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Wednesday, February 13, 2019

सूरजकुंड मेले में डिजिटल इंडिया के साथ दस्तकारों की कदमताल, कैशलेस खरीददारी बनी ट्रेंड

Movement of craftsmen with Digital India at Surajkund Fair, Cashless Purchase Trend
सूरजकुंड, (फरीदाबाद) 12 फरवरी(abtaknews.com)हस्त शिल्पियों का महाकुंभ कहे जाने वाले फरीदाबाद के सूरजकुंड में चल रहे 33वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेला डिजिटल इंडिया का हाथ थामे नजर आ रहा है, जिससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कैशलेस इंडिया मिशन को बल मिल रहा है। मेले में ऐसी स्टालों की संख्या अधिक है जहां पर स्वाइप मशीन या पेटीएम या अन्य मोबाइल एप के जरिए दस्तकार आसानी से कैशलेस ट्रांजेक्शन कर रहे हैं। 
हस्तशिल्पी प्वाइंट ऑफ सेल मशीन के अलावा भुगतान के लिए विभिन्न ऑनलाईन वॉलेट जैसे पेटीएम का भी उपयोग कर रहे हैं, जिनके माध्यम से उपभोक्ता कैशलेस भुगतान भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं मेला परिसर में पर्यटक नि:शुल्क वाई-फाई सुविधा का भी लाभ ले रहे हैं। इसके अलावा मेले की टिकटें बुक माई शो के माध्यम से ऑनलाइन बुक कराई जा सकती है। मेला परिसर में एटीएम और मोबाइल एटीएम की सुविधा भी लोगों को दी जा रही है। 
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गोहाना का मशहूर जलेबा बना लोगों की पहली पसंद
सूरजकुंड, 33वें अंतरराष्टï्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में विभिन्न देशों और अलग-अलग राज्यों की स्टॉलें लगाई गई हैं। इन स्टॉलों में हस्तशिल्प के माध्यम से तैयार किए गए विभिन्न प्रकार के उत्पादों को बिक्री के लिए रखा गया है। मेला परिसर में मेला देखने के लिए आने वाले लोगों के लिए यहां पर विभिन्न प्रकार के खाने पीने के सामान की स्टॉलें भी लगाई गई हैं। स्टॉल नंबर-21 गोहाना से आए सतीश कुमार ने लगा रखी है। इस स्टॉल पर मेला देखने के लिए आने वाले अधिकतर लोग गोहाना का मशहूर जलेबा का जायका लेना नहीं भूलते। जलेबा का स्वाद दूध के बिना अधूरा है। इसलिए ग्राहकों को मिट्टïी के कुल्हड़ में दूध भी परोसा जा रहा है। सतीश कुमार ने बताया कि जलेबा का एक पीस 90 रुपये में और भाव 360 रुपये प्रति किलो के हिसाब से जलेबा बेचा जा रही हैं। इसी प्रकार एक कुल्हड़ दूध की कीमत 50 रुपये निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि दूध में केसर, बादाम, पिस्ता और ईलायची डालकर ग्राहकों को परोसा जा रहा है, ताकि स्वाद का जायका बना रहे।  सतीश कुमार ने बताया कि गोहाना का जलेबा और दूध की बिक्री खूब हो रही है।
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सूरजकुंड, (फरीदाबाद) 12 फरवरी। भारतीय स्टेट बैंक की लघु सचिवालय स्थित शाखा के प्रबंधक हरीश अहूजा के मार्गदर्शन में 33 वें अंतरराष्टï्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में पर्यटकों एवं आगंतुकों की सुविधा के लिए मेले में एक एक्सटेंशन काउंटर खोला गया है। लोगों की सुविधा के लिए एसबीआई द्वारा तीन मोबाइल एटीएम मशीनें इस मेले में लगाई गई हैं। मेला देखने के लिए एवं सामान खरीदने के लिए जो भी लोग सूरजकुंड मेला परिसर में आते हैं। उन्हें कैश संबंधी किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो इसलिए भारतीय स्टेट बैंक ने तीन मोबाइल एटीएम वैन इस मेले में लोगों की सुविधा के लिए खड़ी कर रखी हैं।
