में छह महीने से रह रहा है तो उसे भी एनपीआर में दर्ज होना है। एनपीआर के जरिए लोगों का बायोमेट्रिक डेटा तैयार कर सरकारी योजनाओं की पहुंच असली लाभार्थियों तक पहुंचाने का भी मकसद है।

जानें, क्या है एनपीआर?--नैशनल पॉप्युलेशन रजिस्टर (एनपीआर) के तहत 1 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की तैयारी है। देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना एपीआर का मुख्य लक्ष्य है। इस डेटा में जनसांख्यिकी के साथ बायोमीट्रिक जानकारी भी होगी। इसमें व्यक्ति का नाम, पता, शिक्षा, पेशा जैसी सूचनाएं दर्ज होंगी। एनपीआर में दर्ज जानकारी लोगों द्वारा खुद दी गई सूचना पर आधारित होगी और यह नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा।

एनपीआर कैसे अलग है एनआरसी से?--एनआरसी के पीछे जहां देश में अवैध नागरिकों की पहचान का मकसद छुपा है। वहीं, छह महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले किसी भी निवासी को एनपीआर में आवश्यक रूप से पंजीकरण करना होता है।

यूपीए सरकार की थी योजना--विरोध में कई राज्य--प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में 2010 में एनपीआर बनाने की पहल शुरू हुई थी। तब 2011 में जनगणना के पहले इस पर काम शुरू हुआ था। अब फिर 2021 में जनगणना होनी है। ऐसे में एनपीआर पर भी काम शुरू हो रहा है।सीएए और एनआरसी की तरह कई राज्यों ने एनपीआर को भी लाल झंडी दिखाने का फैसला कर लिया है। पश्चिम बंगाल, राजस्थान और केरल सरकार ने कह दिया है कि वे इसके खिलाफ हैं।

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