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Sunday, April 21, 2019

सिर्फ गरीबों के ढहाए जाते हैं आशियाने, अमीरों के आगे नतमस्तक हो जाते हैं अधिकारी: एल एन पाराशर

Only the poor are demolished, the people fall in front of the rich; Officers: LN Parashar
फरीदाबाद(abtaknews.com)21अप्रैल2019 : ग्रामीण गरीबों के आशियाने कोर्ट के स्टे के बाद भी तोड़ दिया जा रहे हैं और अरावली के माफिया सरेआम अवैध निर्माण और अवैध खनन कर रहे हैं उन पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती। ये दोगली नीति फरीदाबाद प्रशासन को नहीं अपनाना चाहिए। ये कहना बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट एल एन पाराशर का जिन्होंने कहा कि अनखीर के कई ग्रामीण मेरे पास आये और बताया कि 19 अप्रैल को प्रशासन ने उनके आशियाने ढहा दिए जबकि पास में ही एक फार्म हाउस में निर्माण और खनन हो रहा है उन लोगों पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। 

पाराशर ने कहा कि रविवार सुबह मैं मौके पर गया तो देखा कि संस्कृति ग्रीन फ़ार्म हॉउस के पास निर्माण चल रहा है। जेसीबी मशीन से पत्थरों की खुदाई हो रही है। पाराशर ने कहा कि सच में फरीदाबाद प्रशासन दोगला है और सिर्फ गरीबों के लिए ही शेर साबित होता है। अमीरों के लिए फरीदाबाद प्रशासन गीदड़ साबित हो रहा है। पाराशर ने कहा कि गरीब बहुत मेहनत से आशियाना बनाने हैं जब उन्हें ढहा दिया जाता है तो उनका दुःख वही जानते हैं। पाराशर ने कहा कि मैं लगभग हर रोज अरावली के माफियाओं को बेनकाब करता हूँ और मौके पर जाकर जा जोखिम में डाल वहां की तस्वीरें और वीडियो मीडिया तक पहुंचता हूँ और मीडिया के लोग ख़बरें भी छापते हैं लेकिन फरीदाबाद के कई विभाग के अधिकारीयों को कुछ नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि लगता है कि इन अधिकारियों की मिलीभगत से ही अरावली का चीरहरण हो रहा है। पाराशर के मुताबिक़ संस्कृति ग्रीन के पास खनन ही नहीं पेड़ भी काटे गए हैं और ग्रामीणों के पास इसके सबूत भी हैं लेकिन वन विभाग भी कुम्भकर्णी नींद सो रहा है। 

वकील पारशर ने कहा कि जिस तरह अरावली का चीरहरण जारी है उसे देख लगता है कि फरीदाबाद से बहुत जल्द अरावली का नामोनिशान मिट जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो जनता बेमौत मारेगी क्यू कि फरीदाबाद मे आये दिन प्रदूषण रिकार्ड तोड़ता रहता है। उन्होंने कहा कि रविवार को भी मैंने अवैध खनन और अवैध निर्माण देखे जिसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दूंगा क्यू कि अरावली पर लगातार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। 

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