Saturday, December 8, 2018

जीबीएन स्कूल के बच्चो ने प्रस्तुति से बताई भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता

फरीदाबाद (abtaknews.com)भारतीय संस्‍कृति दुनिया की सबसे पुरानी संस्‍कृतियों में से एक है. यहां रहने वाले लोगों की भाषा अलग है। पहनावा अलग है खानपान अलग है लेकिन उस सबके बावजूद सबसे मजबूत लोकतंत्र नज़र आता है यही वजह है कि विदेशी भी भारत की और  खिंचे चले आते हैं और भारतीय संस्‍कृति को अपने जीवन का हिस्‍सा बना लेते हैं. कई विदेशी भारत से इतने प्रभावित हुऐं की यही रहने भी लगे। स्टूडेंट ने एक से बढ़कर एक भारतीय और विदेशी सभ्यता के ऊपर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया । इसके लिए स्टूडेंट्स स्कूल स्टाफ बधाई के पात्र है। यें बाते कल्चरल कांसलर ऑफ दा एम्बेसी ऑफ इजिप्ट डॉ मोहम्मद शौकर नाडा ने  सेक्टर-21 डी स्थित जीबीएन स्कूल के सफलतापूर्वक 15 साल पूरे करने पर आयोजित वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में पहुुचने पर कहे।

इस अवसर पर एओटीएस दिल्ली केंजी हयानो फ्रॉम हिताची जापान स्पेशल गेस्ट के रूप में मौजूद रहे।इस अवसर पर  स्कूल के बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। वही स्कूली बच्चों ने देशी और विदेशी सभ्यता और व संस्कृति के ऊपर एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों ने जापान की सभ्यता को डांस के माध्यम से लोगों के सामने प्रस्तुत किया। जिसे आएं हुऐं सभी अतिथियों ने काफी पसंद किया। इस अवसर पर स्कूल की डायरेक्टर अनीता सूद ने अपने संबोधन में कहा की जीबीएन स्कूल के सफलतापूर्वक 15 साल पूरे होने का क्रेडिट  स्कूल स्टाफ, अभिभावक और प्यारे बच्चों को जाता है। स्कूल में एजुकेशन ,स्पोर्ट्स या फिर कल्चर एक्टिविटी की बात हो बच्चों ने हमेशा ही आगे रहकर  स्कूल, शहर और स्टेट का नाम रोशन किया है। आज जो बच्चों द्वारा कार्यक्रम  प्रस्तुत किए गये है उसका मकसद केवल  स्टूडेंट्स को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता तथा नैतिक मूल्यों के बारे में जानकारी देना था।  इस अवसर पर स्कूल  प्रिंसिपल लीला गोविन्द ने स्कूल रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुऐं स्कूल के अचीवमेंट्स के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में वीजी इंडस्ट्रीस के  मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप सूद , अंजलि सूद , डॉ रोहित मुखर्जी ,डॉ श्रीश भारद्वाज,  डॉ गोविन्द  , ट्रस्टी मेम्बर आरके गुप्ता ,डॉ रेणु गुप्ता  और  सीएल जैन ,आदि कई लोग उपस्थित रहे। 



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