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Sunday, January 27, 2019

जेसी बोस विश्वविद्यालय में पहली बार पीजी विद्यार्थियों के लिए आयोजित हुए एल्युमनाई मीट


Alumni Meets for the first time organized for PG students at Jesse Bose University
फरीदाबाद, 27 जनवरी(abtaknews.com)जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद द्वारा स्वर्ण जयंती वर्षोत्सव के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के सभी विभागों के पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों के लिए एल्युमनाई मीट का आयोजन किया गया। इस मीट में वर्ष 2002 से 2019 बैच केे 150 से ज्यादा विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम का उद््देश्य पूर्व विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के साथ जोड़ना और विकास में भागीदार बनाना था।एल्युमनाई मीट का आयोजन विश्वविद्यालय के एलुमनाई व कारपोरेट अफेयर सेल, इंडस्ट्रªी रिलेशन्स सेल तथा ट्रªेनिंग व प्लेसमेंट विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. दिनेश कुमार तथा विशिष्ट अतिथि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण में सलाहकार (प्रसारण व केबल सेवा) श्री अनिल कुमार भारद्वाज ने किया। श्री भारद्वाज वाईएमसीए इंजीनियरिंग कालेज के भूतपूर्व विद्यार्थी भी रहे है। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय केे विद्यार्थियों द्वारा संस्कृृतिक प्रस्तुतियां भी दी।

पूर्व विद्यार्थियों के संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने भूतपूर्व विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होेंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षक व विद्यार्थियों के बाद भूतपूर्व छात्र ही है, जिसके कारण विश्वविद्यालय की पहचान होती है। उन्होंने कहा कि एक विद्यार्थी के साथ उसकेे शिक्षण संस्थान का नाम पूरी जिंदगी उसी तरह जुड़ा रहता है, जैसे उसके माता-पिता का नाम। इसलिए, यह यह विद्यार्थी पर निर्भर करता है कि वह अपने मातृ संस्थान, जिससे उसने शिक्षा ग्रहण की है, उसकेे उत्थान में किस तरह से सहयोग करता है क्योंकि जब एक संस्थान ख्याति हासिल करता है तो उसका प्रभाव उन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं छवि पर भी पड़ता है, जो उसका हिस्सा रहे है।
कुलपति ने कहा कि दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालय अपने पूर्व विद्यार्थियों के लिए जाने जाते हैं और अपने पूर्व विद्यार्थियों के साथ मजबूत संबंध बनाने के लिए काम करते हैं। आज, वाईएमसीए के पूर्व विद्यार्थी सभी प्रमुख रेफ्रिजरेशन और एयर कंडीशनिंग कंपनियों में शीर्ष स्थान पर हैं और वे इस संस्था की बड़ी ताकत हैं। विश्वविद्यालय अपने पूर्व विद्यार्थियों को एल्युमनाई पोर्टल के माध्यम से मंच प्रदान करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग पांच हजार एल्युमनाई इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवा चुके है। यह पोर्टल पूर्व विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के विकास में सुझाव और रचनात्मक सहयोग देने के लिए एक ही मंच प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जल्द ही सभी विभागों के अंडर ग्रेजुएट विद्यार्थियों के लिए भी एल्युमनाई मीट का आयोजन करेगा।
इस अवसर पर श्री अनिल कुमार भारद्वाज ने विभिन्न क्षेत्रों विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उल्लेख किया तथा प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए बहुत गर्व की बात है कि इसके पूर्व विद्यार्थी विभिन्न सरकारी संगठनों, निजी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनमें से कई सफल उद्यमी हैं जो दूसरों को भी रोजगार प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने पूर्व विद्यार्थियों द्वारा विश्वविद्यालय के विकास में योगदान की प्रशंसा की और विश्वविद्यालय, पूर्व विद्यार्थियों तथा विश्वविद्यालय में पढ़ रहे विद्यार्थियों के बीच संबंध को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम कोे डीन (इंस्टीट्यूशन्स) डाॅ. संदीप ग्रोवर ने भी संबोधित किया तथा विश्वविद्यालय केे वाईएमसीए डिप्लोमा कालेज से एक पूर्ण विश्वविद्यालय बनने तक केे सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में पीजी पाठ्यक्रम की शुरूआत वर्ष 2002 में तत्कालीन वाईएमसीए इंजीनियरिंग कालेज केे दौरान हुई थी और आज विश्वविद्यालय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लगभग सभी मुख्य विषयों में पीजी पाठ्यक्रम करवा रहा है।इससे पूर्व, एलुमनाई व कारपोरेट अफेयर सेल के निदेशक डाॅ. संजीव गोयल ने सभी पूर्व विद्यार्थियों का कार्यक्रम में स्वागत किया तथा विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के साथ जोड़ने के लिए की जा रही पहल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय व पूर्व विद्यार्थियों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने के साथ-साथ उनकी रोजगार व उपलब्धियों संबंधी जानकारी को साझा करना है। 
इस अवसर पर पूर्व विद्यार्थियों ने अपने-अपने संबंधित विभागों का भ्रमण भी किया तथा सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्हें अपने शिक्षकों से मिलने व बातचीत करने का अवसर भी प्रदान किया गया और उनके सुझाव जाने गये कि वे किस प्रकार विश्वविद्यालय के विकास में योगदान दे सकते है।

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