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Thursday, March 28, 2019

पंजाब के समान वेतनमान देने का वादा भी चुनावी जुमला ही साबित हुआ। मनोहर लाल सरकार वादें से मुकरी


फरीदाबाद(abtaknews.com)28 मार्च।पंजाब के समान वेतनमान देने के चुनावी घोषणा में किए वादे पर अमल न होने से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश है। कर्मचारी अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पंजाब के समान वेतनमान देने का वादा भी चुनावी जुमला ही साबित हुआ है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा व वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री ने बताया कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के कार्यकाल में हरियाणा के मिनिस्टीरियल स्टाफ ने पंजाब के समान वेतनमान की मांग को लेकर पूर्व वित्त मंत्री सरदार हरमिंदर सिंह चठ्ठा के कुरूक्षेत्र आवास पर 477 दिन धरना दिया था और सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने इस मांग को लेकर निरंतरता में पांच वर्ष आंदोलन किए। जिसके दबाव में पूर्व कांग्रेस सरकार ने 25 अगस्त,2014 को हुई कैबिनेट की मीटिंग में 1 नवम्बर,2014 से हरियाणा के जिन कर्मचारियों की पंजाब के समान वेतनमान देने की मांग है,उनको देने का निर्णय लिया था। लेकिन फैसला लागू होने से पहले ही विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई। 

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने बताया कि कुरूक्षेत्र में 477 दिन चले धरने पर भाजपा के नेता जाकर पंजाब के समान वेतनमान देने की मांग का पुरजोर समर्थन करते थे और विधानसभा में तत्कालीन भाजपा के विधायक दल के नेता एवं वर्तमान में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज इस मांग को विधानसभा में जोर शोर उठाते थे। पंजाब के समान वेतनमान का मुद्दा सभी राजनीतिक दलों की मीटिंग में उठता जा रहा था। यही कारण था कि कांग्रेस के साथ ही इनेलो व भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कर्मचारियों की इस मांग को शामिल किया गया। महासचिव सुभाष लांबा ने बताया कि विधानसभा चुनाव में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ राज्य में सत्ता में आई।  सरकार ने वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए माधवन आयोग का गठन किया। लेकिन सरकार ने गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए माधवन आयोग को पंजाब के समान वेतनमान देने की मांग का केवल अध्ययन करने के लिए कहा गया। माधवन आयोग ने स्पष्ट  किया कि यह मांग  सभी कर्मियों की न होकर मुख्य रूप से केवल मिनिस्टीरियल स्टाफ ,,वन विभाग, स्वास्थ्य  पुलिस स्टाफ व ग्रुप डी के कर्मचारियो की ही है, जिसको लागू करना सरकार का काम है। लेकिन सरकार ने पंजाब के समान वेतनमान देने की बजाय सातवें वेतन आयोग को सिफारिशों को लागू कर दिया।उन्होंने कहा कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद क्लर्क व पुलिस कांस्टेबल को पे-मैट्रिक्स-2 (19900) दिया गया। इससे उसके वेतन में मात्र 845 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

उन्होंने बताया कि हरियाणा का क्लर्क,साहयक,डिप्टी सुपरिटेंडेंट, सुपरिटेंडेंट, पुलिस कांस्टेबल,हैड कांस्टेबल,साहयक सब इंस्पेक्टर व इंस्पेक्टर और वन स्टाफ पंजाब में इन्ही पदों पर का कार्यरत इन कर्मचारियों को प्रति माह करीब 14 हजार कम वेतनमान मिल रहा है। सरकार की नीयत शुरू से ही साफ नही थी, इसलिए कुछ समय बाद मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा कि क्लर्क व कांस्टेबल की योग्यता बाहरवी है। इसलिए बाहरवी वाले को बीए वाला ग्रेड कैसे दिया जा सकता है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए उनका ध्यान माधवन आयोग की रिपोर्ट में उल्लेखित माननीय सुप्रीमकोर्ट के फैसले की ओर दिलाया गया कि किसी पद के वेतन निर्धारण के लिए केवल शेक्षणिक योग्यता ही पैमाना नही हो सकता। माननीय न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी मापदंडों के आधार पर क्लर्क व कांस्टेबल सातवे वेतन आयोग में पे-मेट्रिकस के लेवल-6 (35400) का हकदार बनता है। उन्होंने बताया कि पंजाब के समान वेतनमान न देने से राज्य के कर्मचारियों में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश है। भाजपा को चुनाव में कर्मचारियों की इस नाराजगी का सामना करना पड़ेगा।

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