Sunday, September 1, 2019

चक्रवर्ती गुर्जर सम्राट मिहिर भोज महान की जयंती के उपलक्ष्य में फरीदाबाद में शोभायात्रा

फरीदाबाद(Abtaknews.com)अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा (एबीवीजीएम) के द्वारा 10 वे अन्तर्राष्ट्रीय गुर्जर दिवस आदि वराह चक्रवर्ती गुर्जर सम्राट मिहिर भोज महान की जयंती के 1203 वे प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में फरीदाबाद में दो शोभा यात्राओं का आयोजन किया गया । पहली शोभा यात्रा पाखल टोल से पाली,भाकरी,अनखीर ,ओल्ड फरीदाबाद होते हुए गुर्जर भवन सेक्टर 16 पहुंची । दूसरी शोभा यात्रा तिगांव अनाज मंडी से मंधावली,भैंसरावली,नचौली ,भारत कॉलोनी होते हुए गुर्जर भवन सेक्टर 16 पहुंची । पहली शोभा यात्रा को पाखल टोल पर पूर्व पार्षद महेंद्र भड़ाना,विधायक नागेंद्र भड़ाना, धर्मवीर भड़ाना ने हरी झंडी दिखाई तो दूसरी शोभा यात्रा को तिगांव अनाज मंडी में सिंघराज अधाना अन्तर्राष्ट्रीय पैराट्रूपर ने हरी झंडी दिखाई । डीजे की धुन पर थिरकते हुए और हर हर भोज घर घर भोज राष्ट्र धर्म रक्षक जय मिहिर भोज का जय घोष करते हुए बडी संख्या में एबीवीजीएम कार्यकर्ता शोभा यात्रा में शामिल हुए । रास्ते में पड़ने वाले अनखीर सहित सभी गावो में उनका फुल मालाओ से स्वागत किया गया । गुर्जर भवन पहुँचने पर शोभा यात्रा का ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया ।
गुर्जर भवन सेक्टर 16 पहुँचने पर शोभा यात्रा को संबोधित करते हुए इतिहासकार दीपक गुर्जर ने कहा के आज गुर्जर समाज के लिए ऐतिहासिक दिन है और आज 16 प्रदेशों में विशाल शोभा यात्रा निकाली जा रही है और अलग अलग तरह के आयोजन हो रहे है ।देश विदेशो में भी अबकी बार आयोजन किये जारहे है l इसके पश्चात उन्होंने बताया कि अबकी बार के अंतर्राष्ट्रीय गुर्जर दिवस की थीम है मितावली, मुरैना, मध्य प्रदेश का इकतेश्वर महादेव चौसठ योगिनी मंदिर । यह वहीं मंदिर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि संसद और राष्ट्रपति भवन का डिजाइन करने वाले अंग्रेज एडविन लुटियन ने इस मंदिर से संसद भवन बनाने की प्रेरणा ली थी। स्थानीय प्रशासनिक दस्तावेजों में उल्लेखित है कि संसद भवन के निर्माण से कुछ समय पहले ही लुटियन मितावली आए थे। मितावली के 64 योगिनी मंदिर की अहमियत को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इसे राष्ट्र संरक्षित स्मारकों में शामिल किया गया है। इसका निर्माण शैव संप्रदाय के साधकों के लिए गुर्जर प्रतिहार सम्राटो द्वारा करवाया गया था । हमे सदा ही गुर्जर प्रतिहारो की धरोहरों को बचाने का काम करना चाहिए । कार्येक्रम को बाबा श्याम दत्त तंवर ने सम्बोधित किया । इस अवसर पर  महेश फागना,शेखर गुर्जर, सूबेदार गुर्जर,सतीश बैसला , रोहित छावड़ी,महेश लोहिया, राकेश भाटी, ऋषिराज चपराना , दीपक बैसला ,सोनू गुर्जर,कपिल भडाना, विनीत भाटी, अनिल तंवर, रवि बैसला सहित सैंकड़ो एबीवीजीएम के कार्यकर्ता उपस्थित थे ।

पाखल टोल टैक्स से निकली अंतराष्ट्रीय गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की शोभायात्रा का अनखीर गांव के चौक पर जोरदार स्वागत किया गया। स्वागत करने वालो में मुख्य रूप से युवा गुर्जर नेता एवं समाजसेवी अनिल तंवर, आप नेता धर्मबीर भड़ाना, गुर्जर,बाबू तंवर,घनश्याम,सतपाल,सतीश ठेकेदार,धीरज,बिटटू तंवर, रोहित,चन्दी,हंसा मैम्बर,गोपी,श्यामदत्त,ब्रह्र ठेकेदार,बीर सिंह,चरण सिंह,फूल सिंह,सूबेदार,शेखर,सोनू,देवेन्द्र नंबरदार थे। शोभा यात्रा जैसे ही अनखीर पहुंची अनिल तंवर ने पुष्प वर्षा करके उसका स्वागत किया।  इस मौके पर अनिल तंवर ने कहा कि आज हमें गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के आदर्शो पर चलना की प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होनें कहा कि सम्राट मिहिर भोज बलवान, न्यायप्रिय और धर्म रक्षक सम्राट थे। मिहिर भोज शिव शक्ति के उपासक थे। स्कंध पुराण के प्रभास खंड में भगवान शिव के प्रभास क्षेत्र में स्थित शिवालयों व पीठों का उल्लेख है। उन्होनें बताया कि गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य के काल में सोमनाथ को भारतवर्ष के प्रमुख तीर्थ स्थानों में माना जाता था। प्रभास क्षेत्र की प्रतिष्ठा काशी विश्वनाथ के समान थी। स्कंध पुराण के प्रभास खंड में गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के जीवन के बारे में विवरण मिलता है। अरब यात्री सुलेमान ने अपनी पुस्तक सिलसिलीउत तुवारीख 851 ईस्वीं में लिखी जब वह भारत भ्रमण पर आया था। सुलेमान गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के बारे में लिखता है कि गुर्जर सम्राट की बड़ी भारी सेना है। उसके समान किसी राजा के पास उतनी बड़ी सेना नहीं है। सुलेमान ने यह भी लिखा है कि भारत में गुर्जर सम्राट मिहिर भोज से बड़ा इस्लाम का कोई शत्रू नहीं है। मिहिर भोज के पास ऊंटों, हाथियों और घुडसवारों की सर्वश्रेष्ठ सेना है। इसके राज्य में व्यापार, सोना चांदी के सिक्कों से होता है। कश्मीर के राज्य कवि कल्हण ने अपनी पुस्तक राज तरंगणी में गुर्जराधिराज मिहिर भोज का उल्लेख किया है। इस मौके पर धर्मबीर भड़ाना ने कहा कि गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की टकसाल रोहतक के खोकरा कोट को एक भाग से जो बाहर गढ़ी के समीप है मिली है। जिसपर माजरा गांव बसा हुआ है। आचार्य भगयान देव (स्वामी ओइमानन्द जी) जो हरियाणा के इतिहास के प्रामाणिक विद्वान हैं उन्होने गुरूकुल झज्जर में हरियाणें का प्रसिद्ध पुरातत्व संग्रहालय स्थापित किया है। सम्राट मिहिर भोज की मुद्राओं के ठप्पे वहां देखने को मिले हैं जो खोकराकोट से निकले हैं। रोहतक से सम्राट मिहिर भोज की कई इतनी सुन्दर मुद्राएं मिली है जिन पर वराह अवतार का बहुत सुन्दर चित्र बना हुआ है। 

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