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Monday, July 29, 2019

जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति 2019 के मसौदे पर संवाद सत्र का आयोजन


फरीदाबाद(abtaknews.com)29 जुलाई,2019:जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद द्वारा कुलपति प्रो. दिनेश कुमार की अध्यक्षता में आज नई शिक्षा नीति 2019 के मसौदे पर संवाद सत्र का आयोजन किया गया। संवाद सत्र में नई शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें उच्चतर शिक्षा संस्थानों की स्वायतता, व्यवसायिक शिक्षा पर बल, अनुसंधान, लिबरल आर्ट जैसे विषय शामिल थे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अंतर्गत शैक्षणिक संचार संकाय के निदेशक प्रो. जगत भूषण नड्डा सत्र में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में उपस्थित थे।
नई शिक्षा नीति के मसौदे पर विश्वविद्यालय द्वारा विभागीय स्तर पर केन्द्रीय समूह चर्चा का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें विश्वविद्यालय विभिन्न सहयोगियों के साथ मिलकर नीति पर गंभीरता से विचार-विमश कर रहा है। इस चर्चा के उपरांत विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति पर अपने सुझाव केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को भेजेगा। सत्र का संचालन डीन संस्थान डॉ. संदीप ग्रोवर द्वारा किया गया है, जिसमें उन्होंने नई शिक्षा नीति के मसौदे को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि किस तरह नई शिक्षा नीति से उच्चतर शिक्षा में नये बदलाव आयेंगे। 

सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति देश की शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव लेकर आयेगी। नीति के मसौदे में राज्य विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में सभी शिक्षण विषयों में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया है। सभी विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष फंड की सिफारिश की गई है। राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन द्वारा सभी विषयों में अनुसंधान के लिए फंड मुहैया करवायेगा और इससे सभी विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में अनुसंधान एवं नवाचार संस्कृति का विकास होगा।
मसौदा नीति में उच्चतर शिक्षण संस्थानों की स्वायत्ता की सराहना करते हुए प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि नई नीति स्वतंत्र तथा स्वायत उच्चतर शिक्षण संस्थानों की पैरवी करती है। इसमें सभी उच्चतर शिक्षण संस्थानों के लिए 2030 तक नैक मान्यता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह प्रशंसनीय है क्योंकि इससे इन संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि मसौदा नीति में संबद्धता को समाप्त करने तथा संबद्ध महाविद्यालयों को स्वायत डिग्री संस्थानों के रूप में विकसित करने और संबद्ध विश्वविद्यालयों को बहु-विषयक संस्थानों के रूप में विकसित करने पर बल दिया गया है। इसके साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए मिश्रित विषय चयन का विकल्प भी रखा गया है। इस प्रकार, इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाला एक विद्यार्थी को चार वर्षों में चालीस विषयों के गुणांक प्राप्त करने होंगे, जिसमें 15 व्यवसायिक विषय अनिवार्य है। इस प्रकार, इंजीनियरिंग, विज्ञान एवं कला का भेद खत्म होगा और विद्यार्थी अपनी रूचि के अनुरूप शिक्षा प्राप्त कर सकेगा।
सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. जगत भूषण नड्डा ने नई शिक्षा नीति में ‘राष्ट्रीयता’ के पहलु को सराहनीय बताया और कहा कि शिक्षा समाज के उत्थान का एक माध्यम है इसलिए, शिक्षा प्रणाली की मूल्यांकन प्रक्रिया को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढाई के दौरान तनाव प्रबंधन को भी सीखना होगा ताकि प्रतिस्पर्धा के दौर में वे तनाव का सामना बेहतर ढंग से कर सके। उन्होंने नई नीति में लिबरल आर्ट्स को महत्व देने को एक महत्वपूर्ण सुधार बताया।संवाद सत्र में सभी डीन, विभागाध्यक्ष के अलावा वरिष्ठ संकाय सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर पर संकाय सदस्यों ने नई शिक्षा नीति के मसौदे के विभिन्न पहलुओं की सराहना की तथा नीति के विभिन्न प्रावधानों पर जानकारी ली

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