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Wednesday, February 6, 2019

पहले सूरजकुंड मेले में गोबर लीपने बुलाई थी भंवरी, आज परिवार बढ़ाता है मेले की शोभा

 
सूरजकुंड (फरीदाबाद), 6 फरवरी(Abtaknews.com) अंतर्राष्ट्रीय ख्याती प्राप्त कर चुका फरीदाबाद का सूरजकुंड क्राफ्ट मेला आज बेशक हर साल करोड़ों लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है लेकिन इस मेले को सजाने और यहां तक लाने के लिए बुनियाद को कई लोगों ने मजबूत किया है। इन्हीं में एक नाम शामिल है भंवरी देवी का। हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने व दिल्ली के आस-पास लोगों को एक बेहतरीन मनोरंजन देने के लिए 1987 में जब मेले की तैयारी शुरू की गई तो इसके स्वरूप को लेकर कई तैयारियां की गई। चूंकि मेला अरावली की पहाडिय़ों की मनोरम छटा के बीच था इसलिए इसे स्थाई निर्माणों के बगैर पारंपरिक लुक देने का निर्णय लिया गया। इसी में इसकी दीवारों को गोबर से लीपाई करने का निर्णय लिया गया। हरियाणा व राजस्थान की महिलाएं अपने घरों को गोबर की लीपाई कर उन्हें सजाती थी। ऐसे में मेले को पारंपरिक लुक देने के लिए कुछ महिला श्रमिकों को गोबर लीपाई के लिए बुलाया गया था।  इन्हीं महिला श्रमिकों में एक थी राजस्थान के नागौर की रहने वाली भंवरी देवी। 
भवंरी देवी ने लिपाई का काम खत्म होने के बाद मेला अधिकारियों से आग्रह किया कि एक कोने में वह भी अपना कुछ समान बेच सकती हैं क्या? मेला अधिकारियों ने तुरंत उसके आग्रह को स्वीकार कर लिया और उसे एक जगह बैठकर सामान बेचने की अनुमति दे दी गई। पहले मेले में मात्र 10 से 12 शिल्पकार ही आए थे। भंवरी ने घर के रद्दी सामान से सजावटी सामान तैयार किया और बेचना शुरू कर दिया। पहला मेला था और समय कम इसलिए वह रात को सामान तैयार करती और दिन में उसे बेच देती। मेले में आने वाले लोगों को दिखाने के लिए वह घर से हाथ की आटा चक्की भी ले आई। 
इसके बाद वह हर साल कई महीने पहले से ही मेले की तैयारी करने लगी। अपने बेटे मदन लाल को उसने सहयोग के लिए साथ मिलाया और फिर मेले में आने वाले वाले लोगों के लिए भंवरी का सामान अब पहचान बन चुका था। यही नहीं भंवरी ने हर साल मेले की दीवारों को विभिन्न शैलियों में गोबर लिपाई कर कच्चे-पक्के रंगों से सजाने में भी कोई कसर नहीं रखी। यही वजह थी कि 1990 में भंवरी देवी को कलाश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यही नहीं बाद में उसे शिल्प सम्मान से भी नवाजा गया। हरियाणा के तत्कालीन राज्यपाल महावीर प्रसाद जब 1994 में मेला देखने आए तो उनकी कला से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें पांच हजार रुपये इनाम भी दिया। 
वर्ष 2015 में भंवरी देवी की मृत्यु हो गई तो परिवार ने उसकी परंपरा को निभाए रखा। आज उनकी पुत्रवधु गुलाब देवी उनकी परंपरा को निभा रही है। बड़ी चौपाल के अपना घर के सामने ही स्टाल लगाने वाली गुलाब देवी बताती हैं कि कसीदाकारी और गोटे का काम उन्होंने अपनी सास से ही सीखा है। इसमें वह सूई धागे और कतरनों का प्रयोग करती हैं। वह इस कला के माध्यम से बंदनवार, लड़ी, झूमर, हाथ से तैयार राजस्थानी गुडिया, गोटा एंब्रायडरी की चोरी, कठपुतली और राजस्थानी साफा भी तैयार करते हैं। उनके पुत्र मदनलाल मेघवाल का कहना है कि यह मेला अब उनकी परिवार की परंपरा से जुड़ा है। वह यहां कमाई नहीं बल्कि अपनी मां की विरासत को आगे बढ़ान के लिए पहुंचते हैं।
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सूरजकुंड के हस्तशिल्प में अपनी पहचान बना रहा है हरियाणा का बौय्या व बीजणा   
सूरजकुंड (फरीदाबाद), 6 फरवरी। 33वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में हरियाणा का बौय्या व बीजणा इस बार भी यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। मेले में आने वाली छात्राएं इनके बारे में खासतौर पर जानकारी ले रही हैं। मेले में स्टाल लगाए हुए सोनीपत के गांव अटायल निवासी रेणु ने बताया कि बौय्या हमारे हरियाणा के घरों में आम मिलने वाली वस्तु है। घर की महिलाएं रद्दी कागजों से इसे तैयार कर लेती थी। धीरे-धीरे हम आधुनिकता की तरफ आ गए और आज हमारे से यह दूर हो गया। इसके बावजूद हमने इस कला को संजोया है और यह आगे बढ़े इसके लिए ही हम यहां भावी पीढ़ी को इसकी जानकारी देने के लिए यहां पहुंचे हैं। 
इसके साथ ही यहां पहुंची अंजू देवी परंपरागत बीजणा के बारे में यहां आने वाले पर्यटकों को जानकारी दे रही हैं। अंजू ने बताया कि बीजणा के बारे में जानती अधिकतर छात्राएं हैं लेकिन अब यह घरों से दूर हो चुका है। हम यहां उन्हें बीजणा बनाकर दिखाते हैं ताकि भावी पीढ़ी अपनी परंपरा की जानकारी ले सके। वहां मेले में इस स्टाल पर पहुंची वैशाली की ऋतिका, कडक़डड़ूमा की शीतल अपनी इन धरोहरों को देखकर खुश थी। उनका कहना था कि हमने यह चीजे अपने घरों में नहीें देखी हैं और यहां आकर हमें अपनी प्राचीन संस्कृति की झलक मिलती है। 

