Monday, June 10, 2019

समापन दिवस ; सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा आयोजित मानवता-फेस्ट-2019

फरीदाबाद(abtaknews.com) 09 जून,2019; सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा अपने ही विशाल परिसर सतयुग दर्शन वसुन्धरा में मानवता-फेस्ट २०१९, का समापन अत्यन्त हर्षोल्लास के साथ समपन्न हुआ। खेल-कूद, चौपाटी, जूमबा, रेन डांस, कुकिंग प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम, इत्यादि साधनों ने जहाँ दूर-दराज से आए युवाओं के मन को मोह लिया वही इस मौज-मस्ती के साथ-साथ, वह प्राप्त हुए आत्मिक ज्ञान की विचारधारा से सराबोर हो अपने भविष्य को भी सकारात्मक दिशा देने में सफल हुए। कार्यक्रम के अंत में आए हुए युवाओं को, मानव जीवन को सार्थक बनाने हेतु प्रणव के जाप की सही युक्ति बताने के साथ-साथ, ट्रस्ट के मार्गदर्शक श्री सजन जी ने जीवन में मौन की महता स्पष्ट करते हुए कहा कि जानो मौन मात्र चुप रहने का नाम नहीं है अपितु यह तो मन के खामोश यानि मिटने का नाम है। मौन का अर्थ है नि:श4द होना। जब यह मौन सध जाता है तो मन के भीतर कोई विचार या संकल्प-विकल्प की तरंगें नहीं उठती अपितु वह तो नि:श4द हो जाता है और सच्चिदांनद का अनुभव करता है। ऐसा शुभ होने पर स्थिर बुद्धि इंसान प्रसन्नचित अवस्था को प्राप्त हो सदा सचेतन बना रह पाता है। उन्होंने कहा कि ऐसा मौन साधने हेतु प्रणव मंत्र यानि आद् अक्षर के अजपा जाप की आवश्यकता होती है। धीरे-धीरे इसके अष्ट्वयास में प्रवीण होने पर मन स्वत: उपशम हो जाता है और व्यक्ति अंतर्मुखी हो मौन हो जाता है। यह ऐसी शांतमय निर्विचार अन्तर्दशा होती है जो बोलने से भी भंग नहीं होती। अत: इस महता के दृष्टिगत उन्होंने युवाओं से अपील की कि मौन को साधो। इस हेतु अपने ख़्याल को मौन में उतरने दो और गहराने दो। ऐसा करने से ख़्याल ब्राहृ सता से जुड़ता जाएगा और आपको अपना असलियत स्वरूप नज़दीक व समक्ष प्रतीत होने लगेगा। इस तरह श4दों व विचारों का क्रम तोडक़र इस विश्राम अवस्था का आनन्द मानने की चेष्टा करो। इस संदर्भ में याद रखो श4द व विचार तो मन की खुराक है। अत: मन तो श4दों का पान करने की ललक जगाएगा ही। लेकिन आप उस श4द जाल से विमुक्त रह शून्य होने का प्रयास करो। कहने का आशय यह है कि मन जितना श4दों व विचारों में खोया रहता है उतना ही इंसान मनमत से जुड़ा रहता है। आप इन श4दों व विचारों के जंजाल से अपने ख़्याल को विमुक्त रख अर्थात् श4दातीत हो, मनमत से आजाद हो जाओ। इस तरह ह्मदय, दिमाग और शरीर को एक अवस्था में साधे रख, सहज उत्पन्न पूर्ण मौन की स्थिति में आ जाओ। 

साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि जानो मौन अवस्था के पनपते ही इस तरह एकाग्रचित हो जाओगे कि आपके लिए ख़्याल ध्यान वल व ध्यान प्रकाश वल स्थिर रखना सहज हो जाएगा। यही नहीं ए विध् ऐसे योग्य व्यक्ति भी बन जाओगे जो ईश्वर, धर्म और सत्य-असत्य इत्यादि जैसे सूक्ष्म विषयों का विचार करने वाला होता है। इस महत्व के दृष्टिगत सजनों परम पुरुषार्थ दिखा, श्रेष्ठता को प्राप्त हो जाओ। नि:संदेह आरमभ में मन-वचन द्वारा मौन अपनाने में कठिनाई मालूम होगी 1योंकि वृतियों का तीव्र आक्रमण होगा। अनेक प्रकार के मिथ्या विचार उठेंगे जो मौन वृति को भंग करने की कोशिश करेंगे। पर आपको हारना नहीं होगा अपितु घड़ी की टक-टक की तरह, प्रणव मंत्र के अजपा जाप द्वारा अपनी सारी शक्तियाँ ईश्वर में केन्द्रित कर, मन को पूर्ण रूप से श4द ब्राहृ विचार के ग्रहण में लगाए रखना होगा। ऐसा करने से आत्मज्ञानी बन, निश्चित रूप से विजयी सिद्ध होगे।

सारत: उन्होंने जीवन में मौन की इस महा को समझते हुए बेकार की इधर-उधर की निरर्थक बातें सोचते व बोलते रहने के स्थान पर आध्यात्मिक तथा भौतिक तत्वों का सही अर्थों में ज्ञाता बनो और इस प्रकार भ्रम रहित अवस्था को प्राप्त हो, सत्य-धर्म के निष्काम रास्ते पर निर्भयता से प्रशस्त हो, परोपकार कमाओ और अपना नाम रौशन करो।

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