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Sunday, February 10, 2019

जमनालाल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज द्वारा 'श्रीमती ज्योति द्धिवेदी मेमोरियल स्कॉलरशिप'होनहार व जरूरतमंद छात्रों के लिए

'Mrs. Jyothi Dadhvydi Memorial Scholarship' for Hazana and needy students by Jamnalal Bajaj Institute of Management Studies

मुंबई(abtaknews.com) 10 फरवरी; भारत के सुप्रसिद्ध बिज़नेस स्कूल जमनालाल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज (JBIMS),द्वारा एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन चर्चगेट में स्थित अपने कॉलेज ऑडिटोरियम में रक्खा गया था।जहाँ पर होनहार और आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों को उनकी उच्चतर शिक्षा में आर्थिक सहायता के लिए 'श्रीमती ज्योति द्धिवेदी मेमोरियल स्कॉलरशिपएक वार्षिक छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) की घोषणा की गयी।
2019 में प्रत्येक वर्ष दो मास्टर्स इन मैनेजमेंट स्टडीज (MMS) के छात्रों को 'श्रीमती ज्योति द्धिवेदी मेमोरियल स्कॉलरशिपके तहत 1,००,००० रुपये (एक लाख रुपये) प्रत्येक को दिए जाएंगे।ये स्कॉलरशिपप्रथम वर्ष में छात्रों द्वारा प्राप्त किए गए अंकों तथा उनके परिवार की आर्थिक स्थिति के आधार पर दूसरे वर्ष में उनके शैक्षिक शुल्क के खर्च पूरे करने के लिए प्रदान की जाएगी।यह स्कॉलरशिप की यह राशि JBIMS के १९९३ के  बैच के पास हुए निमिष द्धिवेदी द्वारा प्रदान की गयी और आगे भी दी जायेगी।इस वर्ष यह स्कॉलरशिप ऋतुजा धारकर और भीमसिंह राजपुरोहित को प्रदान की गई है।
इस अवसर पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कॉलेज की निदेशक डॉ. कविता लघाटे ने कहा,"स्कॉलरशिप के माध्यम से प्रतिभाशाली छात्रों को दिए जाने वाले सहयोग हेतु हम हमारे भूतपूर्व छात्र श्री निमिष द्धिवेदी के बहुत आभारी है। मुझे विश्वास है कि इस पुरस्कार द्वारा छात्र निश्चित रूप से प्रोत्साहित होंगे और भविष्य में अधिकाधिक उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रयास करेंगे।"
निमिष द्धिवेदीउपभोक्ता मार्केटिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र के अनुभवी व्यक्ति हैं,जिन्होंने भारतजापानहांगकांगसिंगापुरदुबई में रहकर काम किया है और अब वियतनाम में रहते हैं।निमिष द्धिवेदी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा,"मेरी स्वर्गीय माताजी की पुण्यस्मृति में यह स्कॉलरशिप स्थापित करने के लिए मैं डॉयरेक्टर तथा अपने बिजनेस स्कूल का कृतज्ञ हूं। मैं अपने वर्तमान कैरियर तथा सफलताओं का श्रेय जमनालाल बजाज इंस्टिट्यूट को देता हूं।मैं केवल इनकी वजह से में शिक्षा प्राप्त कर सका था क्योंकि मेरी स्वर्गीय माताजी का उच्च शिक्षा की शक्ति में दृढ़ विश्वास था और वे उन्नीस सौ साठ के दशक में गुजरात में अपने गृहनगर से स्नातक करने वाली प्रथम महिला थीं।"

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