Thursday, October 3, 2019

कम्प्यूटर नेटवर्किंग के उभरते क्षेत्रों पर चर्चा के लिए कार्यशाला का आयोजन


फरीदाबाद(abtaknews.com)3 अक्तूबर,2019:जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के कम्प्यूटर इंजीनियरिंग विभाग द्वारा कंप्यूटर नेटवर्किंग के क्षेत्र में उभरती प्रौद्योगिकी से संकाय सदस्यों तथा शोधकर्ताओं को परिचित करवाने के ‘आप्रच्युनिस्टिक नेटवर्कस’ विषय पर दो-दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का आयोजन टीईक्यूआईपी-3 कार्यक्रम के अंतर्गत किया जा रहा है, जिसमें टीईक्यूआईपी के सहयोगी संस्थान राजकीय इंजीनिरिंग कालेज अंबेडकर नगर, उत्तरप्रदेश के संकाय सदस्य भी हिस्सा ले रहे है। कार्यशाला में मोबाइल कंप्यूटिंग, वायरलेस नेटवर्क और डेटा नेटवर्किंग के क्षेत्रों में काम कर रहे पीजी के छात्र, शोधकर्ता और संकाय सदस्यों सहित 45 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।
कार्यशाला का उद्घाटन कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने किया और प्रतिभागियों को संबोधित किया। इस अवसर पर बिट्स पिलानी, हैदराबाद कैंपस से डॉ. सुवादीप बटबायल मुख्य वक्ता रहे। उद्घाटन सत्र में कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष डॉ. कोमल कुमार भाटिया, कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अतुल मिश्रा और डॉ. आशुतोष दीक्षित भी उपस्थित थे। कार्यशाला का संचालन डॉ. प्रीति सेठी द्वारा किया जा रहा है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो दिनेश कुमार ने कहा कि ‘आप्रच्युनिस्टिक नेटवर्क एनवायरमेंट’ कंप्यूटर इंजीनियरिंग का अपेक्षाकृत नया और उभरता हुआ क्षेत्र है, इसलिए, इस क्षेत्र में शोध करने की काफी संभावना है। उन्होंने नवीनतम और उभरती हुई प्रौद्योगिकी पर कार्यशाला आयोजित करने के लिए विभाग की सराहना की और प्रतिभागियों को कार्यशाला के माध्यम से कौशल और ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि वे नई तकनीक में अनुसंधान को प्रोत्साहित करें। 
सत्र को संबोधित करते हुए, डॉ. कोमल कुमार भाटिया ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों, विशेष रूप से शोधकर्ताओं को नेटवर्किंग सिम्युलेटर सीखकर नेटवर्किंग एनवायरमेंट के लिए एक व्यावहारिक अभ्यास प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि विभाग भविष्य में भी ऐसी कार्यशालाएं आयोजित करता रहेगा। 
बिट्स पिलानी के डॉ. सुवादीप बटबायल ने ‘आप्रच्युनिस्टिक नेटवर्क’ पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने आप्रच्युनिस्टिक नेटवर्क, डिले टॉलरेंट नेटवर्क, अनुसंधान की संभावना और चुनौतियां, मेसेज ट्रांसफर और रूटिंग जैसे विषयों को कवर किया। उन्होंने आप्रच्युनिस्टिक नेटवर्क के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की। कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने डॉ. सुवादीप बटबायल को स्मृति चिन्ह भेंट किया।

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Your Ad Spot

Pages