Sunday, November 10, 2019

गोलियों की बौछार से बचकर आए कारसेवकों का मुंह मीठा कराया ग्रामीणों ने, मंदिर एवं घरों में जलाए दीये

फरीदाबाद(abtaknews.com-दुष्यंतत्यागी)10नवंबर, 2019:  सरयू के तट पर गोलियों की बौछार के बीच कारसेवकों का मौत से सामना हुआ था। मंदिर और मकानों के तहखाने में रात और खेत खलियान में दिन गुजारना,  किसी ने खाना दे दिया कोई पानी पिला गया इस तरह दस दिन वनवासियों जैसे बिताए। घर से अयोध्या तक कभी बस पकड़ी, कभी ट्रैन फिर नदी-नालों के उबड़ खाबड़ रास्तों को पार करते हुई कार सेवा करने पहुंचने वाले कारसेवकों ने अपनी यादों को ताजा करते हुए आपबीती सुनाई। यह सभी संस्मरण सुनाए उन कारसेवकों ने जो 1990 में राम मंदिर की पहली कारसेवा में शामिल होने के लिए ददसिया गांव से अयोध्या गए थे। रामजन्म भूमि मंदिर मुहिम से जुडे स्वयं सेवकों ने अयोध्या राम मंदिर के ऐतिहासिक फैसले को गर्व और गौरव की बात बताया। अदालती निर्णय की अपने अपने तरीके से खुशी का इजहार किया। निर्णय के बाद कारसेेवकों ने सभी को बधाई दी। लोगों ने खुशी में मिठाईयां बांटी गई। ग्रामीण अंचल में घर आंगन और मंदिर प्रांगण में दीप जलाए गए। एक दूसरी दिवाली के रूप में मनाया गए दीपोत्सव से लोगों ने अपनी भावनाओं को बहुत ही सादगी के साथ व्यक्त किया।
रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन से जुडे स्वयं सेवकों ने देश की सर्वोच्च अदालत के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए अपने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि आस्था से जुडे राम जन्म भूमि मंदिर निर्माण संबंधित सर्वोच्च न्यायालय का सर्वमान्य निर्णय हम सभी को स्वीकार्य हैै। राममंदिर का निर्माण देश के लिए गौरव और हमारे लिए गर्व की बात है।मंदिर आंदोलन से जुडकर कार्य करने वाले ददसिया गांव के तीन स्वयं सेवक नीरज त्यागी, अजय गोयल और डॉ सुभाष त्यागी ने बताया कि अदालत के निर्णय के उपरांत राममंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया अब जल्द ही अयोध्या में रामजन्म भूमि पर एक भव्य एवं अलौकिक मंदिर बनेगा जो भारत ही नही अपितु विश्व के हिंदुओं का सबसे बडा धार्मिक स्थल एवं आस्था का केंद्र होगा। ददसिया गांव में मंदिर मुहिम से जुडे उक्त सभी कार सेवकों का डां सुभाष त्यागी के भाई एवं भाजपा नेता कृष्ण त्यागी ने मुंह मीठा कराकर उनका सम्मान किया।
मंदिर मुहिम से जुडे कार सेवक नीरज त्यागी ने बताया कि 21 अक्टूबर, 1990 को विश्व हिंदुपरिषद के अशोक सिंघल, महंत नृत्य गोपाल दास के नेतृत्व में हुई कार सेवा में शामिल होने के लिए मैं अपने साथी अजय गोयल, डॉ सुभाष त्यागी, लालपुर निवासी विरेंद्र और बादशाहपुर निवासी जीतेन शर्मा उर्फ चुक्कन ने योजना बनाई। गांव बादशाहपुर के तत्कालीन सरपंच कालूराम शर्मा ने हमे तिलक लगाकर रवाना किया था। बुआपुर से प्रदीप नागर  और सराय ख्वाजा से गोपाल शर्मा के नेतृत्व में तिगांव, सेहतपुर, पल्ला एवं अन्य गांवों से काफी संख्या में कारसेवक अयोध्या जाने के लिए बाटा चौक स्थित वैश्य धर्मशाला से 101 के जत्थों में फरीदाबाद ओल्ड रेलवे स्टेशन से दिल्ली के लिए रवाना हुए। फरीदाबाद से करीब 7 जत्थे रवाना हुए थे। उसके बाद दिल्ली से लखनउ ट्रेन से और लखनउ से फिर फै जाबाद के लिए रवाना होते हुए कार सेवकों को मनकापुर पहुंचना था। सभी सेवकों को गुप्त मुहिम के साथ एक दूसरे से अंजान बनकर यात्रा करनी थी।
बादशाहपुर निवासी जीतेन शर्मा उर्फ़ चुक्कन ने बताया कि हमें गर्व है कि हम हिन्दुओं की आस्था से जुड़े रामजन्म भूमि मंदिर की मुहिम का हिस्सा बने। डॉ सुभाष त्यागी ने बताया कि हमने घर से अयोध्या तक कभी बाइक तो कभी बस पकड़ी, कभी ट्रैन से सफर करते समय खतरा भांपकर बीच रास्ते चैन पुलिंग कर उतरकर फिर नदी-नालों के उबड़ खाबड़ रास्तों को पार करते हुई कार सेवा करने के लिए अयोध्या की सरयू नदी पर पहुंचे थे। कारसेवक अजय गोयल ने बताया कि सरयु नदी के तट पर पहुंचे तो वहां लाखों कारसेवकों का सैलाब मौजूद था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव स्वयं अपने हेलीकोपटर से स्थिति का जायजा ले रहे थे। उन्हीं के आदेश पर कार सेवकों पर गोलियां सीधी छाती और चेहरे पर चलाई गई जिसमें कई हजार कारसेवकों की मौत हुई। श्री गोयल ने बताया कि मेरे साथ खडे आठ-दस कार सेवकों को गोलिया लगी और हजारों की संख्या में घायल हुए। चारों तरफ खून से लथपथ लाशेंऔर चीखते-चिल्लाते स्वयंसेवक इधर उधर बचने के लिए भगदड़ मच गई।  हमे गिरफ्तार कर लिया गया, वहां से बडी मुश्किल से बचकर हम सकुशल वापिस लौटे। आज सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक एंव सर्वमान्य निर्णय से सभी वर्ग खुश हैं हमारे लिए अदालती फैसला गर्व और देश के लिए गौरव भरा हैं।

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