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Wednesday, December 12, 2018

बेहतर शिक्षा के लिए प्रोफेशनल डेवलपमेंट ऑफ इंग्लिश टीचर का 8 दिवसीय प्रशिक्षण शिवर



फरीदाबाद 12 दिसंबर 2018(abtaknews.com)सेक्टर 16 के डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर समग्र शिक्षा ऑफिस में हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के द्वारा प्रोफेशनल डेवलपमेंट ऑफ इंग्लिश टीचर का 8 दिवसीय प्रशिक्षण कैंप  7 दिसंबर 2018 से चल रहा है इसमें 50 पीजीटी इंग्लिश लेक्चरर भाग ले रहे हैं जिनके मास्टर ट्रेनर गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल बल्लभगढ़ से अंग्रेजी के प्रवक्ता श्याम दत्त और गवर्नमेंट गर्ल सीनियर सेकेंडरी स्कूल ओल्ड फरीदाबाद से मंजू निर्धारित किए गए हैं इस अवसर पर जिला परियोजना समन्वयक अधिकारी अनीता शर्मा ने कहा की सरकारी स्कूलों को भी प्राइवेट स्कूलों की तरह रूप और स्वरूप देने के लिए बच्चों को अंग्रेजी उत्तम प्रकार से सिखाने के लिए अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि उनकी हिचकिचाहट खत्म हो सके इस अवसर पर प्रसिद्ध शिक्षाविद दार्शनिक और समाजशास्त्री तथा अनेकों पुस्तकों के लेखक प्रोफेसर एमपी सिंह ने बतौर रिसोर्स पर्सन सभी अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा की गुरु पूजनीय वंदनीय और प्रार्थिनी य होता है उसे अपनी मर्यादा में रहकर सर्वोत्कृष्ट कार्य राष्ट्रहित में करने चाहिए उनके पास कक्षाओं में देश का भविष्य शिक्षा ग्रहण कर रहा होता है जैसी शिक्षा अध्यापकों से वह प्राप्त करता है वैसा ही देश का निर्माण होता है इसलिए मोटिवेटर डॉक्टर एमपी सिंह ने कहा कि हम सभी बहुत पढ़े-लिखे और अनुभवी तो हैं लेकिन कई बार जिम्मेदार नहीं बन पाते हैं यदि हम अपनी जिम्मेदारी को बखूबी से निभा ले और कर्तव्य परायण हो जाएं तो किसी को भी किसी प्रकार का कहने का मौका नहीं मिलेगा और बच्चों की प्रतिभा अतुलनीय देखने को मिलेगी अध्यापक का सम्मान पहले से ही परमपिता परमात्मा की तरह किया जाता है और समाज के लोगों का विश्वास भी अध्यापक पर ही होता है इसलिए उन्हें डॉक्टर एमपी सिंह ने अपील की कि हमें विश्वास को कभी नहीं तोड़ना चाहिए विश्वास जीतने के लिए ही काम करना चाहिए भाषा या विषय कोई भी हो जब हम मन से किसी विषय को पढ़ाते हैं तो उसके परिणाम बेहतर होते हैं निर्भर करता है अध्यापक की प्रेजेंटेशन पर और व्यवहार कुशलता पर अंत में डॉक्टर एमपी सिंह ने कहा कि अध्यापक को हजारों आंखें देख रही होती है और हजारों लोग उनका अवलोकन कर रहे होते हैं इसलिए अध्यापक को मर्यादा में रहकर अपनी जिम्मेदारी को पूर्ण समर्पण के साथ निभाना चाहिए और बच्चों में भारतीय सभ्यता और संस्कृति को कूट-कूट कर भर देना चाहिए। 

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