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Saturday, January 19, 2019

अवैध रूप से रिहायशी भवनों का कमर्शियल प्रयोग करने वाले लोगों की मांगो को लेकर बैठक



फरीदाबाद(abtaknews.com) 19 जनवरी,2019; अवैध रूप से रिहायशी भवनों का कमर्शियल प्रयोग करने वाले लोगों की मांगो पर विचार करने के लिए आज नगर निगम के मुख्य अभियंता डीआर भास्कर के नेतृत्व में अधिकारियों तथा व्यापार मंडल के सदस्यों की एक बैठक हुई जिसमें सभी मुद्दों पर चर्चा करने के बाद यह फैसला लिया गया कि इस प्रकार के भवनों को नियमित करने के लिए सन 2010 में प्रदेश सरकार ने जो पॉलिसी लागू की थी उस पॉलिसी के तहत आवेदन करने वाले 726 लोगों को राहत देने के लिए इस मामले में सरकार को एक समन पत्र भेजा जाए उल्लेखनीय है कि इस प्रकार अवैध रूप से व्यवसायिक से कमर्शियल बनाए गए भवनों के लिए सरकार ने 2010 में एक नीति लागू की थी जिसके तहत फरीदाबाद के 726 लोगों ने पॉलिसी के तहत क्या शुल्क जमा कराकर उनके भवनों को नियमित करने की मांग की थी लेकिन उस समय केवल 26 उपभोक्ताओं को नियमित संबंधी प्रमाण पत्र अलर्ट किया गया जबकि क्योंकि यह पॉलिसी 2012 में वापस ले ली गई थी इस कारण अभी तक 700 भोक्ता अपने प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे हैं बैठक में उपस्थित एटीपी यूएलबी चंडीगढ़ के एटीपी सुनील वर्मा ने बताया कि हरियाणा सरकार ने 26 जून 2018 को जो नई कन्वर्जन पॉलिसी घोषित की है उस पॉलिसी में सन 2010 की पॉलिसी के अनुसार पैसा जमा कराने वाले 700 उपभोक्ताओं के लिए किसी प्रकार का कोई प्रावधान नहीं किया गया है जबकि व्यापारियों की मांग थी की जिस प्रकार से 26 वक्ताओं को कन्वर्जन प्रमाण पत्र दिए गए हैं उसी प्रकार से 700 उपभोक्ताओं को भी प्रमाण पत्र जारी किए जाएं क्योंकि वह भी 2010 की पॉलिसी के अनुसार पैसा जमा करा चुके हैं जिस पर कुछ व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाए कि जिन 26 व्यापारियों को कन्वर्जन प्रमाणपत्र दिए गए हैं उनके भवनों में भी 2010 की नीति के अनुसार सभी मानक पूरे नहीं हो रहे फिर भी उनको प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए और अब 700 उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है सभी पक्षों को सुनने के बाद बैठक की अध्यक्षता कर रहे निगम के मुख्य अभियंता डीआर भास्कर ने नगर निगम के एसटीपी बीएस ढिल्लों को निर्देश दिए की वह इस बात की जांच करें कि जिन 26 उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं उनके भवन 2010 की नीति के अनुरूप सभी मानकों को पूरा करते हैं साथ ही बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि बीएस ढिल्लों ही सरकार को इन 700 वक्ताओं के लिए एक रिमाइंडर पत्र भी भेजें ताकि इस पूरे मामले में इंसाफ वक्ताओं को राहत मिल सके। 

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