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Monday, March 11, 2019

जन सेवाओं के निजीकरण से किसानों, गरीबों व मजदूरों की बढ़ेंगी परेशानियां; सुभाष लाम्बा

फरीदाबाद(abtaknews.com)11 मार्च,2019;सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने कहा कि जन सेवाओं के निजीकरण से किसानों, गरीबों व मजदूरों की परेशानियां बढ़ेंगी। उन्होंनेे आम जनता, किसानों व गरीबों से बेहतर जनसेवा, बेहतर रोजगार और निजीकरण, ठेका प्रथा,व फूटपरस्ती के खिलाफ संयुक्त आन्दोलन  करने का आह्वान किया। उन्होंने यह आह्वान प्लाली चौक स्थित जाट संस्था में आयोजित नागरिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए किया। जिसकी अध्यक्षता सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान अशोक कुमार, सीटू के जिला प्रधान निरंतर पराशर व रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान नवल सिंह नरवत ने संयुक्त तौर पर की। सम्मेलन में एनआईटी विधानसभा क्षेत्र के आम नागरिकों, किसानों, मजदूरों व कर्मचारियों के सैंकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सीटू के जिला महासचिव लाल बाबू शर्मा द्वारा संचालित इस नागरिक सम्मेलन में किसानों, मजदूरों व कर्मचारियों के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। नागरिक सम्मेलन की शुरुआत पुलवामा आतंकी हमले व उसके बाद हुए आंतकी हमले में शहीद हुए सुरक्षा बलों जवानों व सैनिकों को दो मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सम्मेलन में एयरफोर्स द्वारा किए गए पराक्रम का राजनीतिक फायदा उठाने के किए जा रहे प्रयासों की घोर निन्दा की गई। माकपा के वरिष्ठ नेता कामरेड विजय कुमार झा ने नागरिक सम्मेलन में उठाए गए मुद्दों का पुरजोर समर्थन किया।
नागरिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री, मुख्य संगठनकर्ता बीरेंद्र सिंह डंगवाल, सीटू के उपाध्यक्ष बीरेंद्र सिंह, रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के उपाध्यक्ष यूएम खांन ने सरकार पर 2014 में भाजपा द्वारा किए घोषणा पत्र में वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा की पिछले लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर प्रत्येक साल 2 करोड़ रोजगार दिए जाएंगे। ऐसा ही हरियाणा में भी भाजपा ने 2 लाख नयी नौकरियां देने की बात कही थी। लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ। इसके विपरित केवल नोटबंदी में ही करीब एक करोड़ लोगों का रोजगार खत्म हो गया। बिजली, शिक्षा, रोड़वेज, स्वास्थ्य,जन स्वास्थ्य आदि लगभग सभी विभागों में  बड़े-बड़े पूंजीपतियों व ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए निजी हाथों में दिया जा रहा है। कर्मचारियों एवं मजदूरों की ठेका प्रथा समाप्त करने, पंजाब के समान वेतनमान व पेंशन देने, विधानसभा में रेगुलराइजेशन बिल पारित कर कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने, बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए खाली पड़े लाखों पदों को भरने आदि मांगों की अनदेखी की गई है। उत्पीड़न एवं दमन की कार्यवाहियों से आंदोलनों को दबाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। खेती संकट में है और किसान आत्महत्याएं कर रहे है। लेकिन सरकार झुठे दावें कर जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।राष्ट्रवाद के नाम पर अब  सरकार  सभी मुद्दों को गोल करना चाहती है। जिसका डटकर विरोध किया जाएगा।

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