Thursday, October 3, 2019

श्री जागृति रामलीला में विभीषण शरणागति, रामेश्वरम स्थापना, अंगद-रावण संवाद का मंचन



फरीदाबाद(abtaknews.com)3 अक्टूबर। एनआईटी के नंबर 2 ब्लाक में श्री जागृति रामलीला कमेटी के तत्वावधान में बुधवार रात विभीषण शरणागति, रामेश्वरम स्थापना, अंगद-रावण संवाद की लीला का मंचन किया गया।

रामलीला में दिखाया गया कि हनुमान माता सीता से मिलने और उन्हें प्रभु राम की अंगूठी देने के बाद बोले की राम जरूर आएंगे और उन्होंने फिर वहां से विदा ली। इस दौरान उनकी मुलाकात लंकापति रावण के अनुज विषीषण से होती है जो प्रभु राम के परम भक्त हैं। विभिषण से मुलाकात में हनुमान उन्हें माता सीता के बारे में बताते हैं। इस पर विभीषण प्रभु राम को पूरी मदद देने का भरोसा दिलाते हैं। इसके बाद हनुमान वापस लौट आते हैं और प्रभुराम व राजा सुग्रीव को लंका के हालात से अवगत कराते हैं। पर प्रभु राम फिर भी युद्ध नहीं चाहते और अंगद को शांति दूत बनाकर एक बार फिर लंका रावण को समझाने भेजते हैं। जब अंगद लंका पहुंचते हैं तो राक्षसी सेना उन्हें बंदी बनाकर राजदरबार में पेश करती है। वहां अंगद व रावण के बीच जोरदार संवाद होता है। जिसके दौरान एक बार अंगद कहता है कि उनकी सेना प्रभु राम को क्या हराएगी वे उन्हें ही हराकर दिखा दें। वे कहते हैं कि उनका कोई भी शूरमा उनका एक पैर ही हिलाकर दिखा दे तो वे अपने प्रभु राम की ओर से अभी हार स्वीकार कर लेंगे। इसके बाद दरबार में उपस्थित अनेक शूरमा बारी-बारी अंगद का पैर उठाने का प्रयास करते हैं लेकिन सभी असफल हो जाते हैं। अंत में जब अहंकारी राजा रावण आता है और उनका पैर उठाने का प्रयास करता है तो अंगद कहते हैं कि अगर उनको पैर ही पडऩे हैं तो वे प्रभु राम के पकड़े, जो उन्हें अब भी सीता को सकुशल लौटाने पर क्षमा दे देंगे। लेकिन रावण ऐसा करने को राजी नहीं होते हैं। इस पर अंगद रावण को युद्ध को तैयार रहने को खबरदार करते हुए वापस लौट आते हैं। रामलीला में कमेटी के अध्यक्ष योगेश भाटिया व अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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