Tuesday, November 27, 2018

स्कूल कहें या गौशाला या फिर कूडाघर, बड़खल के इस स्कूल के अध्यापक हो चुके हैं पुरुस्कृत


The school is called or Gaushala or Kudghar, the teacher of this school of Bakhal has been rewarded
फरीदाबाद(abtaknews.com दुष्यंत त्यागी) 27 नवंबर,2018; अरावली पहाड़ी और पॉश सेक्टर-21 के बीच बसे गांव अनखीर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बच्चे पशुओं के डर के साये में पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल की चारदीवारी न होने से पशु स्कूल में घूमते रहते हैं। इनसे स्टूडेंट्स तो क्या टीचर भी डरते हैं। कई बार पशुओं ने बच्चों को चोटिल भी किया है। स्कूल, स्कूल कम गौशाला और कूडाघर ज्यादा लगता है, स्कूल में कूढे के ढेर लगे हुए हैं। बच्चों के लिए पर्याप्त कमरे भी नहीं है जिन्हें सर्दी के मौसम में भी खुले में बैठकर पढना पडता है। यह हाल तो तब है, जब बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए स्कूल के प्रिंसिपल को पुरुस्कृत किया जा चुका है। 

बड़खल विधानसभा क्षेत्र में आने वाले अनखीर गांव में 1952 में 8वीं कक्षा तक स्कूल का निर्माण हुआ था। स्कूल में गांव के अलावा, बड़खल गांव व अन्य गांवों के युवा यहां शिक्षा लेने आते थे। 2007 में स्कूल को अपग्रेड कर 12वीं कक्षा तक किया गया। यहां 650 विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं। प्रिंसिपल समेत 35 टीचर यहां पढ़ाते हैं। इसके बावजूद स्टूडेंट्स को यहां रोजाना अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है।
स्कूल में आज चारदीवारी कई जगह से गिर चुकी है। जबकि कई जगह से गिरने की कगार पर है। इस कारण पशुओं का स्कूल में आना-जाना लगा रहता है। कई बार पशु विद्यार्थियों के पीछे भी भागते हैं, जिससे कि आज तक कुछ बच्चों को चोटें भी आ चुकी हैं। 

गांव के इस स्कूल के प्रिंसिपल को अच्छे कार्यों के लिए हरियाणा सरकार पुरुस्कृत कर चुकी है वही स्कूल इन दिनों कूड़ाघर बना हुआ है। जिसकी बदबू से बच्चों को परेशानी होती है। स्वच्छता अभियान की दुहाई देने वाली सरकारी के सरकार स्कूल में ही सफाई का बुरा हाल है।स्कूल में पर्याप्त कमरे भी नहीं हैं, जिस कारण विद्यार्थियों को गर्मी हो या सर्दी पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ना पढ़ता है। दो कमरे जर्जर हाल में हैं। यहां कोई हादसा न हो जाए इसके डर से टीचर इन कमरों का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। कई साल से यहां 4 कमरे निर्माणाधीन हैं। प्रिंसिपल व अध्यापकों ने दो कमरों की साफ-सफाई कर उन्हें बैठने लायक बनाया है। निर्माणाधीन दो कमरों में फर्श भी नहीं डाले गए हैं, जिस कारण विद्यार्थी टाट पट्टी बिछाकर पढ़ते हैं। इन सभी चीजों पर कभी किसी अधिकारी का ध्यान नहीं दिया।

विद्यार्थियों के लिए साफ पानी तो दूर पर्याप्त पानी की व्यवस्था तक नहीं। सैकड़ों विद्यार्थी मात्र एक टंकी के भरोसे हैं। वह भी पानी स्वच्छ नहीं रहता। कई दिन का पानी टंकी में रहता है। बच्चे जहां पानी पीते हैं, वह जगह भी गंदी ही पड़ी रहती है। ऐसे में उनकी सेहत से भी खिलवाड़ हो रहा है।
10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं का रिजल्ट स्टूडेंट्स की पढ़ाई के प्रति गंभीरता को दर्शाता है। केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर व खंड शिक्षा अधिकारी मुनेश चैधरी ने बेहतर परिणाम के चलते इस स्कूल की प्रिंसिपल बृजबाला को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। मगर शिक्षा विभाग का स्कूल की ओर ध्यान नहीं गया।

loading...
SHARE THIS

0 comments: