Monday, September 9, 2019

जे.सी. बोस विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध करवा रहा है ई-बुक्स


फरीदाबाद(Abtaknews.com)09सितम्बर,2019:जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के पंडित दीनदयाल उपाध्याय केंद्रीय पुस्तकालय द्वारा विद्याथियों और संकाय सदस्यों को उनके लिए उपलब्ध विभिन्न संसाधनों और सेवाओं से परिचित करने के लिए ई-संसाधनों पर एक उपयोगकर्ता जागरूकता कार्यशाला आयोजित करके एक पहल की है।
कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के लाइब्रेरियन डॉ. पी.एन. बाजपेयी की देखरेख में किया गया। डाॅ. बाजपेयी ने बताया कि इस कार्यशाला के आयोजन का उद्देश्य विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध ई-संसाधनों के उपयोग के लिए विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि पुस्तकालय ने प्रमुख प्रकाशकों से छह हजार से अधिक ई-बुक्स के अलावा ई-रिसोर्स पैकेज की सदस्यता ली है। विश्वविद्यालय ने हाल ही में टीईक्यूआईपी-3 के अंतर्गत उपलब्ध फंड द्वारा पियरसन एजुकेशन और मैकग्रा-हिल एजुकेशन से 15 लाख रुपये से अधिक की राशि की 243 ई-पुस्तकों की खरीद की है। 
डॉ. बाजपेयी ने कहा कि असीमित उपयोग के साथ सब्सक्राइब की गई ई-बुक्स सभी पुस्तके इंजीनियरिंग के क्षेत्र से है और अंडरग्रेजुएट तथा पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध करवाई गई हैं। इन ई-पुस्तकों को कंप्यूटर या मोबाइल एप के जरिए एक्सेस किया जा सकता है। विद्यार्थी न केवल इन ई-पुस्तकों को ऑनलाइन एक्सेस कर सकते हैं, बल्कि उन्हें डाउनलोड भी कर सकते हैं और इसे ऑफलाइन पढ़ सकते हैं। ई-बुक्स में टेक्स्ट को अंडरलाइन या हाइलाइट करने, बुकमार्क और नोट्स बनाने की सुविधा हैं।
पियर्सन एजुकेशन से डिजिटल विशेषज्ञ गौरव शर्मा और मैकग्रा-हिल एजुकेशन से आकाश कुमार ने विश्वविद्यालय द्वारा सब्सक्राइब की गई ई-बुक्स को एक्सेस करने के तरीके के बारे में जानकारी दी। प्रो. दिनेश कुमार ने कार्यशाला के आयोजन में केन्द्रीय पुस्तकालय की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे ई-संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से ई-संसाधनों के ज्यादा से ज्यादा उपयोग का आह्वान भी किया है।
इस अवसर पर डीन अकादमिक डा. विक्रम सिंह, टीईक्यूआईपी समन्वयक डा. मुनीश वशिष्ठ और पुस्तकालय समिति के सदस्य डा.आशुतोष दीक्षित भी उपस्थित थे। कार्यशाला में विद्यार्थियों तथा और संकाय सदस्यों ने काफी संख्या में भागीदारी रही।

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