Saturday, February 23, 2019

असम: कैंसर को रोकने में एनएसएस की महती भूमिका हेागी: डा.कन्नन


सिलचर, 23 फरवरी(abtaknews.com ) असम विश्वविद्यालय के छात्रों ने कैंसर के बढ़ते प्रकोप और इसकी रोकथाम का निर्णय लिया है। सिलचर के कचर कैंसर अस्पताल में आयेाजित कार्यशाला में भाग लेते हुए10 से अधिक कॉलेजों के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएसइकाइयों के कार्यक्रम अधिकारियों और स्वयंसेवकों ने बराक वैली (बराक घाटीमें कैंसर के प्रसार को कम करने के बारे में योजना बनाई।एनएसएस के स्वयंसेवक विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में काम करते हैं। यह कार्यशालासंबंध हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफऔर असम कैंसर केयर फाउंडेशन (एसीसीएफद्वारा एनएसएसअधिकारियों और स्वयंसेवकों को संवेदनशील बनाने के लिए और उन्हें समुदाय के साथ जोड़ने की गतिविधियों की योजना बनाने में मदद करने के लिए आयोजित की गई।
इस मौके पर असम विश्वविद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक एमगंगाभूषण ने कहा कि पुरुषों में सभी तरह के कैंसर का 50 प्रतिशत और महिलाओं में 25 प्रतिशत तम्बाकू के कारणहोता है और असम में तांबूल के अतिरिक्त उपयोग के कारण यहां इसका प्रतिशत अधिक है। तांबूल का सेवन भी कैंसर के कारणों में एक है। तंबाकू सेवन  केवल कैंसर बल्कि कई अन्य बीमारियोंका कारण है।उन्होंने कहा कि असम में प्रति वर्ष 34,000 से अधिक लोग तंबाकू से संबंधित बीमारियों के कारण मर जाते हैं। यह केवल मौतें नहीं हैंबल्कि संबंधित उन सभी परिवारों को नाश भी है।
एनएसएस स्कूलोंकॉलेजों और विभिन्न समुदायों के बीच गतिविधियों की एक श्रृंखला आयोजित करने की योजना बना रहा है ताकि तंबाकू के नुकसान के बारे में जागरूकता पैदा की जा सके गाभूषण ने कहाअगस्त 2018 से कई एनएसएस इकाइयों ने सैकड़ों छात्रों को तंबाकू का उपयोग नहीं करने का संकल्प दिलाया हैउन्होंने कहा कि एनएसएस के स्वयंसेवकों ने नुक्कड़ नाटकपोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया और विक्रेताओं को स्कूलों के पास तंबाकू उत्पादों की बिक्री नहीं करने के लिए प्रेरित किया।
एसएचएफ के ट्रस्टी संजय सेठ ने कहा “तंबाकू की महामारी फिर से लौटने बीमारी वाली है। एनएसएस स्वयंसेवक युवा शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं जो एक बार जागृत होकर समाज को बदलसकते हैं। इतना ही नहीं इस तरह के अभियानों से स्वयंसेवकों को तंबाकू का उपयोग करने से बचना होगावे उन समुदायों के तम्बाकू उपयोग के प्रति धारणा को बदल सकते हैं जिनके बीच वे लोगकाम करते हैं।
कचारकैंसर अस्पताल के निदेशक और असम में वॉयस ऑफ टोबैको विक्टिम्स (वीओटीवीके नेता डॉरवि कनन ने तंबाकू के नुकसान के बारे में कार्यशाला में कहा कि हमारे अस्पताल में आनेवाले ज्यादातर मरीज तंबाकू सेवन के कारण विभिनन रोगों के शिकार होते हैंदुर्भाग्य से वे तब आते हैं जब उनका कैंसर अंतिम चरण में होता है।इसलिए उनके बचने की संभावना कम होती हैउन्होंने कहा कि एनएसएस द्वारा शुरू किए रोकथाम अभियानों से तंबाकू के उपयोग से लाखों लोगों की जान बच सकती है।
न्होंने यह भी कहा कि वॉयस ऑफ टोबैको विक्टिम्स (वीओटीवीदेश भर में डॉक्टरों द्वारा पीड़ितों की पीड़ा और पीड़ितों की स्थिति को नीति निर्माताओं और लोगों के ध्यान लाने के लिए चलायागया एक अभियान है। वीओटीवी ने भारत में तंबाकू के सेवन के प्रचलन को कम करने में मदद की है।
ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (जीएटीएस),2017 के अनुसार असम में 48.2 प्रतिशत लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। इसमें 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान (सिगरेट और बीड़ीकरते हैंधुआंरहित तम्बाकू(ताम्बुलगुटकाआदिका उपयोग 41.7 प्रतिशत लोग करते है। गौरतलब है कि वर्ष 2011 17 के दौरान भारत में तंबाकू के उपयोग में 6प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि असम में इसका उपयोगबढ़ गया है। नतीजतन राज्य में कैंसर की दर खतरनाक अनुपात तक पहुंच रही है।

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