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सूरजकुंड मेला में फोटोग्राफी प्रतियोगिता गुरुवार,प्रोफेशनल व शौकीन फोटोग्राफर ले सकतें है हिस्सा

सूरजकुंड, (फरीदाबाद), 6 फरवरी। अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं तो सूरजकुंड मेला में गुरुवार आठ फरवरी को आपके लिए खास मौका है। मेला प्राधिकरण द्वारा मेले के थीम पर आधारित विशेष फोटोग्राफी प्रतियोगिता इस दिन आयोजित की जाएगी। इस प्रतियोगिता में प्रोफेशनल फोटोग्राफर व फोटोग्राफी के शौकीन किसी भी आयु वर्ग के लोग हिस्सा ले सकते हैं। मेला प्राधिकरण द्वारा जारी सूचना के फोटोग्राफी प्रतियोगिता का थीम 33वां सूजरकुंड मेला रखा गया है। फोटो 33वें सूजकुंड मेला का होना चाहिए। प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रतिभागी को दो फोटो खींचने होंगे और इनका प्रिंट ए-4 साईज की फोटोसीट पर निकलवाकर दोपहर दो बजे तक मीडिया सेंटर सूरजकुंड मेला परिसर में देना होगा। फोटो पर मेला को लेकर एक श्लोगन अवश्य लिखा हो। इसके साथ ही जब फोटो जमा करवाया जाएगा तो उसकी प्रिंट हार्ड कॉपी के साथ-साथ साफ्ट कापी भी जरूर हो। 
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सूरजकुंड(फरीदाबाद), 06 फरवरी।  33वे अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड हैंडीक्राफ्ट मेले की बुधवार को बड़ी चौपाल में रंगारंग कार्यक्रमों के साथ  शुरुआत की गई । बड़ी चौपाल के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में युगांडा के कलाकारों द्वारा उनकी भाषा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की की प्रस्तुति दी गई।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में दर्शकों  को  यदि  संगीत की भाषा समझ में ना आए तो भी भाव दर्शक अवश्य समझ सकता है। इसके उपरांत राजस्थानी घूमर संगीत अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले के सास्कृति कार्यक्रम लोगों का आकर्षक सोंग रहा। थीम स्टेट महाराष्ट्र के कलाकारों ने गोंडा आदिवासी संस्कृति की प्रस्तुति दी। इस नृत्य के माध्यम से चैत्र माह में नई फसल आने पर तथा शादी ब्याह के शुभारंभ करने पर भगवान का धन्यवाद किया जाता है। इसके अलावा महाराष्ट्र के कलाकारों द्वारा प्रोतराज नृत्य की भी प्रस्तुति की गई। महाराष्ट्र तथा तेलांगना के बॉर्डर पर दीपावली के त्यौहार पर खुशी के साथ 15 दिनों तक यह नृत्य मनाया जाता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत छोटी चौपाल पर पंजाब के कलाकारों द्वारा पंजाबी गीत, शिर्डी साईं बाबा पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक डांस, इन्टर लॉ आफ रिसर्च गांव बैसाना के विद्यार्थियों द्वारा नुक्कड़ नाटक, महाराष्ट्र के कलाकारों द्वारा वीर छत्रपति शिवाजी महाराज की रणनीति पर डांस, सत्यम शिवम पब्लिक स्कूल के छात्रों द्वारा पंजाबी गीद्धा की प्रस्तुति दी गई। ब्यूवंडी देश के कलाकारों द्वारा ड्रम मैजिक डांस, इथोपिया देश के कलाकारों द्वारा उनकी ही भाषा में डांस तथा सूडान देश के  कलाकारो द्वारा उनके राष्ट्रीय डांस की प्रस्तुति ने दर्शकों के मन को मोह लिया। दर्शकों ने भी जी भर कर तालियां बजाकर कलाकारों हौसला बधाइयां दी।
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सूरजकुंड(फरीदाबाद), 06 फरवरी।  33वें अंतर्राष्टï्रीय सूरजकुंड हस्त शिल्प मेले में बुधवार को छात्र-छात्राओं की ड्राईंग प्रतियागिता आयोजित करवाई गई। इसमें 21 स्कलों के 240 छात्र-छात्रओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता का आयोजन नाट्य शाला में किया गया। प्रतियोगिता के नोडल अधिकारी एनएस रावत ने बताया कि प्रतियोगिता का आयोजन 33वें अतर्राष्टï्रीय सूरजकुंड मेला प्राधिकरण द्वारा किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रतियोगिता की भावना पैदा करके उसकी होंसला बधाई करना है ताकि बच्चा भविष्य में भी प्रतियोगिताओं में सफल रहे। उन्होंने बताया कि मदर टेरेसा पब्लिक स्कूल एनआईसी के छात्र अरूण देवी पूजक पहले, किरन देवी पूजक तीसरे स्थान पर रही। जबकि रावल इंटरनेशनल नांगला सोहना रोड़ के अभेष ने दूसरा स्थान पाया। प्रतियोगिता में सेंट जॉनसन स्कूल सेक्टर-7 के सानयाम हंस, अशोक मैमोरियल पब्लिक स्कूल अशोक इन्कलेव वन के मोहम्मद केश रेजा को सांत्वना पुरस्कार मिला।
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