मेला देखने के लिए लक्ष्मी नगर दिल्ली से आए सुंदर कुमार ने बताया कि उनको मेला में सामान खरीदने के लिए पैसे की जरूरत थी। लेकिन खरीददारी के लिए जेब में पैसे कम थे, इसलिए उन्होंने मेला परिसर में भारतीय स्टेट बैंक के द्वारा उपलब्ध करवाई गई मोबाइल एटीएम वैन के माध्यम से एटीएम सुविधा का लाभ प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि इस सुविधा का लाभ प्राप्त करके अपना घरेलु सामान खरीद लिया और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। मोबाइल एटीएम वैन के चालक रजनीश ने बताया कि एक फरवरी से 17 फरवरी तक स्टेट बैंक द्वारा लोगों को यह सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन सैंकड़ों व्यक्ति इस सेवा का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। मेला में स्टॉलों पर भी जमकर खरीददारी की जा रही है। एक स्टॉल पर युवा बैल्ट और बटुआ/पर्स की खरीददारी कर रहे हैं। सोनीपत और पलवल से मेले में आए मनजीत व अनिल शर्मा ने बैल्ट और पर्स/बटुआ खरीदा।  
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सूरजकुंड, (फरीदाबाद) 12 फरवरी। हरियाणवी संस्कृति का प्रचार एवं प्रसार करने के लिए 33वां अंतरराष्टï्ररीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेला एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। हर कोई व्यक्ति जो मेला देखने के लिए सूरजकुंड मेला परिसर स्थित अपना घर में पहुंचता है तो अपनी पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं क्योंकि यहां पर अलग-अलग स्टॉलों में हरियाणवी संस्कृति से जुडी प्रत्येक वस्तु एवं सामान को बड़ी सहजता के साथ सजाया और संवारा गया है। मेला परिसर में आने वाले मुख्य अतिथियों का आतिथ्य सत्कार हरियाणवी पगड़ी बांधकर किया जाता है। यहां पर एक बडा हुक्का भी रखा गया है, जिसके कश लेते हुए मुख्य अतिथि सहित अन्य गणमान्य नागरिक भी फोटो खिचवाते हैं। यहां पर चारा/छानी काटने के लिए पुराने जमाने का गंडासा भी लगाया गया है। पुराने जमाने में खेश और दरियां कैसे बनाई जाती थी उसकी जानकारी भी दर्शकों को दी जा रही है।
हरियाणवी संस्कृति का प्रचार एवं प्रसार करने के लिए स्कूलों के विद्यार्थी भी पीछे नहीं हैं। मंगलवार को मुख्य चौपाल में डिवाइन स्कूल के विद्यार्थियों ने एक से बढकर एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया। इन कार्यक्रमों में संस्कृति की झलक स्पष्टï तौर पर नजर आ रही थी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में मंगलवार को विभिन्न राज्यों और विदेशों के कलाकारों ने अपने कार्यक्रमों में अपने देश की संस्कृति का बेहतर प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। 
अपना घर में हरियाणवीं संस्कृति से जुडी फुलझड़ी, ईंढी, बीजना, बोइया, पीढा, ठाठिया, पलंग सहित अनेक प्रकार का सामान स्टॉलों में रखा गया है। सोनीपत जिला की कौशल्या ने बताया कि फुलझड़ी पुराने जमाने में लडक़ी के विवाह में शगुन के तौर पर दी जाती थी। इसके अतिरिक्त नया मकान बनाने पर दरवाजे/शाल में छत पर फुलझड़ी को लगाया जाता था। भाई के नए मकान बनाने पर बुलावे के बाद बहन बढिया विभिन्न रंगों की फुलझड़ी अपने भाई के मकान में लगाकर आती थी, जिसके बाद भाई खुशी के साथ अपनी बहन को इच्छानुसार उपहार देता था।

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